Dhanbad Land subsidence: हर रोज फट रही धरती, जमीन के नीचे धधकती आग का खौफ

धंस रहा कोयलांचल, 8 महीने में 45 से ज्यादा घटनाएं, सुरक्षा पर उठे सवाल

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Dhanbad Land subsidence: धनबाद (सच कहूँ/एजेंसी)। झारखंड का धनबाद कोयलांचल इन दिनों जमीन के नीचे छिपे खतरे से जूझ रहा है। कहीं अचानक जमीन धंस रही है, कहीं गहरे गोफ बन रहे हैं तो कहीं दरारों से धुआं और गैस बाहर निकल रही है। लंबे समय से जारी भूमिगत कोयला आग और दशकों के खनन का असर अब आबादी वाले इलाकों की सुरक्षा पर भी दिखाई देने लगा है। इस वर्ष जनवरी से अब तक कोयलांचल में भू-धंसान और गोफ बनने की 45 से अधिक घटनाएं सामने आने की जानकारी है। बारिश के मौसम में अगस्त और सितंबर के दौरान ऐसी घटनाओं की संख्या बढ़ने से चिंता और गहरी हुई है।

कुछ दिनों में कई इलाकों में सामने आई घटनाएं

हाल के दिनों में लिलोरी पथरा में जमीन धंसने से एक मकान का हिस्सा गोफ में चला गया। इसके बाद गोधर छह नंबर में बने गहरे गोफ की भराई का काम शुरू किया गया। कतरास के कैलूडीह क्षेत्र में भी गोफ और गैस रिसाव की घटनाएं सामने आईं। बरारी छह नंबर में जमीन के भीतर जोरदार आवाज के बाद सतह पर दरारें पड़ गईं। इन दरारों से आग की लपटें और धुआं निकलने की सूचना से आसपास रहने वाले लोगों में भय का माहौल बन गया। कुर्मी डीह में दो बड़े गोफ बनने और गैस रिसाव की जानकारी ने भी स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ाई।

धनबाद के कोयलांचल में भूमिगत कोयला आग की समस्या नई नहीं है। कई स्थानों पर लंबे समय से धरती के भीतर कोयला जल रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, पुराने खनन क्षेत्रों में बने खाली हिस्से, भूमिगत आग और कमजोर भू-परतें जमीन की स्थिरता को प्रभावित करती हैं। मानसून के दौरान बारिश का पानी जमीन के भीतर कमजोर हिस्सों तक पहुंचने पर सतह की मजबूती प्रभावित हो सकती है। वहीं, खनन क्षेत्रों में होने वाली ब्लास्टिंग से उत्पन्न कंपन भी संवेदनशील स्थानों पर जोखिम बढ़ाने वाला कारक हो सकता है।

छाताबाद की घटना ने बढ़ाई चिंता

इस वर्ष कतरास के छाताबाद में हुई भू-धंसान की घटना को गंभीर घटनाओं में गिना जा रहा है। यहां 20 से अधिक मकानों के प्रभावित होने और लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई थी। कई घरों में गहरी दरारें पड़ने के बाद स्थानीय लोगों ने खनन गतिविधियों और ब्लास्टिंग को लेकर सवाल उठाए।

घटना के बाद प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्र में वैज्ञानिक अध्ययन और सुरक्षा मूल्यांकन पूरा होने तक ब्लास्टिंग तथा खनन गतिविधियों पर रोक लगाने का निर्देश दिया। इसके बाद संबंधित खान सुरक्षा प्राधिकरण की ओर से न्यू आकाशकिनारी कोलियरी में नियंत्रित डीप-होल ब्लास्टिंग की अनुमति वापस लिए जाने की जानकारी भी सामने आई।

बढ़ते खतरे के बीच प्रधानमंत्री के सलाहकार तरुण कपूर ने 31 अगस्त और 1 सितंबर को धनबाद कोयलांचल का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने बीसीसीएल की खनन गतिविधियों, झरिया की भूमिगत आग और पुनर्वास योजनाओं की समीक्षा की। उन्होंने प्रभावित तथा पुनर्वासित परिवारों से बातचीत कर उनकी समस्याओं की जानकारी ली। साथ ही प्रभावित लोगों को सुरक्षित और सम्मानजनक तरीके से पुनर्वासित करने को प्राथमिकता देने पर जोर दिया।

पुनर्वास की रफ्तार बनी अहम मुद्दा

झरिया, कतरास, लोदना, केंदुआडीह और बाघमारा सहित कई क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए भू-धंसान का खतरा लगातार चिंता का कारण बना हुआ है। जिन घरों में पहले ही दरारें आ चुकी हैं, वहां रहने वाले परिवारों के लिए बारिश और जमीन के भीतर होने वाली हलचल किसी चेतावनी से कम नहीं है।

बीसीसीएल के तकनीकी एवं संचालन निदेशक संजय कुमार सिंह के अनुसार, भू-धंसान और गैस रिसाव से प्रभावित क्षेत्रों में परिवारों को सुरक्षित आवास उपलब्ध कराना प्राथमिकता है। संशोधित झरिया मास्टर प्लान के तहत पुनर्वास और आजीविका की व्यवस्था को आगे बढ़ाने के लिए जेआरडीए के साथ काम किया जा रहा है। बेलगड़िया और कर्माटांड़ टाउनशिप में विस्थापित परिवारों के पुनर्वास की प्रक्रिया भी इसी योजना का हिस्सा है।

धनबाद के कोयलांचल की समस्या केवल अचानक होने वाले भू-धंसान तक सीमित नहीं है । यह लंबे समय से चले आ रहे भूमिगत खनन, पुरानी खदानों, भूमिगत आग और जमीन के भीतर बने खाली हिस्सों से जुड़ी जटिल चुनौती है।सरकार, प्रशासन और कोयला कंपनियों की ओर से सुरक्षा तथा पुनर्वास के लिए कदम उठाए जा रहे हैं, लेकिन लगातार सामने आ रही घटनाओं ने व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े किए हैं। अब स्थानीय लोगों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगली बार जमीन कहां धंसेगी और उसकी चपेट में कौन आएगा। कोयलांचल के लिए चुनौती सिर्फ भूमिगत आग को नियंत्रित करना नहीं, बल्कि वहां रह रहे परिवारों को समय रहते सुरक्षित स्थान तक पहुंचाना भी है।

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