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Cricket News: वैभव के चयन पर इतना बवाल क्यों? कहीं आलोचना के शोर में अगला सचिन इंतजार में न रह जाए
वैभव के चयन पर इतना बवाल क्यों? कहीं आलोचना के शोर में अगला सचिन इंतजार में न रह जाए
नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज़)। भारतीय क्रिकेट में जब भी किसी युवा खिलाड़ी को बड़ा मौका मिलता है, तो उसके चयन को लेकर बहस शुरू हो जाती है। कोई इसे प्रतिभा का सम्मान मानता है तो कोई अनुभव की अनदेखी बताता है। इन दिनों युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी के चयन को लेकर भी कुछ ऐसा ही माहौल देखने को मिल रहा है। सोशल मीडिया से लेकर क्रिकेट विशेषज्ञों तक, हर कोई इस फैसले पर अपनी राय दे रहा है।
लेकिन सवाल यह है कि क्या हर चयन को केवल मौजूदा आंकड़ों और अनुभव के आधार पर ही परखा जाना चाहिए? या फिर कभी-कभी भविष्य की संभावनाओं पर भी भरोसा करना जरूरी होता है?
प्रतिभा को समय रहते पहचानना भी जरूरी
क्रिकेट केवल आंकड़ों का खेल नहीं है। चयनकर्ता खिलाड़ी की तकनीक, मानसिक मजबूती, दबाव में खेलने की क्षमता और लंबे समय तक टीम के लिए उपयोगी साबित होने की संभावना को भी देखते हैं। कई बार कोई खिलाड़ी घरेलू क्रिकेट में कम मैच खेलता है, लेकिन उसकी प्रतिभा इतनी अलग होती है कि उसे जल्दी मौका देना टीम के भविष्य के लिए सही फैसला माना जाता है।
इतिहास भी यही सिखाता है
भारतीय क्रिकेट के इतिहास में कई ऐसे खिलाड़ी हुए हैं, जिन्हें कम उम्र में बड़ा मंच मिला और उन्होंने उस भरोसे को सही साबित किया। अगर उस समय केवल अनुभव को प्राथमिकता दी जाती, तो शायद देश को कई महान क्रिकेटर देखने को नहीं मिलते।
हर दौर में कुछ फैसले विवादित रहे हैं, लेकिन समय बीतने के बाद वही फैसले भारतीय क्रिकेट की सबसे बड़ी सफलताओं में गिने गए।
मौका मिलने से पहले फैसला देना उचित नहीं
किसी भी खिलाड़ी का चयन अंतिम उपलब्धि नहीं, बल्कि उसके सफर की शुरुआत होती है। असली परीक्षा मैदान पर होती है। अगर खिलाड़ी अच्छा प्रदर्शन नहीं करेगा तो टीम में अपनी जगह नहीं बना पाएगा। वहीं, अगर वह उम्मीदों पर खरा उतरता है तो वही खिलाड़ी आने वाले वर्षों में टीम की सबसे बड़ी ताकत बन सकता है।
इसलिए किसी युवा खिलाड़ी को खुद को साबित करने का मौका मिलने से पहले ही उसके चयन को गलत ठहरा देना उचित नहीं है।
चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाना गलत नहीं, लेकिन...
निष्पक्ष और पारदर्शी चयन प्रक्रिया हर खेल के लिए जरूरी है। यदि किसी चयन पर तथ्यात्मक सवाल हैं तो उन पर चर्चा होनी चाहिए। लेकिन केवल नाम, उम्र या कम अनुभव के आधार पर किसी खिलाड़ी की प्रतिभा पर सवाल उठाना भी सही नहीं माना जा सकता।
भविष्य के सितारों को चाहिए भरोसा
भारत जैसे विशाल देश में हर साल हजारों प्रतिभाशाली खिलाड़ी सामने आते हैं। उनमें से कुछ ही राष्ट्रीय टीम तक पहुंच पाते हैं। ऐसे में चयनकर्ताओं का काम केवल वर्तमान नहीं, बल्कि भविष्य को भी ध्यान में रखकर फैसला लेना होता है।
हो सकता है वैभव सूर्यवंशी भविष्य में खुद को साबित न कर पाएं, लेकिन यह भी संभव है कि वही भारतीय क्रिकेट के अगले बड़े सितारे बन जाएं। इसलिए उनके चयन में केवल न्याय-अन्याय खोजने के बजाय उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर देना अधिक उचित होगा।
क्रिकेट का इतिहास गवाह है कि कई महान खिलाड़ियों की शुरुआत भी सवालों के बीच हुई थी। इसलिए जरूरी है कि युवा खिलाड़ियों को पहले मैदान पर अपनी क्षमता दिखाने का मौका मिले। कहीं ऐसा न हो कि अत्यधिक आलोचना और संदेह के बीच हम किसी अगले सचिन तेंदुलकर जैसी प्रतिभा को उभरने से पहले ही रोक दें।

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