शिक्षा और रोजगार
Bijli Employees Strike: बिजली कर्मचारियों की हड़ताल से हाहाकार, 70 फीडर ठप, 75 गांवों में ब्लैकआउट
हेल्पलाइन नंबर भी रहा बेअसर, निजीकरण के विरोध में सरसा के 1600 से अधिक बिजली कर्मचारी 3 दिन की हड़ताल पर
Electricity Employees Strike: सरसा, (सच कहूँ/सुनील वर्मा)। निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मचारियों की तीन दिवसीय हड़ताल के पहले ही दिन सरसा जिले में बिजली व्यवस्था चरमरा गई। जिले के 7 बिजली घरों से जुड़े 70 फीडर ठप होने से करीब 75 गांवों में ब्लैकआउट जैसे हालात बन गए। वहीं सरसा शहर के बेगू रोड, रानियां बाजार, बरनाला रोड, कोर्ट कॉलोनी और औद्योगिक क्षेत्र समेत कई इलाकों में घंटों बिजली गुल रही। बिजली न होने के कारण जलापूर्ति भी प्रभावित हुई, जिससे लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
हेल्पलाइन पर उमड़े फोन, नहीं मिला संतोषजनक जवाब
बिजली संकट से जूझ रहे उपभोक्ता निगम द्वारा जारी हेल्पलाइन नंबर पर लगातार फोन करते रहे, लेकिन उन्हें कोई राहत नहीं मिली। हालात यह थे कि हेल्पलाइन पर एक मिनट में 3 से 4 कॉल्स आ रही थीं और महज 3 कर्मचारी 5 फोन संभाल रहे थे। उपभोक्ताओं को बिजली बहाली का समय बताने के बजाय सिर्फ यही रटा-रटाया जवाब मिल रहा था कि हड़ताल के कारण फीडर बंद हैं, बिजली कब आएगी, कुछ कहा नहीं जा सकता। निश्चित समय न मिलने से लोगों का गुस्सा और बढ़ गया।
डीसी की वैकल्पिक व्यवस्था से बचा पूरा जिला डूबने से अंधेरे में
कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने की भनक लगते ही डीसी शांतनु शर्मा ने पहले ही प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठक कर मोर्चा संभाल लिया था। नगर परिषद, बीएंडआर और जनस्वास्थ्य विभाग जैसे अन्य विभागों के 42 तकनीकी कर्मचारियों को आपातकालीन ड्यूटी पर तैनात किया गया। विभाग के कुल 1743 नियमित और अनुबंधित कर्मचारियों में से जहां सिर्फ 65 कर्मचारी ही ड्यूटी पर डटे रहे, वहीं दूसरे विभागों के इन 42 कर्मचारियों की मदद से प्रशासन ने दो दर्जन से अधिक फीडरों की आपूर्ति बहाल कर जिला पूरी तरह अंधेरे में डूबने से बचा लिया। इस बीच कर्मचारियों ने सरसा, रानियां, कालांवाली, ऐलनाबाद और डबवाली में धरना देकर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और निजीकरण का फैसला वापस लेने की मांग की।
अस्पताल में जनरेटर का सहारा, बस अड्डे पर पानी के लाले
बिजली कटौती का सीधा असर आवश्यक सेवाओं पर पड़ा। जिला नागरिक अस्पताल में आधी रात से जनरेटर के सहारे बिजली आपूर्ति चालू रखी गई। लघु सचिवालय और न्यायालय परिसर में भी बिजली गुल रही, लेकिन वैकल्पिक जनरेटर व्यवस्था से काम चलाया गया। वार्ड नंबर 21 (रानियां बाजार, बेरी वाली गली और रामदेव मंदिर क्षेत्र) सहित शहर के कई हिस्सों में पानी की आपूर्ति ठप रही। लोगों को आसपास के घरों से पानी ढोना पड़ा। बस स्टैंड पर शौचालयों में पानी न आने से यात्रियों को भारी परेशानी उठानी पड़ी।
इन इलाकों में सबसे ज्यादा असर
मोहम्मदपुरिया, नाथूसरी चौपटा, करीवाला, ओल्ड साइट सरसा, मंगालिया और भावदीन के बिजली घर सबसे ज्यादा प्रभावित रहे। हालांकि, डबवाली के देसूजोधा और कालांवाली क्षेत्र में बाद में आपूर्ति सुचारू कर दी गई, लेकिन अधिकांश बिजली घरों और कार्यालयों में सन्नाटा पसरा रहा और सभी कर्मचारी हड़ताल पर नजर आए। यदि हड़ताल लंबी चली, तो शहर और गांवों में पेयजल संकट और अधिक गहरा सकता है।
नाथूसरी चौपटा में छाया बिजली-पानी का संकट
नाथूसरी चौपटा, (सच कहूँ/भगत सिंह)। हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की प्रदेशव्यापी हड़ताल के पहले ही दिन नाथूसरी चौपटा क्षेत्र में बिजली और पानी की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। क्षेत्र के लगभग 120 कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने से नाथूसरी कलां, कागदाना, दड़बा कलां और जमाल स्थित 33 केवी पावर हाउस से बिजली आपूर्ति ठप रही। बिजली न मिलने से गांवों में पीने के पानी का संकट गहरा गया है। जोगीवाला गांव में तीन दिन से खराब मोटर ठीक हुई ही थी कि बिजली गुल हो गई। इससे आक्रोशित होकर जोगीवाला और चाहरवाला के ग्रामीण कागदाना बिजली घर पहुंचे। वहां पुलिस द्वारा रोके जाने पर ग्रामीणों ने उग्र होकर नारेबाजी की और विरोध प्रदर्शन किया। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यदि हड़ताल आगे खींची तो स्थिति और भयानक हो जाएगी। ग्रामीणों ने जल्द आपूर्ति बहाल करने की मांग की है।