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भाजपा की 2027 फतह की तैयारी! भाजपा करेगी बूथों की 'माइक्रो मैनेजमेंट मैपिंग'
- सम्मेलन में तीन अहम सूची लेकर आएंगे बूथ अध्यक्ष, हर बूथ का बनेगा पॉलिटिकल प्रोफाइल
लखनऊ, (हि.स.) । उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव-2027 अभी दूर है, लेकिन भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने उसकी सबसे अहम चुनावी तैयारी बूथ स्तर से शुरू कर दी है। 22 जुलाई को प्रदेश भर में होने वाला बूथ अध्यक्ष सम्मेलन केवल संगठनात्मक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भाजपा के बूथ नेटवर्क की 'सर्जिकल मैपिंग' का बड़ा अभियान साबित होगा। पार्टी पहली बार हर बूथ पर वर्तमान पदाधिकारियों, पूर्व दायित्वधारियों और संभावित बूथ पालकों का विस्तृत डाटा जुटाकर संगठन की वास्तविक ताकत का आकलन करेगी।
भाजपा का मकसद सिर्फ यह जानना नहीं है कि बूथ पर कौन सक्रिय है, बल्कि यह भी पता लगाना है कि वर्षों तक संगठन में काम करने वाले कौन-कौन से अनुभवी कार्यकर्ता अब निष्क्रिय हैं और उन्हें दोबारा चुनावी अभियान में कैसे जोड़ा जा सकता है। यानी हर बूथ का 'ह्यूमन रिसोर्स ऑडिट' तैयार होगा, जिसके आधार पर चुनावी जिम्मेदारियां तय की जाएंगी।
भाजपा के प्रदेश महामंत्री (संगठन) धर्मपाल सिंह ने बताया कि प्रत्येक बूथ अध्यक्ष सम्मेलन में तीन महत्वपूर्ण सूचियां अपने बूथ से जुड़े वर्तमान पदाधिकारी, पूर्व संगठनात्मक दायित्व निभा चुके कार्यकर्ता और एक प्रस्तावित बूथ पालक का नाम लेकर पहुंचेंगे। इन सूचनाओं के आधार पर पार्टी बूथवार संगठन का नया डाटा तैयार करेगी और चुनावी जिम्मेदारियों का पुनर्गठन करेगी। सम्मेलन समाप्त होने के बाद ये सभी सूचियां जिला संगठन के पास पहुंचेंगी, जहां बूथवार विश्लेषण कर नई जिम्मेदारियों का खाका तैयार किया जाएगा।
प्रदेश महामंत्री एवं बूथ सम्मेलन के प्रदेश संयोजक दिलीप पटेल ने हिन्दुस्थान समाचार से बातचीत में बताया कि सम्मेलन के बाद सभी सूचियां जिलाध्यक्षों को सौंपी जाएंगी। जिला संगठन इन आंकड़ों का विश्लेषण कर यह तय करेगा कि किस बूथ पर किस कार्यकर्ता की भूमिका सबसे प्रभावी हो सकती है।
2027 की रणनीति का डेटा बैंक बनेगा बूथ भाजपा इस पूरी कवायद के जरिए हर बूथ का एक ऐसा 'डेटा बैंक' तैयार करना चाहती है, जिसमें संगठन की ताकत, कमजोरियां, उपलब्ध अनुभवी चेहरे और सक्रिय कार्यकर्ताओं की पूरी तस्वीर मौजूद हो। यही डाटा आगे चलकर बूथवार चुनावी रणनीति, जिम्मेदारियों के बंटवारे और माइक्रो मैनेजमेंट का आधार बनेगा। पार्टी का मानना है कि विधानसभा चुनाव बूथ पर ही जीते और हारे जाते हैं।
ऐसे में निष्क्रिय कार्यकर्ताओं की वापसी, बूथ पालकों की नियुक्ति और संगठन की वास्तविक ताकत की मैपिंग भाजपा के लिए 2027 के चुनाव में निर्णायक हथियार साबित हो सकती है। अनुभवी कार्यकर्ताओं पर दांव, पुराने पदाधिकारियों की होगी घर वापसी
भाजपा की इस पूरी कवायद का सबसे अहम पहलू उन अनुभवी कार्यकर्ताओं को फिर से चुनावी अभियान से जोड़ना है, जो वर्षों तक संगठन में जिम्मेदारियां निभाने के बाद फिलहाल किसी पद पर नहीं हैं।
बूथ अध्यक्षों से ऐसे सभी पूर्व पदाधिकारियों की अलग सूची मांगी गई है, ताकि उनकी सक्रियता, अनुभव और क्षेत्रीय प्रभाव का आकलन किया जा सके। पार्टी का मानना है कि संगठन का पुराना अनुभव और नए कार्यकर्ताओं का उत्साह मिलकर बूथ स्तर पर अधिक प्रभावी चुनावी नेटवर्क तैयार करेगा। ऐसे कार्यकर्ताओं को बूथ प्रबंधन, मतदाता संपर्क, लाभार्थी संवाद और चुनावी समन्वय जैसी जिम्मेदारियां सौंपी जाएगी।
अनुभव, संगठन और डेटा के फार्मूले पर 2027 की रणनीति तैयार कर रही भाजपा राजनीतिक जानकार डा. आशीष वशिष्ट के मुताबिक, भाजपा केवल नए चेहरों पर भरोसा नहीं कर रही, बल्कि अनुभव, संगठन, डेटा के फार्मूले पर 2027 की रणनीति तैयार कर रही है।
प्रभावशाली पुराने कार्यकर्ताओं की वापसी से न केवल संगठन की पकड़ मजबूत होगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय और चुनावी माइक्रो मैनेजमेंट को भी नई धार मिलेगी। यही वजह है कि बूथ अध्यक्ष सम्मेलन में पूर्व दायित्वधारियों की सूची को भाजपा की चुनावी रणनीति का सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जा रहा है।