H-1B Visa को लेकर ट्रंप प्रशासन ने की नियमों में बदलाव की तैयारी; भारतीय पेशेवरों पर होगा ये असर?
ट्रंप प्रशासन का बड़ा फैसला, व्हाइट हाउस पहुंचा प्रस्ताव
वॉशिंगटन। अमेरिका में काम करने वाले विदेशी पेशेवरों के लिए महत्वपूर्ण माने जाने वाले H-1B वीजा कार्यक्रम में बदलाव की प्रक्रिया आगे बढ़ती दिखाई दे रही है। ट्रंप प्रशासन ने H-1B व्यवस्था में संभावित सुधार से जुड़े प्रस्ताव को व्हाइट हाउस के Office of Information and Regulatory Affairs (OIRA) के पास समीक्षा के लिए भेजा है। इस वीजा कार्यक्रम का इस्तेमाल बड़ी संख्या में भारतीय तकनीकी और अन्य कुशल पेशेवर अमेरिका में रोजगार के लिए करते हैं। H1B Visa News
अमेरिकी Department of Homeland Security (DHS) ने ‘Reforming the H-1B Nonimmigrant Visa Classification Program’ नाम से प्रस्तावित नियम को नियामकीय समीक्षा के लिए आगे बढ़ाया है। इसे आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण प्रस्ताव की श्रेणी में रखा गया है। ऐसी श्रेणी में आने वाले नियमों का अर्थव्यवस्था, रोजगार, उत्पादकता या प्रतिस्पर्धा पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।
हालांकि, प्रस्ताव के विस्तृत प्रावधान अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। उपलब्ध दस्तावेजों से यह स्पष्ट नहीं है कि प्रशासन H-1B के लिए पात्रता, वेतन संबंधी शर्तों, नियोक्ताओं की आवश्यकताओं, चयन प्रक्रिया अथवा अनुपालन व्यवस्था में किस तरह के बदलाव पर विचार कर रहा है। H1B Visa News
अभी मौजूदा नियमों में कोई बदलाव नहीं
प्रस्ताव के समीक्षा चरण में होने का मतलब यह नहीं है कि H-1B के मौजूदा नियम तत्काल बदल गए हैं। OIRA समीक्षा के बाद प्रस्ताव को मंजूरी मिल सकती है, एजेंसी के पास वापस भेजा जा सकता है या संशोधनों के साथ आगे बढ़ाया जा सकता है। नियम का विस्तृत प्रारूप सार्वजनिक होने और Federal Register में प्रकाशित किए जाने के बाद आम लोगों, कंपनियों और अन्य संबंधित पक्षों से टिप्पणियां मांगी जा सकती हैं। इसके बाद प्राप्त सुझावों की समीक्षा के आधार पर अंतिम नियम को लेकर फैसला किया जाएगा। इसलिए फिलहाल H-1B धारकों और नियोक्ताओं के लिए मौजूदा व्यवस्था ही लागू है और प्रस्ताव के आधार पर तत्काल किसी विशेष कार्रवाई की आवश्यकता नहीं है।
H-1B व्यवस्था को लेकर सामने आया यह व्यापक सुधार प्रस्ताव उस अलग प्रस्ताव से भिन्न है, जिसमें कुछ कैप-सब्जेक्ट H-1B याचिकाओं पर 1,03,265 डॉलर की अतिरिक्त फीस लगाने का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है। इस शुल्क संबंधी प्रस्ताव में कुछ श्रेणियों के लिए अलग प्रावधान और छूट का उल्लेख है। वहीं, कुछ विश्वविद्यालयों तथा सरकारी और गैर-लाभकारी शोध संस्थानों से जुड़ी कैप-मुक्त याचिकाओं को इसके दायरे से बाहर रखा गया है।
इस प्रस्ताव पर 24 सितंबर तक सार्वजनिक टिप्पणियां आमंत्रित की गई हैं। टिप्पणियों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद DHS इसके भविष्य को लेकर निर्णय लेगा। अमेरिकी प्रशासन विदेशी छात्रों के लिए उपलब्ध Optional Practical Training (OPT) व्यवस्था से संबंधित संभावित शुल्क पर भी विचार कर रहा है। OPT के तहत पात्र विदेशी विद्यार्थी अपनी पढ़ाई से संबंधित क्षेत्र में व्यावहारिक कार्य अनुभव हासिल कर सकते हैं।
इसके अलावा H-1B समेत कुछ विदेशी कर्मचारियों को नौकरी समाप्त होने के बाद मिलने वाली 60 दिन की ग्रेस पीरियड में बदलाव या उसे समाप्त करने के प्रस्ताव पर भी चर्चा चल रही है। वर्तमान व्यवस्था में यह अवधि कर्मचारियों को नई नौकरी तलाशने या अपना इमिग्रेशन स्टेटस बदलने के लिए अतिरिक्त समय देती है। H1B Visa News
क्या है H-1B वीजा?
H-1B एक गैर-आप्रवासी वीजा श्रेणी है, जिसके माध्यम से अमेरिकी कंपनियां विशेष कौशल और विशेषज्ञता वाले विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त कर सकती हैं। इसके लिए सामान्यतः संबंधित क्षेत्र में स्नातक डिग्री या उसके समकक्ष योग्यता आवश्यक होती है। टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग, वित्त, स्वास्थ्य सेवाओं और अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में H-1B वीजा का व्यापक इस्तेमाल होता है। भारतीय पेशेवर इस कार्यक्रम के प्रमुख लाभार्थियों में शामिल रहे हैं।
अमेरिकी कानून के तहत सामान्य H-1B कैप के लिए हर वर्ष 65,000 वीजा उपलब्ध होते हैं। इसके अतिरिक्त अमेरिकी उच्च शिक्षण संस्थानों से मास्टर डिग्री या उससे उच्च स्तर की डिग्री हासिल करने वाले योग्य विदेशी पेशेवरों के लिए 20,000 अतिरिक्त वीजा का प्रावधान है। फिलहाल प्रस्ताव समीक्षा के शुरुआती चरण में है। इसलिए इसके अंतिम स्वरूप और भारतीय पेशेवरों पर वास्तविक प्रभाव का आकलन नियम का पूरा मसौदा सार्वजनिक होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। H1B Visa News