शिक्षा और रोजगार
संत डॉ. गुरमीत राम रहीम के अवतार दिवस पर डेरा अनुयाइयों ने किया पौधारोपण
ब्लॉक घरौंडा में पौधारोपण अभियान चलाया गया
घरौंडा/करनाल (सच कहूँ न्यूज़)। संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां के पावन अवतार दिवस के उपलक्ष्य में ब्लॉक घरौंडा द्वारा पर्यावरण संरक्षण को समर्पित एक व्यापक पौधारोपण अभियान चलाया गया। इस अभियान की शुरूआत उपली गांव के स्टेडियम परिसर से की गई, जहां बड़ी संख्या में साध-संगत ने पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। इसके बाद ब्लॉक घरौंडा के विभिन्न गांवों में भी साध-संगत ने अपने-अपने क्षेत्रों में पौधारोपण कर अभियान को सफल बनाया। दूसरी और करनाल की साध संगत ने फुसगढ़ मे पौधा रोपण किया जिसकी शुरूआत पप्पू लाठर ने की।
अभियान के दौरान सैकड़ों की संख्या में उपस्थित साध-संगत ने हजारों पौधे रोपित किए। पौधारोपण के साथ-साथ सभी श्रद्धालुओं ने इन पौधों की नियमित देखभाल और संरक्षण का संकल्प भी लिया, ताकि लगाए गए पौधे भविष्य में वृक्ष बनकर पर्यावरण को शुद्ध और हरित बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकें। इस अवसर पर 85 मेंबर कपिल इंसां व ब्लाक के प्रेमी सेवक राजेंद्र इंसां ने कहा कि वर्तमान समय में पर्यावरण संरक्षण पूरी मानवता के लिए सबसे बड़ी आवश्यकता बन गया है। बढ़ते प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और घटते वन क्षेत्र को देखते हुए अधिक से अधिक पौधे लगाना और उनका संरक्षण करना समय की मांग है। उन्होंने कहा कि संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां हमेशा प्रकृति संरक्षण, स्वच्छता और मानव सेवा के कार्यों के लिए प्रेरित करते रहे हैं। उन्हीं की प्रेरणा से डेरा सच्चा सौदा की साध-संगत समाज और पर्यावरण के हित में निरंतर कार्य कर रही है।
साध-संगत ने बताया कि गुरुजी की प्रेरणा से देशभर में पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण, स्वच्छता अभियान, रक्तदान, नेत्रदान, देहदान, जरूरतमंदों की सहायता, नशा मुक्ति और सामाजिक जागरूकता जैसे अनेक कार्य निरंतर किए जा रहे हैं। डेरा सच्चा सौदा की साध-संगत गुरुजी की प्रेरणा से 176 मानवता भलाई के कार्यों में सक्रिय रूप से योगदान दे रही है, जिनका उद्देश्य समाज को बेहतर, स्वस्थ और सुरक्षित बनाना है। पौधारोपण अभियान के दौरान युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों ने भी बढ़-चढ़कर भाग लिया। उपली गांव के स्टेडियम में लगाए गए पौधों की सुरक्षा के लिए विशेष व्यवस्था करने का निर्णय भी लिया गया। इसके अलावा विभिन्न गांवों में लगाए गए पौधों की देखभाल के लिए स्थानीय स्तर पर जिम्मेदारियां भी तय की गईं।
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