खून की एक जांच बताएगी शरीर के अंग कितने जवान या बूढ़े हैं, स्टैनफोर्ड की रिसर्च में सामने आई बड़ी खोज
खून की एक जांच बताएगी शरीर के अंग कितने जवान या बूढ़े हैं, स्टैनफोर्ड की रिसर्च में सामने आई बड़ी खोज
नई दिल्ली: हमारी उम्र सिर्फ जन्मतिथि से तय नहीं होती। शरीर के अंदर मौजूद अलग-अलग अंग अपनी उम्र से तेज या धीमी गति से बूढ़े हो सकते हैं। किसी व्यक्ति की उम्र भले ही 50 साल हो, लेकिन उसका दिमाग जैविक रूप से उससे कहीं ज्यादा उम्र का हो सकता है। इसी 'ऑर्गन एज' यानी अंगों की जैविक उम्र को समझने की दिशा में स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने महत्वपूर्ण प्रगति की है।
स्टैनफोर्ड के न्यूरोसाइंटिस्ट टोनी वायस-कोरे और उनकी टीम ने एक ऐसी वैज्ञानिक पद्धति विकसित की है, जिसमें खून में मौजूद हजारों प्रोटीन का विश्लेषण करके शरीर के अलग-अलग अंगों की जैविक उम्र का अनुमान लगाया जा सकता है। यह शोध जुलाई 2025 में Nature Medicine में प्रकाशित हुआ था।
11 अंगों की जैविक उम्र का लगाया गया अनुमान
शोधकर्ताओं ने यूके बायोबैंक के 44,498 लोगों के आंकड़ों का अध्ययन किया। इन प्रतिभागियों की उम्र 40 से 70 वर्ष के बीच थी। वैज्ञानिकों ने खून में मौजूद करीब 2,916 प्रोटीन का इस्तेमाल करते हुए 11 अलग-अलग अंगों की जैविक उम्र का अनुमान लगाया।
इस तकनीक का मकसद यह देखना है कि किसी व्यक्ति का कोई अंग उसकी वास्तविक उम्र के मुकाबले जैविक रूप से कितना 'युवा' या 'बूढ़ा' दिखाई देता है। इसके लिए वैज्ञानिकों ने ऑर्गन से जुड़े प्रोटीन के स्तर और मशीन लर्निंग मॉडल का इस्तेमाल किया।
यानी भविष्य में केवल यह जानना ही जरूरी नहीं होगा कि 'आपकी उम्र कितनी है?', बल्कि यह भी समझने में मदद मिल सकती है कि 'आपके शरीर के अलग-अलग अंगों की उम्र कितनी है?'
दिमाग की उम्र और अल्जाइमर का कनेक्शन
इस अध्ययन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा दिमाग से जुड़ा रहा। शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन लोगों का दिमाग उनकी वास्तविक उम्र की तुलना में अधिक बूढ़ा दिखाई दिया, उनमें आगे चलकर अल्जाइमर रोग का खतरा काफी अधिक था।
अध्ययन के अनुसार, अत्यधिक उम्रदराज दिमाग वाले लोगों में अल्जाइमर का जोखिम करीब 3.1 गुना था। इसके विपरीत, जैविक रूप से युवा दिमाग वाले लोगों में यह जोखिम काफी कम पाया गया।
शोधकर्ताओं ने प्रतिभागियों की स्वास्थ्य स्थिति को लंबे समय तक ट्रैक किया। फॉलो-अप अवधि 17 साल तक रही। इससे वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद मिली कि शुरुआत में दिखाई देने वाली ऑर्गन एज और भविष्य में होने वाली बीमारियों के बीच किस तरह का संबंध हो सकता है।
सिर्फ दिमाग ही नहीं, दूसरे अंगों की उम्र भी महत्वपूर्ण
रिसर्च में यह भी सामने आया कि शरीर के अलग-अलग अंग अलग-अलग गति से बूढ़े होते हैं। किसी व्यक्ति का एक अंग जैविक रूप से उम्रदराज हो सकता है, जबकि दूसरा अंग उसी व्यक्ति की उम्र के मुकाबले अपेक्षाकृत युवा रह सकता है।
