बिजली के अविष्कार में माइकल फैराडे का अहम योगदान

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बिजली का महत्वपूर्ण अविष्कार करने वालो में माइकल फैराडे का बड़ा उच्च स्थान है। वह लन्दन के के लुहार का पुत्र था। फैराडे को पाठशाला की कुछ अधिक शिक्षा भी नहीं मिली थी। वह केवल साधारण पढ़ा और लिख सकने और मामूली गणित के अतिरिक्त कुछ अधिक नही पढ़ सका था। वह घर पर या सड़कों पर घूमते हुए फालतू समय बिताता था। गरीबी में इस तरह समय काटकर उसने 13 वर्ष की आयु में ही एक पुस्तक की दुकान में 1905 ई. में दफ्तरी की नौकरी की। उसे विज्ञान की बाते सीखने की लालसा थी। वह वैज्ञानिकों के भाषण सुनता। कुछ विज्ञान के साधारण प्रयोग करने के उपाय भी करता। उसने साहस कर अपने वे संक्षिप्त विवरण हम्फ्री डैवी के पास अवलोकनार्थ भेज दिए।

साथ ही विज्ञान सीखने का अवसर मिलने वाला कुछ काम भी देने की प्रार्थना की। उसके भाषणों का इतना सुंदर सारांश फैराडे ने किया था कि हम्फ्री डैवी ने उन्हें बहुत पसंद किया और ऐसे होनहार बालक को अपनी संस्था में बुलाकर नौकरी में रख लिया। एक दिन यही लुहार का अर्धशिक्षित लड़का हम्फ्री डैवी की जगह रॉयल इंस्टिट्यूट का अध्यक्ष बन गया। एक दिन वह संसार का प्रसिद्ध अविष्कारक बनेगा यह कौन जानता था। बिजली और चुम्बक का परस्पर क्या संबध है इस संबध में वैज्ञानिकों ने बहुत से प्रयोग कर कुछ बाते जानने की कोशिश की।

डेनमार्क के एक वैज्ञानिक हैन्स क्रिश्सिय्न ओएस्त्रेद ने 1820 ई. में कोपेनहेगन में चुम्बक की सुई पर बिजली की धारा के प्रभाव का अविष्कार किया। दो चुम्बको के समान ध्रुव एक दुसरे को दूर हटाते अर्थात प्रतिकर्षित करते है और उनके असमान ध्रुव एक दुसरे को निकट करते अर्थात आकर्षित करते है ओयेस्तार्ड के प्रयोग में बिजली की धारा ने चुम्बक के ध्रुवो को प्रतिकर्षित किया था। यह आश्यर्य था। कहा जाता है कि संसार के दो वैज्ञानिको ने एक दूसरे से बहुत दूर देशों में रहते हुए बिजली का एक प्रसिद्ध अविष्कार, एक दूसरे के अविष्कार की जानकारी के बिना ही करने की सफलता प्राप्त की। यह 1831 की बात है। संयुक्त राज्य अमेरिका में जोजफ हेनरी ने और इंग्लैंड के माइकल फैराडे का ही नाम इसके लिए अधिक प्रसिद्ध है।

 

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