Eye Floaters Symptoms: आंखों के सामने दिखते हैं काले धब्बे या जाले? जानिए क्या हैं Eye Floaters और कब हो सकते हैं खतरनाक

Eye Floaters Symptoms: आंखों के सामने दिखते हैं काले धब्बे या जाले? जानिए क्या हैं Eye Floaters और कब हो सकते हैं खतरनाक

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Eye Floaters Symptoms:  अक्सर लोगों को साफ आसमान, सफेद दीवार या मोबाइल-लैपटॉप की स्क्रीन देखते समय आंखों के सामने छोटे-छोटे काले धब्बे, धागे या जाले जैसे निशान तैरते हुए दिखाई देते हैं। इन्हें आई फ्लोटर्स (Eye Floaters) कहा जाता है। आमतौर पर ये नुकसानदायक नहीं होते, लेकिन यदि अचानक इनकी संख्या बढ़ने लगे तो यह आंखों की गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकता है।

क्या होते हैं आई फ्लोटर्स? Eye Floaters Symptoms

आई फ्लोटर्स छोटे-छोटे काले बिंदु, धागे या मकड़ी के जाले जैसी आकृतियां होती हैं, जो आंखों के सामने तैरती हुई महसूस होती हैं। ये विशेष रूप से तब ज्यादा दिखाई देते हैं जब व्यक्ति किसी सफेद या चमकदार सतह को देख रहा हो।

विशेषज्ञों के अनुसार आंख के अंदर एक जेली जैसा पदार्थ होता है, जिसे विट्रियस (Vitreous Gel) कहा जाता है। यह आंख के लेंस और रेटिना के बीच मौजूद रहता है। उम्र बढ़ने या अन्य कारणों से जब इसमें बदलाव आते हैं, तो फ्लोटर्स दिखाई देने लगते हैं।

क्यों दिखाई देते हैं फ्लोटर्स?

समय के साथ विट्रियस जेल में मौजूद कोलेजन फाइबर आपस में चिपककर छोटे-छोटे गुच्छे बना लेते हैं। जब रोशनी इन पर पड़ती है तो उनकी परछाई रेटिना पर बनती है और व्यक्ति को ये धब्बे या धागों के रूप में नजर आते हैं।

कुछ मामलों में विट्रियस का रेटिना से अलग होना, जिसे पोस्टेरियर विट्रियस डिटैचमेंट (PVD) कहा जाता है, भी फ्लोटर्स का कारण बन सकता है।

युवाओं में क्यों बढ़ रही है समस्या?

पहले फ्लोटर्स को बढ़ती उम्र से जुड़ी समस्या माना जाता था, लेकिन अब कम उम्र के लोगों में भी इसके मामले बढ़ रहे हैं।

इसके प्रमुख कारण हैं:

  • मायोपिया (नजर कमजोर होना)
  • लंबे समय तक मोबाइल और लैपटॉप का इस्तेमाल
  • बढ़ता स्क्रीन टाइम
  • बाहर कम समय बिताना
  • आंखों पर लगातार तनाव

डॉक्टरों का कहना है कि स्क्रीन सीधे तौर पर फ्लोटर्स पैदा नहीं करती, लेकिन लंबे समय तक स्क्रीन देखने से पहले से मौजूद फ्लोटर्स अधिक स्पष्ट नजर आने लगते हैं।

किन लोगों में ज्यादा रहता है खतरा?

जिन लोगों का माइनस नंबर ज्यादा होता है, उनमें रेटिना कमजोर होने, रेटिना में छेद बनने या रेटिना डिटेचमेंट का खतरा अधिक रहता है। ऐसे लोगों में फ्लोटर्स की समस्या भी ज्यादा देखी जाती है।

इसके अलावा:

  • आंख में चोट लगना
  • भारी वजन उठाना
  • बहुत जोर से खांसना
  • बार-बार तेज छींक आना
  • कब्ज के दौरान अत्यधिक जोर लगाना

जैसी स्थितियां भी कुछ मामलों में विट्रियस पर असर डाल सकती हैं।

कब हो सकता है खतरे का संकेत?

अधिकांश फ्लोटर्स समय के साथ कम परेशान करते हैं और मस्तिष्क इनके साथ खुद को एडजस्ट कर लेता है। लेकिन कुछ लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें अगर:

  • अचानक बड़ी संख्या में नए फ्लोटर्स दिखाई दें।
  • आंखों में बिजली चमकने जैसी फ्लैश नजर आए।
  • नजर के किसी हिस्से पर पर्दा या छाया महसूस हो।
  • अचानक दृष्टि धुंधली होने लगे।

विशेषज्ञों के अनुसार ये संकेत रेटिना डिटेचमेंट जैसी गंभीर समस्या के हो सकते हैं, जिसमें आंख के पीछे मौजूद रेटिना अपनी जगह से अलग होने लगती है। समय पर इलाज न मिलने पर स्थायी रूप से दृष्टि जाने का खतरा भी हो सकता है।

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