Weather: आसमान से बरसते अंगारों के बीच आई रही है खुशखबरी, हरियाणा से लेकर पंजाब, यूपी तक होगी बारिश, मौसम विभाग का आया ताजा अपडेट
आसमान से बरसते अंगारों के बीच आई रही है खुशखबरी, हरियाणा से लेकर पंजाब, यूपी तक होगी बारिश, मौसम विभाग का आया ताजा अपडेट
Weather: संदीप सिंहमार। नई दिल्ली/हिसार उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में पिछले एक सप्ताह से जारी भीषण गर्मी और लू से अब कुछ राहत मिलने की संभावना बनती दिख रही है। मौसम विज्ञानियों के मुताबिक 28 से 31 मई के बीच सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ और उससे बनने वाली ट्रफ के असर से पंजाब, हरियाणा, दिल्ली व पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बड़े हिस्सों में अधिकतम तापमान में 7-8 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की जा सकती है। हालांकि यह राहत अस्थायी होगी और इसके साथ ही कई जगहों पर आँधी, तेज हवाएं, बारिश और कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि के कारण स्थानीय स्तर पर परेशानियाँ बढ़ने की आशंका है।
पिछले 24 घंटों के तापमान आँकड़े बताते हैं कि राजस्थान के श्रीगंगानगर में 48.2 डिग्री सेल्सियस के साथ देश में सर्वाधिक पारा रिकॉर्ड किया गया। पंजाब व हरियाणा के कई शहरों बठिंडा, फिरोजपुर, लुधियाना, पटियाला, हिसार, रोहतक, सिरसा, नारनौल और करनाल में तापमान 42 से 45 डिग्री के बीच बना रहा। मेरठ, मुरादाबाद और अलीगढ़ में भी पारा 42 डिग्री से ऊपर रहा। सिरसा और रोहतक जैसे क्षेत्रों में तापमान लगभग 46 डिग्री तक पहुँचने से जनजीवन और कृषि दोनों पर गंभीर प्रभाव दिखाई दिया।
स्काईमेट वेदर व भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के बुलेटिनों के अनुसार एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टरबेंस) शीघ्र ही जम्मू-कश्मीर व लद्दाख में पहुँचने वाला है। इसके प्रभाव से उत्तर भारत के मैदानी भागों में प्रेरित चक्रवाती परिसंचरण बनेगा तथा एक पूर्व-पश्चिम ट्रफ गंगा के मैदानी इलाकों से होते हुए दक्षिणी झारखंड व छत्तीसगढ़ के आस-पास तक विस्तारित होगी। इन प्रणालियों के कारण 28-31 मई के बीच व्यापक क्षेत्रों में मौसम गतिविधियाँ तेज होंगी और अधिक तापमान में उल्लेखनीय गिरावट आएगी।
मौसम विभाग ने पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और पश्चिम उत्तर प्रदेश के लिए 28 से 31 मई के बीच मॉनसून-पूर्व गतिविधियों का प्रसार होने का अनुमान जताया है। इन दिनों इन राज्यों के कई हिस्सों में गरज-चमक के साथ स्थान-विशेष पर तेज बारिश और ओलावृष्टि की घटनाएँ सम्भव हैं। साथ ही तेज और झोंकेदार हवाओं के कारण धूलभरी आँधियाँ भी उठ सकती हैं, जो कि सड़कों पर विजिबिलिटी घटाने और परिवहन व्यवस्था प्रभावित करने के साथ-साथ स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ (खासकर श्वसन संबंधी) उत्पन्न कर सकती हैं।
विशेष रूप से दिल्ली-एनसीआर में भी इन तीन-चार दिनों में गरज के साथ बारिश और धूलभरी हवाओं के चलते तापमान में उल्लेखनीय गिरावट की संभावना जताई गई है। यदि ऐसी परिस्थितियाँ बनती हैं तो शहरवासियों को दो-तीन दिन की राहत मिलेगी, पर साथ ही अचानक बदलते मौसम से आवागमन व विद्युत आपूर्ति पर असर पड़ सकता है। कृषि क्षेत्रों के लिए यह अल्पकालीन राहत फसल के दृष्टिकोण से मायने रख सकती है। हालाँकि ओलों की संभावना कुछ फ़सलों के लिए जोखिम भी पैदा कर सकती है।
मौसम विशेषज्ञों ने नागरिकों से सावधानी बरतने का आग्रह किया है। विशेष सुझावों में शामिल हैं:
- तेज हवाओं और ओलावृष्टि वाले समय में खुली जगहों पर न रुकें, पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहें।
- किसान अपने नाजुक फसलों को सुरक्षित करने के लिए स्थानीय कृषि अधिकारियों की सलाह लें और आवश्यक कवर/संरक्षण का प्रबंध करें।
- श्वसन रोगियों और वयस्कों तथा बच्चों को धूलभरी परिस्थितियों में बाहर निकलने से बचायें; जरूरी होने पर मास्क का प्रयोग करें।
- यदि विजली कट या पेड़ों के गिरने जैसी आपात स्थितियाँ हों तो स्थानीय आपदा प्रबंधन और नगर निकायों को सूचित करें।
मौसम विज्ञानियों का कहना है कि यह राहत अस्थायी है और जून के पहले सप्ताह से एक बार फिर गर्मी वापस बढ़ सकती है, इसलिए लम्बी अवधि की योजना बनाते समय 1–2 सप्ताह का अंतराल ध्यान में रखना जरूरी होगा। जिले व राज्य प्रशासन को ऐसे अल्पकालिक मौसम बदलावों के मद्देनजर कृषि, स्वास्थ्य और परिवहन से जुड़े संसाधनों की तैनाती पहले से सुनिश्चित करनी चाहिए। नागरिकों को मौसम विभाग व स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी ताज़ा चेतावनियों पर नजर रखने और आवश्यक सुरक्षा उपाय अपनाने के लिए कहा गया है।