संसद चलो' मार्च पर सियासी संग्राम तेज, छात्र प्रदर्शन को लेकर भाजपा-कांग्रेस आमने-सामने

छात्रों के 'संसद चलो' मार्च पर पुलिस कार्रवाई के बाद दोनों दलों में आरोप-प्रत्यारोप, लोकतांत्रिक अधिकार और सुरक्षा व्यवस्था पर छिड़ी बहस।

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 Student Protest: बेंगलुरु/नई दिल्ली (एजेंसी) | राजधानी नई दिल्ली में आयोजित 'संसद चलो' छात्र मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। इस घटनाक्रम के बाद भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस ने एक-दूसरे पर तीखे आरोप लगाए हैं। जहां भाजपा ने आंदोलन को देश की स्थिरता को प्रभावित करने की सुनियोजित कोशिश बताया, वहीं कांग्रेस ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों के दमन का उदाहरण करार दिया।

जंतर-मंतर से संसद की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों पर पुलिस द्वारा बल प्रयोग किए जाने की खबरों के बाद दोनों प्रमुख दलों के नेताओं ने अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दीं। कांग्रेस का आरोप है कि छात्रों की मांगों पर विचार करने के बजाय सरकार ने कठोर प्रशासनिक कदम उठाए, जबकि भाजपा का कहना है कि संसद की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है।

कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष बी.के. हरिप्रसाद ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों और जवाबदेही की मांग को लेकर शांतिपूर्ण ढंग से विरोध कर रहे छात्रों के साथ कठोर व्यवहार उचित नहीं है। उनके अनुसार, लोकतंत्र में अपनी बात रखना प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है और ऐसे आंदोलनों को बलपूर्वक रोकना उचित नहीं माना जा सकता।

हरिप्रसाद ने यह भी कहा कि छात्रों के भविष्य से जुड़े प्रश्नों का समाधान संवाद के माध्यम से होना चाहिए। उन्होंने प्रदर्शन के दौरान घायल हुए विद्यार्थियों को तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने, हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा करने तथा संबंधित मामलों में जवाबदेही तय करने की मांग की।

दूसरी ओर, कर्नाटक भाजपा अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र ने पुलिस और केंद्र सरकार की कार्रवाई का समर्थन किया। उनका कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण प्रदर्शन का सम्मान किया जाता है, लेकिन संसद परिसर की सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था और कानून का पालन सुनिश्चित करना भी आवश्यक है। उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन की आड़ में कुछ समूह माहौल बिगाड़ने और राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास कर रहे थे।

भाजपा का दावा है कि प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधियों के साथ पहले ही बातचीत की गई थी, लेकिन यदि किसी प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका उत्पन्न होती है तो प्रशासन को आवश्यक कदम उठाने पड़ते हैं। पार्टी नेताओं ने कहा कि हिंसा या अव्यवस्था फैलाने के किसी भी प्रयास के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। इस पूरे घटनाक्रम के बाद छात्र आंदोलन और पुलिस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो गई है। दोनों दल अपने-अपने पक्ष को सही ठहराते हुए एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं, जबकि मामले को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा जारी है।

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