Shayari

अकबर इलाहाबादी शायरी

बस जान गया मैं तिरी पहचान यही है तू दिल में तो आता है समझ में नहीं आता ख़ुदा से माँग जो कुछ माँगना है ऐ ‘अकबर’ यही वो दर है कि ज़िल्लत नहीं सवाल के बाद जब मैं कहता हूँ कि या अल्लाह मेरा हाल देख हुक्म होता है कि अपना नामा-ए-आमाल देख अकबर […]
साहित्य