Municipal Council Elections: टिकट बंटवारे की नाराजगी श्रीगंगानगर में अब खुलकर आने लगी सामने, बोलने लगे कार्यकर्ता
नगर परिषद चुनाव में भाजपा के टिकट वितरण को लेकर असंतोष के सुर तेज, सोशल मीडिया पर भी सामने आ रहा विरोध
Municipal Council Elections: श्रीगंगानगर। नगर परिषद चुनाव की सरगर्मियां जैसे-जैसे तेज हो रही हैं, वैसे-वैसे राजनीतिक दलों के भीतर टिकट वितरण को लेकर असंतोष भी सतह पर आता दिखाई दे रहा है। श्रीगंगानगर में खासतौर पर भाजपा के टिकट वितरण को लेकर कुछ कार्यकर्ताओं और दावेदारों में नाराजगी के स्वर अब दबे नहीं रह गए हैं। सोशल मीडिया पर सामने आ रही पोस्टों में सामान्य वर्ग के दावेदारों और समर्थकों की उपेक्षा किए जाने जैसे आरोप लगाए जा रहे हैं। Sri Ganganagar News
शहर में चुनावी माहौल के बीच यह चर्चा भी जोर पकड़ रही है कि कई वार्डों में लंबे समय से पार्टी के लिए काम कर रहे कार्यकर्ताओं को टिकट की उम्मीद थी, लेकिन टिकट वितरण के बाद समीकरण उनकी अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं रहे। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सोशल मीडिया पर विरोध और कार्यकर्ताओं की प्रतिक्रियाएं पार्टी के लिए चिंता का विषय जरूर बन सकती हैं।
'कार्यकर्ता की मेहनत बनाम टिकट का फैसला' बना बड़ा सवाल
श्रीगंगानगर नगर परिषद में 65 वार्डों की चुनावी तस्वीर सामने आ चुकी है और आरक्षण के बाद अलग-अलग वर्गों के लिए राजनीतिक समीकरण भी बदल गए हैं। टिकट के लिए भाजपा में बड़ी संख्या में आवेदन आने की खबर पहले ही सामने आ चुकी थी और पार्टी की ओर से योग्यता तथा जीतने की क्षमता को प्राथमिकता देने की बात कही गई थी। ऐसे में अब जिन दावेदारों को टिकट नहीं मिला, उनके सामने अगला रास्ता क्या होगा—पार्टी के साथ रहना, बागी होकर मैदान में उतरना या निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ना, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा। Sri Ganganagar News
इन दिनों सोशल मीडिया पर टिकट वितरण को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ पोस्टों में भाजपा पर सामान्य वर्ग के साथ न्याय नहीं करने के आरोप लगाए जा रहे हैं। हालांकि ऐसी पोस्टों को पार्टी के सभी कार्यकर्ताओं या पूरे सामान्य वर्ग की राय मानना उचित नहीं होगा। राजस्थान के अन्य निकायों में भी टिकट वितरण को लेकर दोनों प्रमुख दलों के भीतर असंतोष और बगावत की खबरें सामने आई हैं।
अब असली परीक्षा वोटर की अदालत में
श्रीगंगानगर में चुनावी लड़ाई अब केवल भाजपा-कांग्रेस के बीच नहीं, बल्कि पार्टी के आधिकारिक प्रत्याशी और असंतुष्ट दावेदारों के बीच भी दिखाई दे सकती है। टिकट से नाराज दावेदार यदि निर्दलीय मैदान में उतरते हैं तो इसका सीधा असर कई वार्डों के चुनावी समीकरण पर पड़ सकता है। आखिरकार टिकट पार्टी देती है, लेकिन जीत का फैसला जनता करती है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि नाराज कार्यकर्ता पार्टी के फैसले को स्वीकार करते हैं या फिर उनकी नाराजगी चुनावी मैदान में किसी बड़े राजनीतिक बदलाव का कारण बनती है। Sri Ganganagar News