शोधकर्ताओं ने पाया कि अधिक उम्र वाले अंगों का संबंध भविष्य में कई बीमारियों के जोखिम से था। उदाहरण के लिए, अधिक उम्र वाले हृदय का संबंध हार्ट फेलियर और एट्रियल फिब्रिलेशन से, किडनी और पैंक्रियाज की उम्र का संबंध क्रॉनिक किडनी डिजीज से और फेफड़ों की उम्र का संबंध COPD से पाया गया।
जैविक उम्र और मौत के जोखिम का भी संबंध
रिसर्च में एक और महत्वपूर्ण बात सामने आई। जिन लोगों के कई अंग जैविक रूप से ज्यादा उम्रदराज पाए गए, उनमें आगे चलकर मृत्यु का जोखिम भी बढ़ता गया।
अध्ययन में 2 से 4 उम्रदराज अंगों वाले लोगों में मृत्यु जोखिम का हेजर्ड रेशियो 2.3, 5 से 7 अंगों वाले लोगों में 4.5 और 8 या उससे ज्यादा अंगों के उम्रदराज होने पर 8.3 पाया गया। वहीं युवा दिमाग और युवा इम्यून सिस्टम दोनों का होना बेहतर दीर्घायु से जुड़ा था।
जीवनशैली का भी पड़ता है असर
इस शोध की खास बात यह है कि ऑर्गन एज केवल उम्र या जीन से तय होती हुई नहीं दिखाई दी। वहीं नियमित जोरदार व्यायाम और कुछ बेहतर आहार संबंधी आदतें अपेक्षाकृत युवा अंगों से जुड़ी थीं।
इससे संकेत मिलता है कि शरीर की जैविक उम्र को समझना भविष्य में केवल बीमारी की पहचान के लिए ही नहीं, बल्कि जीवनशैली में सुधार के प्रभाव को समझने के लिए भी उपयोगी हो सकता है।
क्या यह टेस्ट अभी अस्पतालों में उपलब्ध है?
यहां एक जरूरी बात समझना महत्वपूर्ण है। यह शोध ऑर्गन की जैविक उम्र का अनुमान लगाने की वैज्ञानिक क्षमता को दिखाता है, लेकिन इसे अभी सामान्य अस्पतालों में होने वाली कोई साधारण, नियमित स्वास्थ्य जांच नहीं माना जाना चाहिए।
इस अध्ययन में अत्याधुनिक प्रोटिओमिक्स तकनीक और मशीन लर्निंग मॉडल का इस्तेमाल किया गया था। इसलिए आम व्यक्ति के लिए इसे अभी 'एक बार खून देने पर 11 अंगों की उम्र की पक्की रिपोर्ट' के रूप में समझना सही नहीं होगा। शोधकर्ताओं ने भी इसे भविष्य में ऑर्गन हेल्थ और बीमारी के जोखिम को समझने की संभावित दिशा के रूप में पेश किया है।
भविष्य में बदल सकता है बीमारी की पहचान का तरीका
अगर इस तरह की तकनीक आगे चलकर क्लिनिकल इस्तेमाल के लिए पर्याप्त रूप से मान्य और सुलभ होती है, तो डॉक्टरों के पास बीमारी सामने आने से पहले जोखिम को समझने का एक नया तरीका हो सकता है। किसी व्यक्ति का दिमाग, हृदय, किडनी या इम्यून सिस्टम उसकी उम्र के मुकाबले तेजी से बूढ़ा हो रहा है या नहीं—इस तरह की जानकारी भविष्य में व्यक्तिगत स्वास्थ्य देखभाल को और बेहतर बनाने में मदद कर सकती है। हालांकि, अभी इसे बीमारी की भविष्यवाणी करने वाला अंतिम या निश्चित टेस्ट नहीं माना जा सकता। रिसर्च का सबसे बड़ा संदेश यही है कि शरीर की उम्र एक जैसी गति से नहीं बढ़ती और खून में मौजूद प्रोटीन इस प्रक्रिया को समझने के लिए महत्वपूर्ण संकेत दे सकते हैं।