बेजुबानों के लिए सेवादारों के इस सराहनीय प्रयास ने छू लिया सबका दिल

'पक्षियोंधार मुहिम' के तहत सेवादारों ने रेलवे स्टेशन, सरकारी स्कूल, सरकारी अस्पताल, आंगनबाड़ी केंद्र और सड़क किनारे खड़े पेड़ों पर बांधे परिंडे

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संगरिया (सच कहूँ/सुरेन्द्र जग्गा)। आसमान से बरसती आग और चिलचिलाती धूप के बीच, जब इंसान घरों से बाहर निकलने में कतरा रहा है, तब आसमान के उड़ते बेजुबान पंछियों के दर्द को डेरा सच्चा सौदा के सेवादारों ने महसूस किया। ब्लॉक के गांव ढाबा में सेवादारों ने मानवता और करुणा की एक ऐसी मिसाल पेश की है, जिसने पूरे इलाके को भावुक कर दिया। प्यासे पंछियों के लिए धड़क उठा दिल गाँव के कोने-कोने से आती पक्षियों की मूक पुकार को सुनकर सेवादारों की आँखें भर आईं। Sangaria News

'पक्षियोंधार मुहिम' के तहत सेवादारों ने एक-एक करके गांव ढाबा के रेलवे स्टेशन, सरकारी स्कूल, सरकारी अस्पताल, आंगनबाड़ी केंद्र और सड़क किनारे खड़े पेड़ों पर 70 परिंडे बांधे। मिट्टी के इन बर्तनों को जब पेड़ों पर टांगा गया, तो ऐसा लगा मानो तपती धरती पर बेजुबानों को जीवन का अमृत मिल गया हो।

सबने की सराहना | Sangaria News

इस भावुक कर देने वाले दृश्य को देखकर स्कूल के प्रधानाचार्य पवन सिंगला, हॉस्पिटल स्टाफ, आंगनबाड़ी केंद्र प्रभारी और पूरे गांव की आँखें भर आईं। सबने सेवादारों के इस निस्वार्थ और मानवीय प्रयास को दिल से सराहा। इस पुण्य कार्य में मक्खन इन्सां, हरचंद सिंह, गुरतेज सिंह, कृष्ण कुमार, जगदेव सिंह, भूराराम, महावीर और बृजलाल शर्मा सहित अनेक सेवादारों ने अपना पसीना बहाकर मानवता का फर्ज निभाया। सचमुच, इस भीषण दौर में बेजुबानों के प्रति ऐसा प्रेम ही इंसानियत को जिंदा रखता है।

सिर्फ परिंडे नहीं, जीवन का संकल्प बांधा

गाँव के प्रेमी सेवक स्वर्ण सिंह इन्सां ने बेहद भावुक मन से बताया कि यह सिर्फ मिट्टी के बर्तन बांधने का काम नहीं है, बल्कि यह उन मासूम पक्षियों की जान बचाने की एक प्रतिज्ञा है जो बोल नहीं सकते। सेवादारों ने केवल परिंडे लटकाए ही नहीं, बल्कि हर दिन भूखे-प्यासे पंछियों के लिए इनमें नियमित रूप से शीतल जल भरने का पवित्र संकल्प भी लिया है। Sangaria News

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