JSSC CGL Exam Scam: जेपीएससी-जेएसएससी भर्ती परीक्षा घोटाले में बड़ा खुलासा, मिथिलेश सिंह को मुख्य सूत्रधार मानकर जांच तेज
कथित धांधली, डिजिटल हेरफेर और अभ्यर्थियों से लाखों रुपये लेने के आरोपों की पड़ताल जारी
रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) से जुड़ी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, मामले में नए तथ्य सामने आ रहे हैं। सीआईडी की विशेष जांच टीम ने परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसियों और उनके नेटवर्क की पड़ताल तेज कर दी है। जांच में वेबेल और आईसीएन से जुड़े निदेशक मिथिलेश सिंह की भूमिका को अहम मानते हुए उसकी तलाश की जा रही है। मिथिलेश सिंह फिलहाल पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। उसकी तलाश के लिए जांच टीमों को अलग-अलग शहरों में भेजे जाने की जानकारी सामने आई है। JSSC CGL Exam scam
जांच के दौरान गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में कथित तौर पर यह जानकारी सामने आई है कि परीक्षा में चयन कराने के नाम पर अभ्यर्थियों से बड़ी रकम वसूले जाने का नेटवर्क चल रहा था। जांच एजेंसी के अनुसार, कुछ परीक्षाओं में अभ्यर्थियों से कथित तौर पर 12 लाख से 20 लाख रुपये तक की रकम लेने की बात सामने आई है। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
अभय तिवारी के बयान से जांच को मिला अहम सुराग
मामले में गिरफ्तार आरोपी अभय तिवारी से पूछताछ के दौरान भी महत्वपूर्ण जानकारी मिलने का दावा किया गया है। जांच के मुताबिक, अभय ने कथित तौर पर अपने, अपने भाई अक्षय तिवारी और पत्नी सुषमा कुमारी के चयन के लिए 12-12 लाख रुपये दिए थे। यदि यह जानकारी जांच में प्रमाणित होती है, तो तीनों के लिए कथित भुगतान की कुल राशि 36 लाख रुपये बैठती है। जांच टीम अब इस रकम के लेन-देन और इसके पीछे मौजूद नेटवर्क की कड़ियों को खंगाल रही है।
मामले की जांच केवल पैसे के लेन-देन तक सीमित नहीं है। सीआईडी परीक्षा संचालन के दौरान इस्तेमाल होने वाली डिजिटल प्रणाली और डेटा सुरक्षा से जुड़े पहलुओं की भी जांच कर रही है। जांच के अनुसार, ओएमआर शीट की प्रोसेसिंग और प्रश्नपत्रों की छपाई जैसी संवेदनशील जिम्मेदारियां वेबेल और आईसीएन जैसी एजेंसियों को दी गई थीं। इन एजेंसियों से जुड़े कुछ कर्मचारियों से भी पूछताछ की गई है। आरोप है कि परीक्षा पोर्टल के बैकएंड सिस्टम में कथित अनधिकृत बदलाव के जरिए अभ्यर्थियों के अंकों में हेरफेर किया गया। जांच एजेंसी इस तकनीकी पहलू से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों की पड़ताल कर रही है। JSSC CGL Exam Scam
दिल्ली में पकड़े गए कर्मचारियों से भी पूछताछ
जांच के दौरान दिल्ली से आईसीएन से जुड़े कर्मचारियों सुमांश प्रकाश और राहुल कुमार को गिरफ्तार किए जाने की बात सामने आई है। पूछताछ में उन्होंने कथित तौर पर खुद को निचले स्तर के निर्देशों पर काम करने वाला बताया। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि परीक्षा प्रक्रिया में निर्णय लेने की वास्तविक भूमिका किन लोगों की थी और आयोग के अधिकारियों तथा निजी एजेंसियों के बीच संपर्क किस स्तर पर रहा।
सीआईडी को जांच के दौरान मिथिलेश सिंह से जुड़ी कथित संपत्तियों और वित्तीय लेन-देन की भी जानकारी मिली है। जांच एजेंसियों को संदेह है कि परीक्षा से जुड़ी कथित अवैध कमाई के जरिए देश के अलग-अलग हिस्सों में बड़ी मात्रा में संपत्ति बनाई गई। जांच में दिल्ली, पटना, रांची, मुंबई, पुणे, राजस्थान और हरियाणा में जमीन, मकान, फ्लैट, होटल और व्यावसायिक संपत्तियों से जुड़े सुराग मिलने की बात कही गई है। जांच एजेंसी अब इन संपत्तियों के वास्तविक मालिकाना हक, खरीद के स्रोत और पैसों के लेन-देन की कड़ियों को सत्यापित कर रही है।
कई राज्यों में परीक्षा मामलों से जुड़ने का दावा
मिथिलेश सिंह मूल रूप से बिहार के भोजपुर जिले का रहने वाला बताया गया है। जांच से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, उसका नाम इससे पहले भी विभिन्न राज्यों में परीक्षा संबंधी अनियमितताओं और प्रश्नपत्र लीक के मामलों में सामने आ चुका है। जांच एजेंसी अब यह भी पता लगाने में जुटी है कि क्या अलग-अलग राज्यों में सक्रिय परीक्षा घोटालों के नेटवर्क के बीच कोई संगठित संबंध था और झारखंड में भी उसी तरीके से काम किया गया।
फिलहाल सीआईडी वित्तीय रिकॉर्ड, डिजिटल साक्ष्य, परीक्षा संचालन से जुड़े दस्तावेज और गिरफ्तार आरोपियों के बयानों को आपस में जोड़कर पूरे नेटवर्क की तस्वीर तैयार कर रही है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि परीक्षा प्रक्रिया में कथित धांधली किस स्तर तक हुई, इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे और वित्तीय लेन-देन का वास्तविक दायरा कितना था। JSSC CGL Exam Scam