शिक्षा और रोजगार
माल्या के प्रत्यर्पण केस की सुनवाई आज
माल्या ने कहा, मैं सभी आरोपों से इनकार करता हूं
नई दिल्ली: लंदन भागे शराब कारोबारी विजय माल्या को भारत लाने की कोशिशें जारी हैं। गुरुवार को लंदन कोर्ट में माल्या के एक्स्ट्राडीशन (प्रत्यर्पण) केस की सुनवाई होगी। इस दौरान भारत सरकार जरूरी डॉक्युमेंट्स कोर्ट को सौंपेगी।
माल्या 14 जून को वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट कोर्ट पहुंचे थे। बता दें कि माल्या 2016 से लंदन में है। भारत ने ब्रिटेन सरकार से उसके प्रत्यर्पण की अपील की थी। इस पर लंदन एडमिनिस्ट्रेशन ने माल्या को रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर 18 अप्रैल को अरेस्ट किया था, हालांकि उन्हें 3 घंटे में जमानत मिल गई थी।
माल्या ने कहा था मैं सभी आरोपों से इनकार करता हूं। मैं किसी भी अदालत से भाग नहीं रहा। अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए मेरे पास काफी सबूत हैं।” यह पूछने पर कि उन पर जो अरबों का कर्ज है, उसका क्या होगा, माल्या ने मीडिया पर भड़कते हुए कहा- आप अरबों के सपने देखते रहिए।
इससे पहले माल्या के मामले में अप्रैल में सुनवाई हुई थी। तब स्कॉटलैंड यार्ड ने माल्या को कोर्ट में पेश किया था। गिरफ्तारी के तीन घंटे बाद ही माल्या को 4.5 करोड़ रुपए के बॉन्ड और पासपोर्ट जमा करने की शर्त पर जमानत मिल गई थी।
31 जनवरी 2014 तक किंगफिशर एयरलाइन्स पर बैंकों का 6,963 करोड़ रुपए बकाया था। इस कर्ज पर इंटरेस्ट के बाद माल्या की टोटल लायबिलिटी 9,432 करोड़ रुपए हो चुकी है।
ब्रिटिश कोर्ट में साबित करना होगा अपराध
- सीबीआई को ब्रिटिश कोर्ट में साबित करना होगा कि माल्या पर लगे आरोप ब्रिटेन के कानून के तहत भी अपराध हैं।
- अगर आरोप साबित होते हैं तो ब्रिटिश कोर्ट एक्स्ट्राडीशन का ऑर्डर दे सकता है।
- अगर जांच एजेंसियां आरोप साबित नहीं कर सकीं तो एक्स्ट्राडीशन की उम्मीदों को झटका लग सकता है।
- एक्स्ट्राडीशन सुनवाई के बाद आखिरी फैसला फॉरेन मिनिस्ट्री को करना होता है।
- माल्या के पास मजिस्ट्रेट कोर्ट के फैसले को हायर कोर्ट में चुनौती देने का हक होगा।
- लंदन कोर्ट यह भी तय करेगी कि क्या माल्या का एक्स्ट्राडीशन उनके ह्यूमन राइट्स का वॉयलेशन तो नहीं करता।
- ऐेसे में, माल्या को भारत लाने में भारतीय एजेंसी को कम से कम 10 से 12 महीने का समय लग सकता है।
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