El Nino 2026: NASA की चेतावनी! समुद्र में बन रहा खतरनाक 'गॉडजिला' अल नीनो, भारत पर भी पड़ेगा असर
दुनिया के मौसम पर बड़ा असर! NASA ने अल नीनो को लेकर जारी किए चिंताजनक संकेत
El Nino 2026: प्रशांत महासागर में एक बेहद शक्तिशाली अल नीनो (El Niño) बनने की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA के सैटेलाइट से मिले नए आंकड़ों ने वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना 1997 के ऐतिहासिक और विनाशकारी "गॉडजिला अल नीनो" जैसी स्थिति पैदा कर सकती है।
NASA सैटेलाइट ने क्या देखा?
नासा के सेंटिनल-6 माइकल फ्रेलिच सैटेलाइट ने प्रशांत महासागर की सतह पर असामान्य गर्मी और समुद्र स्तर में बढ़ोतरी दर्ज की है। वैज्ञानिकों के मुताबिक भूमध्यरेखा के आसपास समुद्र का स्तर सामान्य से अधिक ऊंचा पाया गया है, जो इस बात का संकेत है कि समुद्र के नीचे बड़ी मात्रा में गर्म पानी जमा हो रहा है।
गर्म पानी फैलने के कारण समुद्र की सतह ऊपर उठ जाती है, इसलिए समुद्र स्तर में वृद्धि को अल नीनो की तीव्रता का महत्वपूर्ण संकेत माना जाता है।
क्या होता है अल नीनो?
अल नीनो एक प्राकृतिक जलवायु घटना है, जिसमें मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर का सतही तापमान सामान्य से अधिक बढ़ जाता है। इसका असर दुनिया भर के मौसम पैटर्न पर पड़ता है। अमेरिका की मौसम एजेंसी NOAA ने 11 जून को अल नीनो की शुरुआत की पुष्टि की थी। इसके बाद से वैज्ञानिक लगातार इसकी निगरानी कर रहे हैं।
1997 के 'गॉडजिला अल नीनो' जैसी स्थिति?
वैज्ञानिकों का कहना है कि पश्चिमी प्रशांत महासागर की मौजूदा स्थिति काफी हद तक 1997 के शक्तिशाली अल नीनो से मिलती-जुलती है। 1997 का अल नीनो इतना प्रभावशाली था कि उसे "गॉडजिला अल नीनो" नाम दिया गया था।
नासा द्वारा तैयार समुद्री मानचित्र में लाल रंग वाले क्षेत्रों में समुद्र का स्तर सामान्य से अधिक दिखाया गया है, जो गर्म पानी के बड़े भंडार की ओर इशारा करता है। वहीं नीले रंग वाले क्षेत्र अपेक्षाकृत ठंडे और निम्न समुद्र स्तर को दर्शाते हैं।
पूरी दुनिया पर पड़ सकता है असर
विशेषज्ञों के अनुसार यह अल नीनो केवल समुद्री क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा। इसके कारण दुनिया के कई हिस्सों में तापमान सामान्य से अधिक रह सकता है। साथ ही बारिश के पैटर्न में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
संभावित प्रभाव:
कई देशों में भीषण गर्मी
सूखा और कम वर्षा की स्थिति
कुछ क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा
कृषि उत्पादन पर असर
ऊर्जा और खाद्य कीमतों में बढ़ोतरी
भारत के लिए क्यों चिंता की बात?
भारत में मानसून कृषि और अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। अल नीनो के दौरान अक्सर मानसून कमजोर पड़ जाता है, जिससे वर्षा में कमी आ सकती है। यदि ऐसा होता है तो खेती, जल संसाधनों और खाद्य उत्पादन पर असर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पहले से बढ़ रही गर्मी के बीच यदि अल नीनो और मजबूत हुआ तो भारत में तापमान और बढ़ सकता है। साथ ही कमजोर मानसून देश की लगभग 4 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था पर भी प्रभाव डाल सकता है।
क्या कहते हैं वैज्ञानिक?
वैज्ञानिक लगातार सैटेलाइट और समुद्री आंकड़ों की मदद से स्थिति पर नजर रख रहे हैं। फिलहाल संकेत यही हैं कि अल नीनो आने वाले महीनों में और मजबूत हो सकता है। यदि यह 1997 जैसी तीव्रता तक पहुंचता है, तो इसका असर वैश्विक मौसम, कृषि और अर्थव्यवस्था पर व्यापक रूप से देखने को मिल सकता है।
