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India-UK Free Trade Agreement लागू, भारतीय किसानों के लिए खुला ब्रिटेन का बाजार; इन फसलों और खाद्य उत्पादों पर नहीं लगेगी कोई इंपोर्ट ड्यूटी
India-UK Free Trade Agreement लागू, भारतीय किसानों के लिए खुला ब्रिटेन का बाजार; इन फसलों और खाद्य उत्पादों पर नहीं लगेगी कोई इंपोर्ट ड्यूटी
भारत और ब्रिटेन के बीच हुआ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) 15 जुलाई से आधिकारिक तौर पर लागू हो गया है। यह समझौता दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। इस डील के लागू होने के बाद भारत से ब्रिटेन भेजे जाने वाले 95 प्रतिशत से अधिक कृषि और प्रोसेस्ड फूड उत्पादों पर लगने वाली इंपोर्ट ड्यूटी समाप्त कर दी गई है।
वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, इस फैसले का सबसे बड़ा लाभ भारतीय किसानों, मछुआरों, कृषि निर्यातकों और एग्री-एमएसएमई (Agri-MSMEs) को मिलेगा। अब भारतीय उत्पाद पहले की तुलना में कम कीमत पर ब्रिटेन के बाजार में पहुंच सकेंगे, जिससे उनकी मांग बढ़ने और किसानों की आय में इजाफा होने की उम्मीद है।
पहले टैक्स के कारण महंगे पड़ते थे भारतीय उत्पाद
अब तक ब्रिटेन में भारतीय कृषि उत्पादों पर इंपोर्ट ड्यूटी लगने के कारण उनकी कीमत बढ़ जाती थी। इससे भारतीय उत्पादों को स्थानीय और अन्य देशों के सामान से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता था। लेकिन अब ड्यूटी हटने के बाद भारतीय कृषि उत्पाद ब्रिटेन में अधिक प्रतिस्पर्धी कीमतों पर उपलब्ध होंगे।
इन कृषि उत्पादों को मिलेगा जीरो-ड्यूटी का लाभ
इस समझौते के तहत भारत से ब्रिटेन निर्यात होने वाले कई कृषि और खाद्य उत्पादों को टैक्स-फ्री श्रेणी में रखा गया है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—
- ताजे अंगूर
- प्याज
- प्राकृतिक शहद
- ताजी सब्जियां
- विभिन्न प्रकार के नट्स
- काली मिर्च
- इलायची
- भारतीय स्पेशलिटी कॉफी
इसके अलावा प्रोसेस्ड फूड सेक्टर को भी बड़ा फायदा मिलेगा। अब ब्रेड, केक, पेस्ट्री, बेकरी उत्पाद, सॉस और भारतीय मसालों के निर्यात पर भी कोई इंपोर्ट ड्यूटी नहीं लगेगी।
किसानों और निर्यातकों की बढ़ेगी कमाई
इंपोर्ट ड्यूटी खत्म होने का सीधा लाभ किसानों और कृषि निर्यातकों को मिलेगा। पहले जो राशि टैक्स के रूप में खर्च होती थी, वह अब उनकी आय का हिस्सा बन सकेगी। इससे निर्यात कारोबार अधिक लाभदायक होगा और भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता भी बढ़ेगी।
48 घंटे में होगा कस्टम क्लीयरेंस
समझौते में जल्दी खराब होने वाले कृषि उत्पादों के लिए विशेष व्यवस्था भी की गई है। इसके तहत फल, सब्जियां और अन्य पेरिशेबल वस्तुओं का 48 घंटे के भीतर कस्टम क्लीयरेंस किया जाएगा। इससे उत्पादों के खराब होने की संभावना कम होगी, लॉजिस्टिक्स लागत घटेगी और किसानों को बेहतर कीमत मिल सकेगी।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा
विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रिटेन के बाजार में भारतीय कृषि और खाद्य उत्पादों की मांग बढ़ने से ग्रामीण क्षेत्रों में उत्पादन और निर्यात को नई गति मिलेगी। इससे किसानों की आय बढ़ने के साथ-साथ कृषि आधारित उद्योगों और एग्री-एमएसएमई क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
भारत-ब्रिटेन फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को भारतीय कृषि क्षेत्र के लिए एक बड़ा अवसर माना जा रहा है। यदि निर्यातक गुणवत्ता और अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन करते हैं, तो आने वाले वर्षों में भारतीय कृषि उत्पाद ब्रिटेन के बाजार में अपनी मजबूत पहचान बना सकते हैं।