संगरूर में गरजे पंजाब के कर्मचारी-पेंशनर्स, सरकार के खिलाफ किया प्रदर्शन और हाईवे जाम

पटियाला-बठिंडा नेशनल हाईवे पर किया जोरदार चक्का जाम

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संगरूर (सच कहूँ/गुरप्रीत सिंह)। Sangrur News: चंडीगढ़ में पिछले दिनों कर्मचारियों और पेंशनर्स की रैली के बाद शनिवार को पंजाब कर्मचारी एवं पेंशनर्स संयुक्त फ्रंट तथा कर्मचारी मंच पंजाब की संयुक्त तालमेल कमेटी की ओर से पंजाब सरकार के खिलाफ संगरूर में राज्य स्तरीय रैली की गई। इसमें पंजाब के हजारों कर्मचारियों, पेंशनर्स और मानदेय पर काम करने वाले मिड-डे मील, आशा तथा आंगनवाड़ी वर्करों ने भाग लिया। रैली के बाद पटियाला-बठिंडा नेशनल हाईवे पर जोरदार चक्का जाम किया गया। इस दौरान सिविल प्रशासन से पहुंचे एसडीएम ने मुख्य सचिव पंजाब के साथ बैठक करवाने का प्रस्ताव दिया, जिसे तालमेल कमेटी ने ठुकरा दिया। कमेटी ने माँग की कि यदि बैठक होगी तो मुख्यमंत्री पंजाब के साथ ही होगी।

इससे नीचे के स्तर पर कोई भी बैठक मंजूर नहीं की जाएगी। तालमेल कमेटी ने ऐलान किया कि संघर्ष जारी रखते हुए 21 और 22 अक्तूबर को सामूहिक छुट्टी लेकर पंजाब सरकार के खिलाफ रोष प्रदर्शन किया जाएगा। इसके बाद 22 से 27 अक्तूबर तक चलने वाले विधानसभा सत्र के दौरान जोरदार प्रदर्शन किए जाएंगे। रैली को संयुक्त तालमेल कमेटी के नेताओं सतीश राणा, गुरनाम सिंह विर्क, रणजीत, सुखचैन सिंह खैहरा, जर्मनजीत सिंह, सुशील कुमार फौजी, कर्म सिंह धनौआ, साहिल शर्मा और धनवंत सिंह भट्ठल सहित अन्य नेताओं ने संबोधित किया। 

माँगों को लेकर लम्बे समय से कर रहे संघर्ष: प्रदर्शनकारी

उन्होंने आरोप लगाया कि इन माँगों को लेकर लंबे समय से संघर्ष किया जा रहा है, लेकिन पंजाब सरकार लगातार टालमटोल की नीति अपना रही है। नेताओं ने कहा कि सरकार ने केवल 8 प्रतिशत महंगाई भत्ता देने की घोषणा कर ऐसा माहौल बनाया, मानो कर्मचारियों और पेंशनर्स के सभी मसले हल हो गए हों, जबकि उनकी एक भी मांग पूरी तरह पूरी नहीं की गई है। नेताओं ने बताया कि 18 सितंबर को हुई बैठक के दौरान मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आश्वासन दिया था कि माँगों के समाधान के लिए अक्तूबर के पहले सप्ताह में तालमेल कमेटी के साथ दोबारा बैठक की जाएगी। लेकिन अब सरकार बैठक करने से इनकार कर रही है। इससे साबित होता है कि सरकार की कथनी और करनी में बड़ा अंतर है।

इन मुख्य मांगों को लेकर हो रहा प्रदर्शन 

  • पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के सख्त आदेशों के बावजूद महंगाई भत्ते की किस्तें और बकाया जारी नहीं किए जा रहे। 
  • पेंशनर्स और वेतन संशोधन से वंचित श्रेणियों के कर्मचारियों पर 2.59 का गुणांक लागू नहीं किया जा रहा। 
  • पुरानी पेंशन योजना बहाल नहीं हुई। है।
  • विभिन्न श्रेणियों के कच्चे और आउटसोर्स कर्मचारियों को नियमित नहीं किया जा रहा। 
  • मानदेय पर काम करने वाले मिड-डे मील, आशा और आंगनवाड़ी वर्करों पर न्यूनतम वेतन लागू नहीं किया गया। 
  • ग्रामीण और सीमावर्ती क्षेत्रों सहित बंद किए गए 37 प्रकार के भत्ते तथा एसीपी योजना बहाल नहीं की गई।
  • 17 जुलाई 2020 के बाद भर्ती हुए कर्मचारियों पर पंजाब के वेतनमान लागू नहीं किए जा रहे। 
  • परिवीक्षा अवधि के दौरान पूरा वेतन नहीं दिया जा रहा 
  • कम्प्यूटर अध्यापकों को शिक्षा विभाग में शामिल नहीं किया गया।
  • 16 मई 2023 की नीति रद्द कर विशेष कैडर के शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों पर सिविल सर्विस नियम तथा पंजाब के वेतनमान लागू करने सहित कई मांगें लंबे समय से लंबित है।

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