India Japan Deal: भारत-जापान ने मिलकर कर दिया ये बड़ा काम, अमेरिका और चीन भी हो गया हैरान

भारत-जापान मिलकर दुनिया में कर सकते हैं बेहतर काम, सेमीकंडक्टर और स्पेस सेक्टर पर गोयल का जोर

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India Japan Deal: टोक्यो।  वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने प्रौद्योगिकी , विनिर्माण और सेवाओं सहित विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग की विशाल संभावनाओं पर बल देते हुए कहा है कि भारत में सेमीकंडक्टर की घरेलू मांग के अगले पांच साल में 150 अरब डॉलर तक पहुंचने की संभावना है और जापान की बहुत सी कंपनियां भारत के इस क्षेत्र की ओर आकर्षित हो रही हैं। श्री गोयल इस समय एक बड़े व्यावसायिक प्रतिनिधिमंडल के साथ जापान की यात्रा पर है। वह जापानी मीडिया संस्थान निक्केई एशिया द्वारा आयोजित परिचर्चा सत्र में डिजिटल हार्डवेयर तथा डाटा सेंटर और अन्य क्षेत्रों की संभावनाओं पर पूछे गये सवालों का जवाब दे रहे थे। गोयल ने भारत में सेमीकंडक्टर (माइक्रोचिप) विनिर्माण के विकास के बारे में कहा कि देश में ही इसका बहुत बड़ा बाजार है।

उन्होंने कहा, " पहले हमारा अनुमान था कि भारत में 2030 तक सेमी कंडक्टरों की मांग 100 अरब डॉलर की होगी । लेकिन हमारे यहां मध्य वर्ग का जिस तरह विस्तार हो रहा है उससे अगले पांच साल में इसकी मांग 150 अरब डॉलर तक पहुंचने की संभावना है। मध्य वर्ग इलेक्ट्रानिक सामानों का बड़ा उपभोकता है इस तरह आप भारत में सेमीकंडक्टर बाजार की संभावनाओं का अनुमान लगा सकते हैं' उन्होंने डेटा सेंटर , ग्लोबल कैपिसिटी सेंटर (जीसीसी) तथा अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में भारत और जापान के बीच सहयोग के अवसरों की व्याख्या करते हुए कहा कि दोनों देशों की साझेदारी दुनिया में सबसे अच्छे परिणाम प्रस्तुत कर सकती है। श्री गोयल ने कहा , " भारत सरकार सेमीकंडक्टर उद्योग को पूरी मदद कर रही है। जापान की बहुत सी कंपनियों को भारत का यह उद्योग आकर्षक लग रहा है।

" उन्होंने अत्यधिक ऊर्जा पर आधारित डाटा सेंटरों के संदर्भ में बिजली की मजबूत आपूर्ति व्यवस्था का भी उल्लेख किया और कहा कि 2014 में मोदी सरकार के आने के समय देश में बिजली ग्रिड राज्यों और क्षेत्रों के स्तर पर बंटे थे, सौर ऊर्जा की स्थापित क्षमता मात्र दो गीगा वाट (2,000 वाट) थी, सरकार ने ग्रिड समन्वय का काम प्राथमिकता के आधार पर 2018 तक 520 गीगावाट का एक राष्ट्रीय ग्रिड स्थापित कर दिया जो आज एकाध देश को छोड़ दुनिया में सबसे बड़ा एकीकृत ग्रिड है। इसमें 60 प्रतिशत हिस्सा (290 गीगावाट) स्वच्छ ऊर्जा का है। अगले सात-आठ साल में यह 1,000 गीगावाट का ग्रिड बन जाएगा जिसमें 70 प्रतिशत योगदान स्वच्छ ऊर्जा का है। उन्होंने छोटे मॉड्यूलर रिऐक्टरों के साथ 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु बिजली क्षमता की भारत की योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत सौर ऊर्जा और ग्रीन हाइड्रोजन को भी प्रोत्साहित कर रहा है। देश 20247 तक सबसे कम लागत पर 'सातों दिन, चौबीसो घंटे' बिजली देने को तैयार होगा। डाटा सेंटरों के लिए ऊर्जा की चार स्तरीय व्यवस्था होगी ताकि वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध रहे।

उन्होंने क्लाउड सर्विस देने वाले डॉटा सेंटरों में निवेश को 2047 तक कर में छूट की पेशकश की है। भारत डाटा सेंटर के लिए सबसे अच्छा स्थान है। इन सेंटरों में डाटा और बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) का पूरा संरक्षण किया जाएगा। श्री गोयल ने इस सुझाव को अस्वीकार किया कि भारत का हरित ऊर्जा पर जोर पश्चिम एशिया संकट के कारण है। उन्होंने इसे प्रकृति के प्रति लगाव का परिणाम बताते हुए कहा कि 2014 में सरकार बनाने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें बिजली विभाग की जिम्मेदारी दी थी और एक साल में ही सौर ऊर्जा की क्षमता को दो गीगावाट से 10 गीगावाट कर दिया। वाणिज्य मंत्री ने कहा, ' पश्चिम एशिया का संकट शेष दुनिया के लिए आंख खोलने की घंटी हो सकती है पर हम ऐसे लोग हैं जो धरती मां का सम्मान करते हैं, हम पेड़, पहाड़ और समु्द्र की पूंजा करते हैं।"

कार्यक्रम में उपस्थित उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के सवालों का जवाब देते हुए श्री गोयल ने कहा कि भारत ने अपने अंतरिक्ष उद्योग को निजी क्षेत्र के लिए खोल दिया है। उन्होंने बेंगलूरू के स्टार्टअप स्काईरूट को पहले प्रयास में ही उपग्रह प्रेपण में मिली सफलता का जिक्र करते हुए कहा कि भारत में इस समय 250 से अधिक पंजीकृत स्टार्टअप इकाइयां अंतरिक्ष क्षेत्र में काम कर रही हैं। उन्होंने कहा, " अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत और जापान की भागीदारी शक्ति को कई गुणा बढ़ाने वाली हो सकती।" उन्होंने कहा कि वह चाहेंगे कि दोनों देशों की कंपनियां इसमें भागीदारी करें और वे मिल कर दुनिया में किसी भी देश से अच्छा काम कर सकती है लेकिन यह निर्णय उन पर ही छोड़ना चाहिए।

उन्होंने भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) के नियमों को लेकर जापान की एक लघु एवं मझोली इकाई के सवाल के जवाब में कहा कि व्यापार में विश्व व्यापार संगठन के नियम चलते हैं जिसमें जो मानक विदेशी कंपनियों पर लागू किये जाते हैं वही नियम घरेलू इकाइयों पर भी लागू किये जाते हैं। श्री गोयल ने जापान में वृद्ध होती आबादी का उल्लेख करते हुए कहा कि जापान को युवा इंजीनियरों, सेवा सुश्रुषा करने वालों और उद्योग एवं सेवा क्षेत्र में काम करने वाले कुशल लोगों की जरूरत है जिसके लिए भारत एक प्रमुख स्रोत है। उन्होंने कोविड के समय घर से काम का उल्लेख करते हुए कहा कि जापान की धरती बड़े डॉटा सेंटरों के लिए उपयुक्त नहीं हो सकती है तो वह भारत में डाटा सेंटर के लिए भारत को चुन सकता है।

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