‘प्रेम बहुत बड़ी नियामत’

Shah-Satnam-Singh-Ji-Mahara

पूजनीय परम पिता जी ने फरमाया, ‘‘साईं जी, आपका प्रेम ही हमें यहां खींचकर ले आया है।’’

  • सन् 1956, बागड़ क्षेत्र

पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज गांव गंगवा, जिला हिसार में पधारे हुए थे। साध-संगत ने पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्तना जी महाराज के ठहरने के लिए एक कच्चे कमरे का प्रबंध किया। वहां श्री जलालआणा साहिब से परम पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज तथा भक्त मक्खन सिंह जी पूजनीय बेपरवाह जी के दर्शनों के लिए पहुुंचे। पूजनीय शाह मस्ताना जी महाराज ने जब पूजनीय परम पिता जी को देखा तो बहुत ही खुश हुए और पूछा कि आप कैसे आये? पूजनीय परम पिता जी ने फरमाया, ‘‘साईं जी, आपका प्रेम ही हमें यहां खींचकर ले आया है।’’ इस पर बेपरवाह जी ने फरमाया, ‘‘प्रेम एक बहुत बड़ी नियामत है। फकीर पे्रेम के वश में होता है, प्रेम एक ऐसा जज्बा है, जिसका नमूना लिखने में नहीं आ सकता।’’

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पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज कितनी ही देर तक पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज से वचन विलास करते रहे। अगले दिन वहां पर सत्संग था। शहनशाह जी ने सतगुरू प्रेम के विषय पर सत्संग फरमाया। सत्संग में एक भाई ने एक कविता सुनाई। बेपरवाह जी बहुत खुश हुए और वचन फरमाया, ‘‘जहां न पहुंचे रवि, वहां पहुंचे कवि।’’ इस सत्संग पर शहनशाह जी ने अनेक जीवों को नाम देकर भवसागर से पार किया।

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