महाराष्ट्र में ग्रीन एनर्जी को मिलेगी नई रफ्तार, अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस को 4,700 करोड़ रुपये का बड़ा प्रोजेक्ट
महाराष्ट्र में ग्रीन एनर्जी को मिलेगी नई रफ्तार, अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस को 4,700 करोड़ रुपये का बड़ा प्रोजेक्ट
नई दिल्ली: दिग्गज कारोबारी गौतम अडानी की कंपनी अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड (AESL) ने महाराष्ट्र में रिन्यूएबल एनर्जी के क्षेत्र में बड़ी कामयाबी हासिल की है। कंपनी को राज्य में 4,500 मेगावाट (MW) रिन्यूएबल और स्टोरेज पावर के ट्रांसमिशन से जुड़ा करीब 4,700 करोड़ रुपये का बड़ा प्रोजेक्ट मिला है। इस परियोजना का उद्देश्य महाराष्ट्र में तेजी से बढ़ रही सौर और पवन ऊर्जा को राज्य के प्रमुख औद्योगिक एवं अधिक बिजली मांग वाले क्षेत्रों तक पहुंचाने के लिए मजबूत ट्रांसमिशन नेटवर्क तैयार करना है।
3 साल में पूरा होगा प्रोजेक्ट
अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस को इस महत्वाकांक्षी परियोजना को पूरा करने के लिए 36 महीने यानी तीन साल का समय दिया गया है। कंपनी इसे सतारा पावर ट्रांसमिशन लिमिटेड (Satara Power Transmission Limited) नाम की विशेष प्रयोजन कंपनी (SPV) के माध्यम से विकसित करेगी।
यह प्रोजेक्ट महाराष्ट्र के साथ-साथ दक्षिणी और पश्चिमी भारत के बीच बिजली कनेक्टिविटी को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगा। खासतौर पर रिन्यूएबल एनर्जी और पंप्ड-स्टोरेज पावर की बढ़ती क्षमता को ग्रिड से जोड़ने के लिए यह ट्रांसमिशन नेटवर्क महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
562 सर्किट किलोमीटर की नई ट्रांसमिशन लाइन
इस परियोजना के तहत महाराष्ट्र में बड़े पैमाने पर ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा। नेटवर्क में करीब 562 सर्किट किलोमीटर नई ट्रांसमिशन लाइनें जोड़ी जाएंगी। इसके साथ ही परियोजना में लगभग 9,000 MVA की ट्रांसफॉर्मेशन क्षमता भी विकसित की जाएगी।
महाराष्ट्र के सतारा जिले में एक नया हाई-वोल्टेज सब-स्टेशन बनाया जाएगा। वहीं कोल्हापुर से सतारा के बीच नई ट्रांसमिशन लाइन बिछाई जाएगी। इसके अलावा कोल्हापुर में मौजूद पूलिंग स्टेशन को भी अपग्रेड किया जाएगा।
कर्नाटक की ग्रीन एनर्जी महाराष्ट्र तक पहुंचेगी
इस प्रोजेक्ट का एक बड़ा फायदा यह होगा कि कर्नाटक में तैयार होने वाली रिन्यूएबल एनर्जी को मजबूत ट्रांसमिशन नेटवर्क के जरिए महाराष्ट्र के प्रमुख बिजली मांग वाले क्षेत्रों तक पहुंचाया जा सकेगा। इससे खासतौर पर सतारा, पुणे और मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (MMR) जैसे बड़े औद्योगिक एवं शहरी क्षेत्रों को फायदा मिलने की उम्मीद है।
इसके अलावा पश्चिमी महाराष्ट्र और कर्नाटक की सीमा से जुड़े क्षेत्रों में विकसित हो रहे पंप्ड-स्टोरेज प्रोजेक्ट्स को भी इससे बेहतर ग्रिड कनेक्टिविटी मिलेगी। पंप्ड-स्टोरेज तकनीक रिन्यूएबल ऊर्जा को जरूरत के समय इस्तेमाल करने के लिए स्टोर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
ग्रिड को मिलेगी मजबूती, बढ़ेगी ग्रीन एनर्जी की क्षमता
अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस के CEO कंदर्प पटेल के मुताबिक, पंप्ड-स्टोरेज प्रोजेक्ट्स बड़े पैमाने पर रिन्यूएबल एनर्जी को ग्रिड में शामिल करने के लिए जरूरी लचीलापन और विश्वसनीयता प्रदान करते हैं। उनके अनुसार, सतारा ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट रिन्यूएबल एनर्जी के ट्रांसमिशन और स्टोरेज को सपोर्ट करने वाली एक महत्वपूर्ण ट्रांसमिशन बैकबोन तैयार करेगा।
उन्होंने कहा कि इस परियोजना से दक्षिणी और पश्चिमी भारत के बीच बिजली कनेक्टिविटी मजबूत होगी। साथ ही भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया जा रहा यह ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर रिन्यूएबल एनर्जी के विस्तार, ग्रिड स्थिरता और भारत के दीर्घकालिक डीकार्बोनाइजेशन लक्ष्यों को भी समर्थन देगा।
महाराष्ट्र के पावर सेक्टर के लिए क्यों अहम है यह प्रोजेक्ट?
महाराष्ट्र में बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है। दूसरी ओर देश में सौर और पवन ऊर्जा की क्षमता तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में सिर्फ बिजली पैदा करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे उत्पादन वाले क्षेत्रों से उन इलाकों तक पहुंचाने के लिए मजबूत ट्रांसमिशन नेटवर्क भी जरूरी है, जहां इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है।
अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस का यह प्रोजेक्ट इसी जरूरत को पूरा करने की दिशा में बड़ा कदम है। 4,500 MW रिन्यूएबल और स्टोरेज पावर को ट्रांसमिट करने की क्षमता वाला यह नेटवर्क महाराष्ट्र में ग्रीन एनर्जी के विस्तार को नई रफ्तार दे सकता है। साथ ही इससे औद्योगिक क्षेत्रों को भरोसेमंद बिजली आपूर्ति और भविष्य में बढ़ने वाली ऊर्जा मांग को पूरा करने के लिए बेहतर आधारभूत ढांचा मिल सकता है।
कुल मिलाकर, 4,700 करोड़ रुपये का यह प्रोजेक्ट महाराष्ट्र के साथ-साथ देश के क्लीन एनर्जी ट्रांजिशन के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नई ट्रांसमिशन लाइनों, हाई-वोल्टेज सब-स्टेशन और बढ़ी हुई ट्रांसफॉर्मेशन क्षमता के जरिए यह परियोजना रिन्यूएबल एनर्जी को बड़े बिजली मांग वाले केंद्रों तक पहुंचाने में अहम कड़ी साबित हो सकती है।