पैरोल से फरार कैदी 30 साल बाद गिरफ्तार

arrested sachkahoon
  • हत्या व डकैती के अपराध में मिली थी उम्र कैद की सजा
  • पहचान, नाम बदलकर गाजियाबाद में रह रहा था दोषी
  • बीबी, बच्चे भी उनके अपराधों से अब तक अनजान थे

सच कहूँ/संजय कुमार मेहरा
गुरुग्राम। हत्या और डकैती के अपराध में उम्र कैद की सजा के बाद पैरोल पर गया एक अपराधी ऐसा फरार हुआ कि वह पुलिस की पकड़ से बाहर ही रहा। अब 30 साल बाद वह पुलिस के हत्थे चढ़ा है। जानकारी के अनुसार पुत्तीलाल व उसके अन्य साथियों के खिलाफ 14 मार्च 1985 को हत्या, डकैती और शस्त्र अधिनियम के तहत थाना पटौदी, गुरुग्राम में दर्ज केस में गिरफ्तार कर जेल भेजे गये थे। इस मामले में आरोपियों को अदालत द्वारा 23 मार्च 1989 को उम्र कैद की सजा सुनाई गई थी। जेल नियमों के अनुसार पुत्तीलाल को वर्ष 1992 में पैरोल दी गई। यह पैरोल उसके लिए जेल से आजादी मिलने जैसी हो गई। क्योंकि वह पैरोल पर जेल से बाहर जाने के बाद वापस लौटा ही नहीं। उसे भगोड़ा भी घोषित कर दिया गया, लेकिन दोषी पुत्तीलाल 30 साल तक पुलिस की पकड़ में नहीं आया। अब अपराध शाखा प्रभारी फरूखनगर के उप-निरीक्षक अमित कुमार की टीम ने पुत्तीलाल उर्फ विक्रमजीत को गुप्ता सूचना के आधार पर यूपी के गाजियाबाद स्थित जनकपुरी से गिरफ्तार किया है।

शादी करके तीन बच्चे हुए, लड़के की शादी भी कर ली

पुत्तीलाल ने पटौदी के पास गांव सांपका में कई घरों में डकैती डाली थी। डकैती के दौरान ही एक व्यक्ति की हत्या भी कर दी थी। इस मामले में दोषी को उम्र कैद की सजा हो गई थी। इसके बाद उसने पहचान छुपाने के उद्देश्य से अपना नाम पुत्तीलाल से बदलकर विक्रमजीत रख लिया तथा गाजियाबाद में रहने लगा। उसके बाद ना ही तो यह अपने गांव गया और ना ही किसी रिश्तेदारी में गया। इसने शादी भी कर ली तथा इसके 3 बच्चे भी है। दोषी ने यह भी बताया कि वह अपने पिता की मौत होने पर भी अपने पैतृक घर नहीं गया था। उसने अपने लड़के की शादी में भी किसी भी रिश्तेदार को नहीं बुलाया था। खास बात यह है कि उसके द्वारा किए गए अपराधों के बारे उसके बीवी व बच्चे भी अनजान हैं।

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