Raksha Bandhan: रक्षाबंधन नजदीक आते ही सजे राखियों के बाजार, भाई-बहन के प्रेम का पर्व मनाने को उत्साह

रक्षाबंधन को लेकर बाजारों में बढ़ी रौनक, राखियों की खरीदारी में जुटीं बहनें

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पानीपत (सच कहूँ/सन्नी कथूरिया)। जैसे-जैसे बहन-भाई का पवित्र त्यौहार रक्षाबंधन नजदीक आता जा रहा है, वैसे-वैसे बाजारों में राखियों के स्टॉल सजने लगे हैं। रक्षाबंधन पर बहनें भाइयों की दाहिनी कलाई में राखी बांधती हैं, उनका तिलक करती हैं और उनसे अपनी रक्षा का संकल्प लेती हैं। हालांकि रक्षाबंधन की व्यापकता इससे भी कहीं ज्यादा है। राखी बांधना सिर्फ भाई-बहन के बीच का कार्यकलाप नहीं रह गया है। राखी देश की रक्षा, पर्यावरण की रक्षा, हितों की रक्षा आदि के लिए भी बांधी जाने लगी है।त्योहार की तैयारी में जुटीं बहनों के चेहरे पर एक अलग ही खुशी और उत्साह देखने को मिल रहा है।

​दूर बैठे भाइयों के लिए पहले से तैयारी

दूर-दराज के शहरों या विदेश में रहने वाले भाइयों के लिए बहनों ने समय रहते राखियां पोस्ट कर दी हैं। डाकघर और कोरियर केंद्रों पर बहनों की खासी भीड़ देखी जा रही है। बाजार में खरीदारी कर रहीं स्नेहा बताती हैं, "मेरा भाई दूसरे राज्य में नौकरी करता है। इस बार काम के व्यस्त शेड्यूल के कारण वह घर नहीं आ पा रहा, इसलिए मैंने हफ्ते भर पहले ही उसके लिए इको-फ्रेंडली राखी और उसकी पसंद की मिठाइयां भेज दी हैं। धागा भले ही लिफाफे में जाए, लेकिन उसमें अहसास पूरा होता है।"

रक्षा बंधन पर्व को लेकर सच कहूँ संवाददाता ने शहर के गणमान्यजनों से बातचीत की जो इस प्रकार है

राखी का त्यौहार पवित्र त्यौहार है, इस दिन बहनें भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधती हैं। लेकिन आजकल कुछ लोग इस पवित्र त्यौहार का महत्व नहीं समझते, उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए। इस त्यौहार को मयार्दा में रहते हुए प्रेम पूर्वक मनाना चाहिए।रक्षाबंधन सिर्फ एक रस्म नहीं, बल्कि बचपन की खट्टी-मीठी यादों को तरोताजा करने का अवसर है। संजना कहती हैं, "साल भर हम भाई-बहन चाहे कितना भी झगड़ लें, लेकिन राखी का दिन आते ही सारी शिकायतें मिट जाती हैं। भाई के माथे पर तिलक लगाकर उसकी कलाई पर धागा बांधने का सुकून ही अलग है।"                                                                                 -चंचल सहगल

Panipat News (2)

रक्षाबंधन से संबंधित अनेक कथाएं हैं। रक्षा बंधन के दिन बहनें रोली, अक्षत, कुमकुम एवं दीप जलकर थाल सजाती हैं। इस थाल में रंग-बिरंगी राखियों को रखकर उसकी पूजा करते हैं फिर बहनें भाइयों के माथे पर कुमकुम, रोली एवं अक्षत से तिलक करती हैं और रंग बिरंगे धागे बांध बांधती है और भाई की लंबी आयु की कामना करती है।बदलते दौर में भले ही शुभकामनाएं देने के लिए वीडियो कॉल और मैसेज का इस्तेमाल बढ़ गया हो, लेकिन बहनों का मानना है कि प्रत्यक्ष मिलकर कलाई पर रक्षासूत्र बांधने का अहसास अतुलनीय है। -ज्योतिका भाटिया 

भाई-बहन के स्नेह के अटूट बंधन का त्यौहार रक्षा बंधन है। रक्षाबंधन के शुभअवसर पर मैं सभी से अनुरोध करती हूँ कि व बेटियों को शिक्षित करें व कन्या भ्रूण हत्या को रोकें। वहीं हर त्यौहार पर हमें दूसरों की मद्द के लिए कार्य करना चाहिए ताकि जरूरतमंद व असहाय लोग भी हर त्यौहार को खुशी से मना सकें। - सुमन आहुजा

आज यह त्योहार हमारी संस्कृति की पहचान है और हर भारतवासी को इस त्योहार पर गर्व है। लेकिन भारत में जहां बहनों के लिए इस विशेष पर्व को मनाया जाता है, वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं जो भाई की बहनों को गर्भ में ही मार देते हैं। आज कई भाइयों की कलाई पर राखी सिर्फ इसलिए नहीं बंध पाती क्योंकि उनकी बहनों को उनके माता-पिता ने इस दुनिया में आने ही नहीं दिया। यह बहुत ही शर्मनाक बात है कि जिस देश में कन्या पूजन का विधान शास्त्रों में है वहीं कन्या भ्रूण हत्या के मामले सामने आते हैं। यह त्योहार हमें यह भी याद दिलाता है कि बहनें हमारे जीवन में कितना महत्व रखती हैं। - दीप्ति जैन

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