Sapling shortage: सफेदे के क्लोन पर हटी रोक, लेकिन किसानों को उपलब्ध नहीं हो पा रहे पौधे

500 हेक्टेयर में क्लोन लगाने की मांग, अब तक 100 हेक्टेयर में ही पौधरोपण

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Sapling shortage: सरसा (सच कहूँ/सुनील वर्मा)। खेतों में सफेदे के क्लोन लगाने पर सरकार द्वारा लगाई गई रोक हटने के बाद सरसा में पौधरोपण का काम फिर शुरू हो गया है, लेकिन किसानों की डिमांड और पौधों की उपलब्धता के बीच बड़ा अंतर बना हुआ है। जिले में इस सीजन करीब 500 हेक्टेयर में सफेदा लगाने की मांग है, जबकि अब तक सिर्फ 100 हेक्टेयर क्षेत्र में ही पौधे लगाए जा सके हैं। यानी विभाग के पास पहुंची आपूर्ति मांग का महज 20 प्रतिशत है। बाकी किसानों को पौधों का इंतजार है। जिला वन अधिकारी सतीश कुमार के अनुसार, सरकार ने जिले में क्लोन यानी सफेदा लगाने पर लगी रोक हटा दी है और विभाग की ओर से पौधरोपण शुरू कर दिया गया है। किसानों को पौधे निशुल्क उपलब्ध करवाए जाते हैं, जबकि पौधों की देखरेख की जिम्मेदारी किसान की रहती है। जिले में सफेदे के पौधे मुख्य रूप से हिसार के बिटमड़ा और कुरुक्षेत्र के शौंटी से मंगवाए जाते हैं।

पी-6 से 413 तक, इन किस्मों की ज्यादा मांग

जिले में सफेदे की कई किस्में उपलब्ध हैं, लेकिन किसानों में पी-6, पी-23, शिवालिक-43 और 413 की मांग ज्यादा रहती है। इनमें 413 किस्म को अलग-अलग मौसम की परिस्थितियों के लिए अनुकूल माना जाता है।

घग्घर बेल्ट में छह महीने पहले तैयार

सफेदा लगाने में घग्घर बेल्ट और नाथूसरी चौपटा के सेम प्रभावित इलाकों के किसान अधिक रुचि दिखा रहे हैं। कम उपज वाले खेतों में किसान इसे अतिरिक्त आमदनी के विकल्प के रूप में देख रहे हैं। सामान्य परिस्थितियों में सफेदा करीब पांच साल में तैयार होता है, जबकि घग्घर बेल्ट में अनुकूल परिस्थितियों के चलते करीब छह महीने पहले तैयार होने की बात कही जाती है।

पेड़ों के बीच दो साल तक दूसरी फसल भी

सफेदे की खेती का एक फायदा यह भी है कि पौधे लगाने के बाद शुरूआती करीब दो साल तक किसान उनके बीच अन्य फसलें उगा सकते हैं। इससे पेड़ तैयार होने तक जमीन से दूसरी आय भी मिलती रहती है। यही कारण है कि सेम प्रभावित और कम उपज वाले इलाकों में किसानों का रुझान सफेदे के क्लोन की तरफ बढ़ रहा है।

प्लाईवुड उद्योग में रहती है लकड़ी की मांग

सफेदे की लकड़ी का प्रमुख इस्तेमाल प्लाईवुड उद्योग में होता है। पेड़ तैयार होने के बाद इसकी लकड़ी की औद्योगिक मांग बनी रहती है। किसानों के लिए यह लंबी अवधि में अतिरिक्त आमदनी का विकल्प है। हालांकि इस बार किसानों की सबसे बड़ी चिंता पौधों की सीमित उपलब्धता है।

जिले में क्लोन लगाने पर लगी रोक सरकार ने हटा दी है और विभाग ने पौधरोपण शुरू कर दिया है। डिमांड के मुकाबले पौधे कम मिले हैं। विभाग किसानों को निशुल्क पौधे उपलब्ध करवा रहा है, जबकि आगे उनकी देखरेख किसान को करनी होगी।  - सतीश कुमार, जिला वन अधिकारी सरसा। 

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