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लोगों के ताने दरकिनार कर बेटी को खेलने भेजा, आज कामयाबी पर पिता का सीना गर्व से चौड़ा
लोगों के ताने दरकिनार कर बेटी को खेलने भेजा, आज कामयाबी पर पिता का सीना गर्व से चौड़ा
सरसा (सच कहूँ न्यूज)। Sirsa News: कभी बेटी को खेल के मैदान में भेजने पर लोगों के ताने सुनने वाले पिता आज उसी की कामयाबी पर गर्व से सिर ऊंचा कर रहे हैं। फतेहाबाद के गांव बोस्ती की पूजा प्रजापति ने एशियन गेम्स में हाई जंप का कांस्य पदक जीतकर उन सोच को चुनौती दी है, जो बेटियों के सपनों पर बंदिशें लगाती हैं। राजमिस्त्री पिता हंसराज ने लोगों की परवाह किए बिना बेटी को आगे बढ़ने का मौका दिया और पूजा ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। अब उनका लक्ष्य कांस्य पदक से आगे बढ़कर देश के लिए गोल्ड मेडल जीतना है। पूजा का संदेश साफ है बेटियों पर भरोसा कीजिए, उन्हें मौका दीजिए, वे अपनी कामयाबी से दुनिया की सोच बदल सकती हैं।
इसी उपलब्धि पर शनिवार को सरसा में जिला कुम्हार सभा की ओर से आयोजित सम्मान समारोह में पूजा प्रजापति, उनके पिता हंसराज और माता किरण को सम्मानित किया गया। इस दौरान पूजा ने अपनी खेल यात्रा, संघर्ष और भविष्य के लक्ष्यों को सच कहूँ के साथ साझा किया।
योगा जिम्नास्टिक से शुरू हुआ सफर, फिर हाई जंप को बनाया लक्ष्य
पूजा ने बताया कि उनकी खेल यात्रा की शुरूआत योगा जिम्नास्टिक से हुई थी। उन्होंने करीब दो साल तक इन खेलों में हिस्सा लिया। इसके बाद धीरे-धीरे हाई जंप की ओर रुख किया और इसी खेल में अपनी पहचान बनाई। इस सफर में उनके माता-पिता का सबसे बड़ा योगदान रहा। इसके अलावा कोच ने भी उनका पूरा साथ दिया।
बारिश के कारण प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा, अब गोल्ड पर नजर
पूजा ने बताया कि एशियन गेम्स में उनका लक्ष्य गोल्ड मेडल जीतना था, लेकिन उस दिन परिस्थितियां अनुकूल नहीं रहीं। बारिश के कारण भी वह उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाईं। हालांकि, कांस्य पदक जीतना उनके लिए बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि इस साल की प्रतियोगिताएं समाप्त हो चुकी हैं। अब वह अगले साल होने वाली विश्व चैंपियनशिप और इसके बाद होने वाले ओलंपिक की तैयारी में जुटेंगी।
'बेटियों को घर से बाहर निकलने का मौका दें माता-पिता'
पूजा ने कहा कि कई बार लड़कियों को घर से बाहर जाकर खेलने की अनुमति नहीं मिलती। ऐसे में वह माता-पिता से अपील करती हैं कि वे अपनी बेटियों पर भरोसा करें और उन्हें आगे बढ़ने का अवसर दें। बेटियों को मौका मिलेगा, तभी वे अपने सपनों को साकार कर सकेंगी।
पूजा के पिता हंसराज राजमिस्त्री हैं, जबकि मां किरण गृहिणी हैं। पूजा दो भाई-बहनों में बड़ी हैं। उनका छोटा भाई बीए प्रथम वर्ष का छात्र है। हंसराज ने बताया कि पहले जब वह बेटी को खेलने के लिए बाहर भेजते थे, तो कुछ लोग तरह-तरह की बातें करते थे। इसके बावजूद उन्होंने बेटी का साथ नहीं छोड़ा। आज पूजा की उपलब्धि के कारण लोग उन्हें पहचानने लगे हैं और बेटी का जगह-जगह सम्मान हो रहा है। उन्होंने कहा कि बेटी को मिल रहा मान-सम्मान देखकर उन्हें बेहद खुशी होती है। उन्होंने साबित किया कि परिवार का भरोसा, सही मार्गदर्शन और लगातार मेहनत किसी भी बेटी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकती है।