शिक्षा और रोजगार
दिवंगत पिता चाहते थे बेटी बने अफसर, प्रति कौर ने एचसीएस में 24वां रैंक हासिल कर पूरा किया सपना
बिना कोचिंग घर पर की तैयारी, टैक्सेशन इंस्पेक्टर के पद पर रहते हुए पास की परीक्षा
कैथल (सच कहूँ/कुलदीप नैन)। Kaithal News: मेहनत, लगन और परिवार के सहयोग से सफलता की नई इबारत लिखने वाली कैथल जिले के सोंगरी की बेटी प्रति कौर गोयत ने हरियाणा सिविल सर्विसेज परीक्षा में प्रदेशभर में 24वां रैंक हासिल कर अपने परिवार, कैथल शहर और हरियाणा का नाम रोशन किया है। हाल फिलहाल प्रति का परिवार कैथल शहर में रहता है। प्रति ने बिना किसी कोचिंग के घर पर रहकर परीक्षा की तैयारी की। खास बात यह है कि उन्होंने आबकारी एवं कराधान विभाग में टैक्सेशन इंस्पेक्टर के पद पर कार्यरत रहते हुए यह उपलब्धि हासिल की।
हाल फिलहाल प्रति का परिवार कैथल शहर में रहता है प्रति ने बताया कि उन्होंने 12वीं तक की पढाई गाँव सोंगरी गुलियाणा के आरोही मॉडल स्कूल में की। इसके बाद परिवार ने उस पर भरोसा जताते हुए उसे उच्च शिक्षा के लिए कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय भेजा। वह अपने परिवार में पहली लड़की थीं, जिसे विश्वविद्यालय के हॉस्टल में पढ़ाई के लिए भेजा गया। परिवार में सबसे बड़ी संतान होने के कारण पहला लक्ष्य रोजगार हासिल करना था। इसके लिए उसने हरियाणा सीईटी के माध्यम से प्रयास किया। वर्तमान में पिछले दो वर्षों से आबकारी एवं कराधान विभाग में टैक्सेशन इंस्पेक्टर के पद पर कार्यरत हैं। नौकरी मिलने के बावजूद उन्होंने एचसीएस बनने का सपना नहीं छोड़ा। विभाग के अधिकारियों और वरिष्ठ कर्मचारियों ने भी उसकी तैयारी में सहयोग किया।
पिता ने देखा था सपना बेटी अफसर बने
प्रति कौर ने बताया कि पिता जी नहर पटवारी थे जिनका 2024 में देहांत हो गया था। पिता का शुरू से ही सपना था कि बेटी अफसर बने और परिवार का नाम रोशन करे। हालांकि, आज उसके पिता इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनका सपना प्रति के लिए हमेशा प्रेरणा बना रहा। पिता के निधन के बाद उसके दोनों ताऊजी ने उसे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। वहीं, उनकी दादी और मां ने भी उनका पूरा सहयोग किया।
बिना कोचिंग पास की परीक्षा
प्रति के अनुसार, वह सुबह 3 से 4 बजे उठकर पढ़ाई शुरू कर देती थीं और सुबह 9 से 10 बजे तक अध्ययन करती थीं। इसके बाद कुछ समय आराम करने के बाद शाम तक पढ़ाई जारी रखती थीं। नौकरी के दौरान समय सीमित हो गया, इसलिए वह उपलब्ध चार-पांच घंटों का भी पूरा उपयोग करती थीं। उन्होंने किसी संस्थान से कोचिंग नहीं ली और घर पर रहकर ही तैयारी की। वर्ष 2021 में पहली बार एचसीएस परीक्षा दी थी, लेकिन वह परीक्षा रद्द हो गई। इसके बाद दूसरे प्रयास में वह प्रारंभिक परीक्षा पास नहीं कर पाईं। इस बीच उन्होंने टैक्सेशन इंस्पेक्टर की नौकरी ज्वाइन कर ली। असफलता के बाद कुछ कमियों को दूर करने का प्रयास किया और सफलता हासिल हुई।
माँ भी सुबह 3 बजे जाग जाती थी
प्रति की मां एक निजी स्कूल में शिक्षिका हैं। उन्होने बताया कि जब उनकी बेटी सुबह चार बजे उठकर पढ़ाई करती थी, तो वह भी सुबह तीन या साढ़े तीन बजे उठ जाती थीं, ताकि बेटी को महसूस हो कि वह अकेली संघर्ष नहीं कर रही है। घर का काम करते समय भी वह बेटी की पढ़ाई में मदद करती थीं। मां ने कहा कि उन्होंने कभी पढ़ाई के कारण उस पर घर के काम का दबाव नहीं डाला। प्रति के ताऊ ने कहा कि बच्चों पर विश्वास करना बहुत जरूरी है, विशेषकर बेटियों को उच्च शिक्षा के लिए बाहर भेजते समय परिवार को उन पर भरोसा रखना चाहिए।