time has come to think beyond RamMandir Maszid says Iqbal Ansa

“Interview with सच कहूँ” – अयोध्या मामला : वक्त मंदिर-मस्जिद से आगे सोचने का है: इकबाल अंसारी

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मसले को उन्होंने हमेशा भाई-चारे से सुलझाने की वकालत की। दरअसल, उनको मुल्क बहुत प्यारा था। इसलिए उनके लिए मुल्क पहले था, मंदिर-मस्जिद बाद में।
child labor!

बाल श्रम की गिरफ्त में सिसकता बचपन!

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झुग्गी बस्तियों में रहते हैं या वंचित परिवारों से आते हैं, उनकी शिक्षा तथा सुरक्षा के लिए शहरों में 'बाल शिक्षण-प्रशिक्षण केंद्र' नाम से आवासीय विद्यालय की स्थापना की जा सकती है, जहां बच्चे रहकर ना सिर्फ पढ़ाई कर सकें,
Maharashtra,

महाराष्ट्र में विचित्र सियासी गठबंधन

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झूठ और धोखे के इस खेल में भाजपा, राकांपा, शिव सेना और कांग्रेस ने आज के भारत के सच को उजागर किया है कि सत्ता ही सब कुछ है। आप यह भी कह सकते हैं कि यही लोकतंत्र है
farmers

किसानों की सुध लेने की जरूरत

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हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि कृषि और कृषकों की दशा में सुधार के बिना देश का विकास संभव नहीं है। अगर इसी तरह किसानों का कृषि क्षेत्र से पलायन होता रहा
Telecom sector

टेलीकॉम सेक्टर: गहराता संकट और संभावनाएं

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एक निश्चित अंतराल में अपनी देनदारियों को अदा कर सकें। यदि किसी कारण बस इस सेक्टर में प्रतिस्पर्धा कम होती है तो निश्चित तौर पर नुक्सान आम आदमी का होने वाला है।
JNU

जेएनयू: शिक्षा की आड़ में पनप रही देशविरोधी संस्कृति

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जेएनयू छात्रों ने हिस्सा लिया। इसके अलावा, इन तत्वों ने 2010 में दंतेवाडा में सीआरपीएफ के 74 जवानों की हत्या पर जश्न भी मनाया था।
law and order

कानून और व्यवस्था का टकराव: तूं कौन, मैं ख्वामख्वाह?

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जनता कानून और व्यवस्था के स्तंभों से उत्तरदायित्व और जवाबदेही की मांग कर रही है। हमारा लक्ष्य कानून का शासन लागू करना और राज्य का इकबाल बनाए रखना होना चाहिए।
supreme decision

सर्वोच्च निर्णय के बावजूद सियासत जारी

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सूक्ष्म अध्ययन के बाद ही निर्णय को लिखा है। निर्णय आने के बाद देशभर से इसकी सकारात्मक प्रतिक्रियाएं सुनने, देखने और पढ़ने को मिली।
Democracy

लोकतंत्र की मजबूती में प्रेस की भूमिका

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वहीं अब दो पायदान और नीचे खिसककर 140वें पायदान पर पहुंच गया है। निसंदेह प्रेस की स्वतंत्रता के मामले में यह गिरावट स्वस्थ लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत नहीं है।
RTI

आरटीआई के दायरे में मुख्य न्यायाधीश का दफ्तर

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कॉलेजियम व्यवस्था में पारदर्शिता की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी। सूचना के अधिकार कानून के तहत लाने वाला फैसला एक जरूरी संदेश भी दे रहा है

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खेल-खेल में स्कूल का जादू

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