75 साल बाद महिला पहुंची चौपाल, सालों पुरानी परंपरा टूटी

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कलौदाखुर्द चौपाल में सांसद सुनीता दुग्गल को खिड़की से सुना

धमतान साहिब (सच कहूँ/कुलदीप नैन) एक तरफ समानता के बडे बडे नारे दिए जाते है वही दूसरी तरफ अभी भी गांवों में कुछ पुरानी प्रथाएं आज भी ज्यो की त्यों बनी हुई है। जहाँ एक ओर महिलाओ को पुरुषो के बराबर अधिकार दिए जाने पर सरकारे भी जोर लगा रही और सामाजिक लोग भी वही हकीकत में कई जगह ये दावे सिर्फ कागजो में सिमट कर रह जाते है।

ऐसा ही एक मामला सामने आया है नरवाना विधानसभा क्षेत्र के गाव कलोदा खुर्द में। हुआ यूं कि सिरसा लोकसभा सांसद सुनीता दुग्गल एक कार्यक्रम में भाग लेने गाँव पहुंची हुई थी। सांसद का कार्यक्रम गाँव की चौपाल में था। जब सांसद सुनीता दुग्गल कार्यक्रम में अपने विचार रख रही थी तो उन्होंने देखा कि कुछ महिलाएं चौपाल की खिड़की से उन्हें देख रही है। ऐसा देखकर सांसद ने महिलाओं को अंदर आने के लिए कहा तो ग्रामीणों ने कहा कि हमारे गाँव मे महिलाओं को चौपाल में आने पर पाबन्दी है। ग्रामीणों की बात सुनकर सुनीता दुग्गल हैरान रह गयी। दुग्गल ने कहा कि वह भी एक महिला है तो ग्रामीणों ने कहा कि आप हमारी मेहमान है, आपको हम कैसे रोक सकते है। सांसद ने कहा आज के बाद सिर्फ मैं नही गाव की हर महिला चौपाल में आने की अधिकारी होगी।

महिलाओ ने चौपाल की सीढियो पर माथा टेक किया प्रवेश

दुग्गल ने गाव की चौपाल में महिलाओं को फूल मालाएं डालकर प्रवेश करवाया। महिलाओ ने भी चौपाल के मुख्य द्वार पर माथा टेककर सजदा करके बड़े ही अदब से प्रवेश किया व सांसद का धन्यवाद किया। सांसद ने भी गाँव वालों का धन्यवाद करते हुए कहा कि आपने मेरे कहने से अपने गाँव की 75 साल पुरानी परंपरा को तोड़ा है, मेरा मान रखा तो इसके लिए सभी का दिल से धन्यवाद करती हूं।

गाँव की सरंपच व ब्लॉक समिति मेम्बर महिला लेकिन नही कर सकती चौपाल में प्रवेश

सांसद दुग्गल ने मजाक के लहजे में कहा कि आगे से इस गाँव के लिए महिला की सीट रिजर्व करनी पड़ेगी तो गाव वालो ने बताया कि अब भी रिजर्व ही है जी। यहां पर सरपंच भी महिला है और ब्लॉक समिति की मेम्बर भी महिला है। लेकिन हैरानीजनक बात यह है कि इनमें से कोई भी चौपाल में प्रवेश नही कर सकती थी।

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