India-Afghanistan: जानें क्या है अफगानिस्तान का महाभारत के साथ रिश्ता, कैसे गंधार बना कंधार
India-Afghanistan: भारत और अफगानिस्तान के संबंध सदियों पुराने हैं। ये रिश्ता केवल सीमाओं या कूटनीति तक सीमित नहीं, बल्कि इतिहास, संस्कृति, व्यापार और मानवता के धागों से बुना हुआ है। हिंदुकुश पर्वत के उस पार बसा अफगानिस्तान, प्राचीन काल में भारत के साथ गहरे सामाजिक और आर्थिक संबंधों के लिए जाना जाता रहा है। अफगानिस्तान का नाम सुनते ही गांधार, बामियान और कंधार जैसी जगहें याद आती हैं, जो भारतीय इतिहास का अभिन्न हिस्सा रही हैं।
प्राचीन भारत का गांधार महाजनपद आज के अफगानिस्तान के बड़े हिस्से में फैला था। महाभारत के पात्र शकुनी और गांधारी का संबंध भी इसी क्षेत्र से था। इसी भूमि से बौद्ध धर्म का प्रसार मध्य एशिया और चीन तक हुआ। बामियान में बनी महात्मा बुद्ध की विशाल मूर्तियां भारत और अफगानिस्तान की साझा सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक हैं। मौर्य सम्राट अशोक ने भी अपने शासनकाल में अफगानिस्तान के कई हिस्सों में शिलालेख स्थापित किए थे, जो दोनों देशों के ऐतिहासिक जुड़ाव का प्रमाण हैं। इसके बाद मुगल काल में भी अफगान योद्धाओं और व्यापारियों का भारत से गहरा संपर्क बना रहा। India-Afghanistan
आर्थिक और व्यापारिक रिश्ते
भारत और अफगानिस्तान का व्यापारिक संबंध भी ऐतिहासिक है। प्राचीन काल में अफगानिस्तान भारत, फारस और मध्य एशिया के बीच व्यापारिक मार्ग का केंद्र था। यह सिल्क रूट का एक महत्वपूर्ण पड़ाव था। आज भी दोनों देशों के बीच व्यापार मजबूत हो रहा है। भारत अफगानिस्तान के शीर्ष व्यापारिक साझेदारों में से एक है। भारत से अफगानिस्तान को मुख्य रूप से दवाइयां, चाय, चीनी, परिधान, बासमती चावल और निर्माण सामग्री निर्यात की जाती है। वहीं अफगानिस्तान से भारत में सूखे मेवे, किशमिश, बादाम, अंजीर, केसर, और औषधीय जड़ी-बूटियाँ आयात होती हैं।
वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2022-23 में भारत और अफगानिस्तान के बीच कुल द्विपक्षीय व्यापार लगभग 7,000 करोड़ के आसपास था। अफगानिस्तान में भारत की कई विकास परियोजनाएं चल रही हैं- जैसे सलमा डैम (जिसे अब इंडिया-अफगान फ्रैंडशिप प डैम कहा जाता है) और अफगान संसद भवन, जो भारत की ओर से एक मैत्रीपूर्ण उपहार है।
रणनीतिक महत्व व क्षेत्रीय सहयोग: भारत ने हमेशा अफगानिस्तान को अपने रणनीतिक सहयोगी के रूप में देखा है। दक्षिण एशिया में शांति और स्थिरता के लिए अफगानिस्तान की भूमिका महत्वपूर्ण है। भारत ने तालिबान शासन के बाद भी अफगान जनता के साथ मानवीय सहायता जारी रखी। 2022 और 2023 में भारत ने खाद्यान्न, वैक्सीन और दवाइयों के रूप में हजारों टन मानवीय सहायता भेजी। अफगानिस्तान के लिए भारत ने ईरान के चाबहार बंदरगाह का उपयोग कर एक वैकल्पिक व्यापारिक मार्ग खोला है, जिससे पाकिस्तान की बाधा को पार करते हुए सीधे व्यापार संभव हुआ। India-Afghanistan
यह भी पढ़ें:– Haryana: हरियाणा के इन गांवों की चमकेगी किस्मत, रॉकेट की तरह बढ़ने वाले है जमीन के रेट