‘अगर 100 किलोमीटर से भी वापिस आना पड़ता तो जरूर आते’

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पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां एक बार मोहाली में किसी सत्संगी के घर चरण टिकाने गए। पूज्य गुरू जी पूरे परिवार से मिले व उनको आशीर्वाद देकर खुशियोंं के साथ नवाजा। यहीं एक और डेरा श्रद्धालु ने पूज्य गुरू जी के आगे अर्ज की कि आप जी उनके घर भी चरण टिकाएं। इसके बाद पूज्य गुरू जी हिमाचल की तरफ चल पड़े। 6-7 किलोमीटर जाने के बाद पूज्य गुरू जी ने काफिले की गाड़ियों को वापिस मोड़ने के लिए कहा क्योंकि पूज्य गुरू जी ने दूसरे परिवार के घर चरण टिकाने थे।

 वहीं परिवार भी बहुत ही उदास हो गया कि पूज्य गुरू जी उनके घर चरण टिकाए बिना ही आगे चले गए। जब पूज्य गुरू जी उनके घर पधारे तो पूरे परिवार की खुशियों का कोई ठिकाना न रहा। पूज्य गुरू जी ने फरमाया, ‘‘आपके प्यार में आना ही था। 6-7 किलोमीटर तो क्या, अगर 100 किलोमीटर जाकर भी वापिस आना पड़ता तो जरूर आते।’’ पूज्य गुरू जी के दर्शन कर व वचन सुनकर पूरा परिवार निहाल हो गया।

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