Guru Prem

गुरु प्रेम अमूल्य वस्तु

Guru Prem प्रात: काल का समय था। वायु पेड़ों के पत्तों से खेल रही थी। भोर का नभ पूर्व में पहाड़ियों के काले बादलों से ढका था। पक्षियों की चहचहाट सारे वातावरण को जगाने का प्रयत्न कर रही थी। फूलों के पराग की महक संपूर्ण सृष्टि को मदमस्त बना रही थी। ऐसे खुशमिजाज प्राकृतिक परिवेश […]
साहित्य