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USA-Iran News: अमेरिका के ईरान पर नए हमले! होर्मुज स्ट्रेट को किया टारगेट: सेंटकॉम
अमेरिका की सैन्य कार्रवाई तेज होने से पश्चिम एशिया चिंतित
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव एक बार फिर गहरा गया है। अमेरिकी सेना ने ईरान की सैन्य क्षमताओं को निशाना बनाते हुए नए सैन्य अभियान शुरू किए हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) के अनुसार, इन अभियानों का उद्देश्य समुद्री व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और होर्मुज जलडमरूमध्य में संभावित खतरों को कम करना है। USA-Iran News
सेंटकॉम ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि अमेरिकी सैन्य बलों ने राष्ट्रपति के निर्देश पर ईरान से जुड़े रणनीतिक सैन्य ठिकानों और संसाधनों पर कार्रवाई की है। दावा किया गया कि इन अभियानों का लक्ष्य उन सैन्य व्यवस्थाओं को कमजोर करना है, जिनका उपयोग क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों के लिए खतरा पैदा करने में किया जा सकता है।
अरब सागर में बढ़ाई गई सैन्य गतिविधियां
अमेरिकी सेना ने बताया कि अरब सागर में नौसेना और वायुसेना की तैनाती लगातार बढ़ाई जा रही है। समुद्री मार्गों की निगरानी के साथ-साथ ऐसे अभियानों को भी अंजाम दिया जा रहा है, जिनका उद्देश्य ईरानी बंदरगाहों से जुड़े समुद्री आवागमन पर नजर रखना है। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि कई वाणिज्यिक जहाजों का मार्ग बदला गया है, जबकि कुछ समुद्री गतिविधियों को भी रोका गया है। USA-Iran News
दूसरी ओर, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने दावा किया है कि उसने जॉर्डन और कुवैत स्थित अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठानों को मिसाइल और ड्रोन हमलों से निशाना बनाया। ईरानी पक्ष के अनुसार, इन हमलों में कुछ सैन्य उपकरणों और ढांचों को नुकसान पहुंचा है। आईआरजीसी का कहना है कि यह कार्रवाई ईरान पर लगातार हो रहे अमेरिकी हमलों के जवाब में की गई। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
लगातार जारी हैं सैन्य अभियान
अमेरिकी सेंटकॉम ने यह भी बताया कि हाल के दिनों में ईरान के सैन्य कमांड सेंटर, वायु रक्षा प्रणाली, तटीय निगरानी केंद्र, मिसाइल एवं ड्रोन लॉन्चिंग ठिकानों तथा संचार नेटवर्क को निशाना बनाया गया है। अमेरिकी सेना का कहना है कि इन अभियानों का उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा को मजबूत करना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच लगातार बढ़ रही सैन्य गतिविधियां पूरे पश्चिम एशिया की सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए चिंता का विषय बन सकती हैं। यदि दोनों देशों के बीच टकराव और बढ़ता है, तो इसका असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार, कच्चे तेल की कीमतों और समुद्री परिवहन पर भी पड़ सकता है। USA-Iran News