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Wholesale Price Index: सरकार बदलने जा रही होलसेल प्राइस इंडेक्स का आधार वर्ष, सरकार लाएगी नया पीपीआई सिस्टम

आर्थिक आंकड़ों में होगा बड़ा बदलाव

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नई दिल्ली। देश की सांख्यिकीय और आर्थिक मापन प्रणाली को अधिक आधुनिक एवं सटीक बनाने की दिशा में केंद्र सरकार महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रही है। सरकार थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) का आधार वर्ष बदलकर 2022-23 करने की तैयारी में है। इसके साथ ही उत्पादक मूल्य सूचकांक (पीपीआई) को भी लागू करने की योजना बनाई जा रही है, जिससे उत्पादन स्तर पर मूल्य परिवर्तनों का अधिक सटीक आकलन किया जा सकेगा। Wholesale Price Index

इस विषय पर उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) द्वारा मीडिया को विस्तृत जानकारी देने के लिए विशेष ब्रीफिंग आयोजित की जाएगी। इस अवसर पर विभाग के प्रधान आर्थिक सलाहकार प्रवीण महतो प्रस्तावित बदलावों की रूपरेखा प्रस्तुत करेंगे। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के सचिव सौरभ गर्ग ने बताया कि अप्रैल माह के औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) के आंकड़ों में किसी प्रकार का संशोधन न करना पड़े, इसके लिए 2022-23 आधार वर्ष वाले डब्ल्यूपीआई आंकड़ों का आंतरिक स्तर पर उपयोग किया गया है।

उन्होंने उम्मीद जताई कि नई श्रृंखला से जुड़े आंकड़े शीघ्र ही सार्वजनिक किए जाएंगे। वर्तमान में डब्ल्यूपीआई का आधार वर्ष 2011-12 है, जिसे संशोधित कर 2022-23 किया जा रहा है। हालांकि नया मूल्य सूचकांक लागू होने के बाद भी तत्काल प्रभाव से डब्ल्यूपीआई को हटाकर पीपीआई को पूरी तरह नहीं अपनाया जाएगा। सरकार पहले नई व्यवस्था की विश्वसनीयता, स्थिरता और उपयोगिता का मूल्यांकन करेगी, उसके बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी। Wholesale Price Index

सौरभ गर्ग के अनुसार भारत में डब्ल्यूपीआई और आउटपुट पीपीआई के परिणामों में अत्यधिक अंतर आने की संभावना कम है, क्योंकि वर्तमान गणना पद्धति दोनों सूचकांकों के बीच अंतर को सीमित रखने में सहायक है। यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब हाल ही में 2022-23 आधार वर्ष के साथ संशोधित औद्योगिक उत्पादन सूचकांक जारी किया गया है। सरकार पहले ही सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी), उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) और औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) के आधार वर्षों में संशोधन की प्रक्रिया शुरू कर चुकी है, जिसका उद्देश्य देश की आर्थिक सांख्यिकी को वर्तमान आर्थिक संरचना के अनुरूप बनाना है।

सरकार का कहना है कि जब तक संशोधित डब्ल्यूपीआई श्रृंखला पूरी तरह उपलब्ध नहीं हो जाती, तब तक मौजूदा सूचकांक का उपयोग जारी रहेगा। वहीं प्रस्तावित उत्पादक मूल्य सूचकांक उत्पादकों द्वारा खरीदी और बेची जाने वाली वस्तुओं एवं सेवाओं की कीमतों में होने वाले बदलाव को मापेगा। इससे उत्पादन स्तर पर लागत और मूल्य प्रवृत्तियों को समझना आसान होगा तथा महंगाई के आकलन की सटीकता भी बढ़ेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इन सुधारों से भारत की आर्थिक आंकड़ा प्रणाली अधिक पारदर्शी, अद्यतन और वैश्विक मानकों के अनुरूप बन सकेगी। Wholesale Price Index

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