New Zealand Elections: न्यूजीलैंड चुनाव में कांटे का मुक़ाबला

न्यूजीलैंड चुनाव में छोटे दलों के हाथ में सत्ता की चाबी!

Published On

New Zealand Election Results: वेलिंगटन (सच कहूँ/एजेंसी)। न्यूजीलैंड के आम चुनाव की वोटिंग (7 नवंबर) संपन्न होने के कुछ देर बाद ही काउंटिंग शुरू हो गई। शुरुआती नतीजों में सत्तारूढ़ नेशनल पार्टी को 29.4 फीसदी और मुख्य विपक्षी लेबर पार्टी को 29.9 फीसदी मत मिले। इस तरह दोनों के बीच मुकाबला बेहद करीबी हो गया है। लगभग 35 फीसदी काउंटिंग होने के बाद ये स्पष्ट किया गया।

शनिवार को जारी शुरुआती मतगणना में दोनों दलों के बीच वोटों का अंतर लगातार बदलता दिखाई दिया। शुरुआती रुझानों में नेशनल पार्टी आगे रही, जबकि मतगणना के दौरान लेबर पार्टी ने भी उसे कड़ी चुनौती दी। किसी भी प्रमुख दल को स्पष्ट बहुमत मिलने के संकेत नहीं हैं, और ऐसे में सरकार गठन में छोटे दलों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।

न्यूजीलैंड में आम चुनाव के लिए 7 नवंबर को मतदान हुआ। हालांकि, अग्रिम मतदान की प्रक्रिया 26 अक्टूबर से ही शुरू हो गई थी। चुनाव आयोग के अनुसार, मतदान केंद्र स्थानीय समयानुसार सुबह 9 बजे से शाम 7 बजे तक खुले रहे। चुनाव से पहले ही दोनों प्रमुख दलों के बीच कड़ा मुकाबला होने के अनुमान लगाए जा रहे थे।

अन्य दलों के प्रदर्शन पर टिकी सत्ता की चाबी

न्यूजीलैंड के चुनाव आयोग की शुरुआती मतगणना में नेशनल पार्टी को 29.4 प्रतिशत और लेबर पार्टी को 29.9 प्रतिशत वोट मिले। ग्रीन पार्टी 14.1 प्रतिशत, एसीटी न्यूजीलैंड 10.5 प्रतिशत और न्यूजीलैंड फर्स्ट पार्टी 9.3 प्रतिशत वोट के साथ अन्य प्रमुख दलों में शामिल रहे। ऑपरचुनिटी पार्टी को 5.4 प्रतिशत वोट मिले, जो संसद में प्रवेश के लिए जरूरी पांच प्रतिशत की सीमा से अधिक हैं। ये शुरुआती आंकड़े हैं और अंतिम परिणाम नहीं हैं।

प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के नेतृत्व में नेशनल पार्टी मौजूदा गठबंधन सरकार का नेतृत्व कर रही है। वहीं, लेबर पार्टी के नेता और पूर्व पीएम क्रिस हिपकिंस सत्ता में वापसी की कोशिश कर रहे हैं। हिपकिंस 2023 के चुनाव में हार गए थे। इस बार उनका अभियान महंगाई, स्वास्थ्य सेवाओं और आम लोगों के जीवन-यापन की बढ़ती लागत जैसे मुद्दों पर केंद्रित रहा है।

लक्सन और हिपकिंस के बीच सत्ता की जंग

चुनाव प्रचार के दौरान न्यूजीलैंड की अर्थव्यवस्था और बढ़ती बेरोजगारी प्रमुख मुद्दे रहे। देश लंबे आर्थिक सुस्ती के दौर से धीरे-धीरे उबर रहा है। बेरोजगारी दर 5.7 प्रतिशत तक पहुंचने और घरेलू बजट पर बढ़ते दबाव ने मतदाताओं की चिंताएं बढ़ाई हैं। नेशनल पार्टी ने बजट घाटा कम करने और वित्तीय अनुशासन के जरिए अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का वादा किया है। वहीं, लेबर पार्टी ने स्वास्थ्य सेवाओं और परिवहन को सस्ता बनाने पर जोर दिया है।

इस चुनाव में ऑपरचुनिटी पार्टी भी महत्वपूर्ण भूमिका में उभरती दिखाई दे रही है। पार्टी का नेतृत्व किउले वोंग कर रही हैं। पांच प्रतिशत से अधिक वोट हासिल करने के कारण पार्टी को संसद में प्रतिनिधित्व मिलने की संभावना है। चुनाव से पहले आए सर्वेक्षणों में भी इस पार्टी को संभावित गठबंधन सरकार के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा था। हालांकि, नेशनल पार्टी के नेता लक्सन पहले ही अवसर पार्टी के साथ गठबंधन की संभावना से इनकार कर चुके हैं।

न्यूजीलैंड की चुनाव प्रणाली भी इस मुकाबले को दिलचस्प बनाती है। यहां मिश्रित सदस्य आनुपातिक प्रतिनिधित्व (एमएमपी) प्रणाली लागू है। इसके तहत मतदाता दो वोट डालते हैं। पहला अपने निर्वाचन क्षेत्र के उम्मीदवार के लिए और दूसरा किसी राजनीतिक पार्टी के लिए होता है। संसद में पार्टियों की कुल सीटें मुख्य रूप से उनके पार्टी वोट के अनुपात के आधार पर तय होती हैं। इस व्यवस्था में किसी एक पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने पर गठबंधन सरकार बनाना आम बात है।

वर्ष 2023 के आम चुनाव में नेशनल पार्टी को सबसे अधिक वोट मिले थे, लेकिन सरकार बनाने के लिए उसे न्यूजीलैंड फर्स्ट और एसीटी पार्टी के साथ गठबंधन करना पड़ा था। इस बार भी छोटे दलों के समर्थन के बिना सरकार गठन का रास्ता मुश्किल हो सकता है। न्यूजीलैंड के चुनाव आयोग ने 27 नवंबर को आधिकारिक नतीजे घोषित करने का कार्यक्रम तय किया है। विदेशों में रहने वाले न्यूजीलैंड के नागरिकों के वोट और विशेष मतों की गिनती भी अंतिम परिणाम में शामिल होगी। न्यूजीलैंड की संसद में कुल 120 सीटें हैं और बहुमत के लिए 61 सीटों की जरूरत होती है।

About The Author

Comments

Post Comment

Related Posts