शिक्षा और रोजगार
एक कमरे से शुरू हुई फैक्ट्री, आज 15 राज्यों और नेपाल तक 'बिग स्टोन' की धमक
आर्थिक तंगी में पढ़ाई के साथ बेचे स्पेयर पार्ट्स, अब 20 परिवारों को दिया रोजगार
हांसी, सच कहूँ/मुकेश। कहते हैं कि हालात चाहे कितने भी कठिन क्यों न हों, अगर इरादे मजबूत हों तो मंजिल खुद रास्ता बना लेती है। हांसी के रहने वाले नवीन ठाकुर ने इस कहावत को अपने जीवन में सच साबित किया है। धागा मिल में नौकरी करने वाले पिता के घर जन्मे नवीन ने आर्थिक तंगी के दौर में पढ़ाई के साथ कमाई शुरू की और आज उनका बनाया 'बिग स्टोन' ब्रांड देश के 15 से अधिक राज्यों के साथ-साथ नेपाल तक अपनी पहचान बना चुका है। एक कमरे से शुरू हुआ उनका छोटा-सा उद्योग आज दर्जनों परिवारों की रोजी-रोटी का आधार बन गया है।
15 जुलाई 1978 को जन्मे नवीन ठाकुर ने ग्रेजुएशन तक शिक्षा प्राप्त की। उनके पिता धागा मिल में नौकरी करते थे, लेकिन मिल बंद होने के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति डगमगा गई। घर की जिम्मेदारियां सबसे बड़े बेटे नवीन के कंधों पर आ गईं। ऐसे समय में उन्होंने हालात के सामने हार मानने के बजाय संघर्ष को अपना साथी बनाया।
पढ़ाई भी, कारोबार भी
नवीन बताते हैं कि कॉलेज की पढ़ाई के साथ ही उन्होंने व्यापार की शुरूआत कर दी थी। वह दिल्ली से स्पेयर पार्ट्स खरीदकर लाते और हरियाणा सहित आसपास के राज्यों में दुकानदारों से आॅर्डर लेकर माल की सप्लाई करते थे। बसों और ट्रेनों में सफर कर छोटे-छोटे आॅर्डर पूरे करने वाला यह युवा धीरे-धीरे व्यापार की बारीकियां सीखता गया।
एक कमरे से खड़ा किया ब्रांड
साल 1997 में व्यापार शुरू करने के बाद 2004 में उन्होंने रबर उद्योग में कदम रखा। एक कमरे में मशीन लगाकर पंचर रिपेयर पैच बनाने का काम शुरू किया। गुणवत्ता और भरोसे के दम पर उनका 'बिग स्टोन' ब्रांड बाजार में तेजी से पहचान बनाने लगा। आज यह ब्रांड ग्रामीण बाजार में विश्वसनीय नामों में शुमार है।
नेपाल तक पहुंचा हांसी का नाम
आज बिग स्टोन के उत्पाद भारत के 15-16 राज्यों में सप्लाई किए जाते हैं। इतना ही नहीं, नेपाल में भी कंपनी का माल नियमित रूप से भेजा जाता है। सीमित संसाधनों से शुरू हुआ कारोबार अब राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा चुका है। दो बहनों के बीच सबसे बड़े नवीन ठाकुर आज उद्योग जगत के साथ-साथ सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। सामाजिक सरोकारों से जुड़े रहने के कारण क्षेत्र में उनकी अलग पहचान है।
संघर्ष से मिली सीख
नवीन ठाकुर कहते हैं कि "सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। ईमानदारी, गुणवत्ता और लगातार मेहनत ही किसी भी व्यवसाय की सबसे बड़ी पूंजी होती है। अगर लक्ष्य स्पष्ट हो तो छोटे से कमरे से शुरू हुआ काम भी एक दिन देश की सीमाओं से बाहर तक पहुंच सकता है।" यह कहानी केवल एक सफल कारोबारी की नहीं, बल्कि उस युवा की है जिसने विपरीत परिस्थितियों को अपनी ताकत बनाया और हांसी का नाम देश-विदेश तक पहुंचा दिया।
असली सफलता लोगों को रोजगार देना: ठाकुर
नवीन ठाकुर का उद्योग आज करीब 20 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार दे रहा है। उनका मानना है कि किसी भी व्यवसाय की असली सफलता केवल मुनाफे में नहीं, बल्कि लोगों को रोजगार देने और उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने में है।