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Police Smriti Diwas: पीएपी मुख्यालय में मनाया पुलिस स्मृति दिवस, डीजीपी ने शहीदों को दी श्रद्धांजलि
1,804 पुलिसकर्मियों का बलिदान हमेशा प्रेरणा देता रहेगा: डीजीपी गौरव यादव
चंडीगढ़/जालंधर, सच कहूँ/अश्वनी चावला/राजन मान। Jalandhar News: देश की एकता और अखंडता की रक्षा के लिए आतंकवादियों और अपराधियों से लड़ते हुए अपने प्राणों का बलिदान देने वाले बहादुर पुलिसकर्मियों को सम्मान देने के लिए मंगलवार को पंजाब आर्म्ड पुलिस (पीएपी) मुख्यालय, जालंधर में 67वां राज्य स्तरीय पुलिस स्मृति दिवस पूरी श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाया गया। पंजाब के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) गौरव यादव ने श्रद्धांजलि समारोह का नेतृत्व किया और पुलिस शहीद स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की। इस अवसर पर विशेष डीजीपी कानून एवं व्यवस्था प्रवीण कुमार सिन्हा और एडीजीपी पीएपी एम.एफ. फारूकी भी मौजूद रहे।
युद्ध, शांति और संघर्ष के दौरान असाधारण बहादुरी के साथ देश की सेवा करने वाली पंजाब पुलिस को एक अद्वितीय और महान बल बताते हुए डीजीपी ने कहा कि सितंबर 1981 से अब तक पंजाब पुलिस के 1,804 बहादुर जवान ड्यूटी के दौरान अपने प्राणों की आहुति दे चुके हैं। इनमें इस वर्ष शहीद हुए दो बहादुर जवान भी शामिल हैं। डीजीपी गौरव यादव ने कहा कि इन बहादुर शहीदों के बलिदान के कारण ही आज हम शांतिपूर्ण वातावरण में सांस ले रहे हैं। पंजाब पुलिस के पास बहादुरी, निस्वार्थ सेवा और आतंकवाद को जड़ से खत्म करने के दृढ़ संकल्प की गौरवशाली विरासत है। यह बल हमारी सीमाओं की रक्षा करने और इस सीमावर्ती राज्य में सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
पुलिस स्मृति दिवस का इतिहास
पुलिस स्मृति दिवस मनाने की परंपरा 21 अक्तूर 1959 से शुरू हुई थी। उस दिन लद्दाख के हॉट स्प्रिंग्स क्षेत्र में सब-इंस्पेक्टर करम सिंह के नेतृत्व में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की एक गश्ती टुकड़ी पर चीनी सैनिकों ने घात लगाकर हमला किया था। इस हमले में 10 बहादुर जवान शहीद हो गए थे। लगभग 16,000 फीट की ऊंचाई और अत्यंत ठंडे मौसम में इन जवानों ने अद्वितीय साहस और बलिदान का परिचय दिया था। तब से हर वर्ष 21 अक्तूबर को देशभर की सभी पुलिस इकाइयों में ड्यूटी के दौरान अपने प्राणों का बलिदान देने वाले पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि देने के लिए पुलिस स्मृति दिवस मनाया जाता है।
60 दिवसीय मिशन मोड में ‘युद्ध नशे विरुद्ध’ अभियान
‘युद्ध नशे विरुद्ध’ अभियान के तहत नई रणनीतियों की जानकारी देते हुए डीजीपी ने बताया कि यह अभियान अब 60 दिनों के गहन मिशन मोड में बदल चुका है। इसके तहत नशे से प्रभावित चिह्नित क्षेत्रों पर वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और सिविल प्रशासन के राजपत्रित अधिकारियों द्वारा संयुक्त रूप से 24 घंटे निगरानी रखी जा रही है। उन्होंने बताया कि इस बहुआयामी रणनीति का मुख्य उद्देश्य सामुदायिक भागीदारी बढ़ाना और खेल मैदानों के माध्यम से युवाओं को सकारात्मक गतिविधियों से जोड़कर संवेदनशील क्षेत्रों को सुरक्षित बनाना है। परेड के बाद डीजीपी गौरव यादव ने पुलिस शहीदों के परिवारों से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात की। उन्होंने उनकी समस्याओं को ध्यानपूर्वक सुना और भरोसा दिलाया कि पंजाब सरकार तथा पंजाब पुलिस विभाग उनके कल्याण के लिए हमेशा मजबूत सहारा बने रहेंगे।