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पित्त की पथरी क्यों बनती है? जानें कारण, लक्षण, जांच और बचाव के आसान तरीके
पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द से लेकर पीलिया तक हो सकते हैं संकेत, समय रहते पहचानना जरूरी
पित्त की थैली यानी गॉलब्लैडर लीवर के ठीक नीचे मौजूद एक छोटी थैली होती है। इसमें पित्त रस जमा रहता है, जो शरीर को वसा यानी फैट पचाने में मदद करता है। कई बार इसी पित्त रस में कोलेस्ट्रॉल, बिलिरुबिन या अन्य पदार्थों का संतुलन बिगड़ने से छोटे-छोटे कठोर कण बनने लगते हैं। इन्हीं को पित्त की पथरी या गॉलस्टोन कहा जाता है।
गॉलस्टोन काफी आम समस्या है। कई लोगों में छोटी पथरी होने के बावजूद कोई लक्षण दिखाई नहीं देता और उन्हें इसका पता किसी दूसरी जांच के दौरान चलता है। हालांकि, जब पथरी पित्त की नली में फंस जाती है, तब तेज दर्द और दूसरी परेशानियां हो सकती हैं।
पित्त की पथरी क्यों बनती है?
पित्त रस में मुख्य रूप से कोलेस्ट्रॉल, बिलिरुबिन और अन्य पदार्थ होते हैं। इनके संतुलन में गड़बड़ी होने पर पथरी बनने की संभावना बढ़ सकती है।
पित्त में ज्यादा कोलेस्ट्रॉल
अधिकांश गॉलस्टोन कोलेस्ट्रॉल स्टोन होते हैं। जब पित्त में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा अधिक हो जाती है और वह घुल नहीं पाता, तो धीरे-धीरे क्रिस्टल बन सकते हैं, जो आगे चलकर पथरी का रूप ले लेते हैं।
पित्त की थैली पूरी तरह खाली न होना
अगर गॉलब्लैडर नियमित रूप से पूरी तरह खाली नहीं होता, तो उसमें पित्त अधिक समय तक जमा रह सकता है और गाढ़ा हो सकता है। इससे पथरी बनने का खतरा बढ़ सकता है।
बिलिरुबिन बढ़ना
कुछ लीवर संबंधी बीमारियों और अन्य स्थितियों में शरीर में बिलिरुबिन की मात्रा बढ़ सकती है। इससे भी पित्त की पथरी बनने की संभावना बढ़ सकती है।
इसके अलावा मोटापा, तेजी से वजन कम करना और खान-पान से जुड़ी कुछ आदतें भी गॉलस्टोन के जोखिम को बढ़ा सकती हैं।
पित्त की पथरी के क्या लक्षण होते हैं?
हर व्यक्ति में गॉलस्टोन के लक्षण दिखाई दें, यह जरूरी नहीं है। लेकिन पथरी पित्त की नली में रुकावट पैदा करे तो अचानक परेशानी शुरू हो सकती है।
इसके संभावित लक्षणों में शामिल हैं:
- पेट के ऊपरी दाएं हिस्से में तेज या लगातार दर्द।
- दर्द का पीठ या दाएं कंधे तक पहुंचना।
- जी मिचलाना या उल्टी।
- खाना खाने के बाद पेट में दर्द या भारीपन।
- पेट फूलना और अपच।
- बुखार या ठंड लगना।
- आंखों या त्वचा का पीला पड़ना।
- पेशाब का रंग गहरा होना।
- मल का रंग सामान्य से हल्का होना।
अगर पेट में तेज दर्द के साथ बुखार, उल्टी या आंखों और त्वचा में पीलापन दिखाई दे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में जल्द चिकित्सकीय जांच जरूरी है।
पित्त की पथरी का पता कैसे चलता है?
गॉलस्टोन की जांच के लिए डॉक्टर मरीज के लक्षणों और मेडिकल हिस्ट्री के आधार पर जांच करवाते हैं। पेट का अल्ट्रासाउंड पित्त की पथरी का पता लगाने के लिए आमतौर पर इस्तेमाल की जाने वाली जांच है। इससे पथरी की मौजूदगी और गॉलब्लैडर की स्थिति के बारे में जानकारी मिल सकती है।
जरूरत पड़ने पर डॉक्टर ब्लड टेस्ट या अन्य इमेजिंग टेस्ट भी सलाह दे सकते हैं, खासकर तब जब पित्त की नली में रुकावट या संक्रमण की आशंका हो।
पित्त की पथरी से बचाव कैसे करें?
हर गॉलस्टोन को केवल खान-पान बदलकर रोका जा सके, ऐसा जरूरी नहीं है। फिर भी स्वस्थ जीवनशैली अपनाने से जोखिम कम करने में मदद मिल सकती है।
- तला-भुना और बहुत ज्यादा वसा वाला खाना सीमित करें।
- फल, सब्जियां और फाइबर से भरपूर खाद्य पदार्थों को आहार में शामिल करें।
- नियमित शारीरिक गतिविधि और व्यायाम करें।
- वजन को स्वस्थ सीमा में बनाए रखने की कोशिश करें।
- बहुत तेजी से वजन कम करने से बचें।
- लंबे समय तक बिना खाए न रहें।
- संतुलित और नियमित भोजन करने की आदत रखें।
कब तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें?
अगर पेट के ऊपरी दाएं हिस्से में तेज दर्द लंबे समय तक बना रहे या उसके साथ बुखार, लगातार उल्टी, पीलिया, गहरे रंग का पेशाब या बहुत हल्के रंग का मल दिखाई दे, तो जल्द डॉक्टर से संपर्क करें। ये पित्त की नली में रुकावट या अन्य जटिलता के संकेत हो सकते हैं।
डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है। इसे चिकित्सकीय सलाह, निदान या इलाज का विकल्प न मानें। गॉलस्टोन के लक्षण होने पर डॉक्टर से जांच और उचित सलाह लें।