जोबनेर कृषि विश्वविद्यालय का 14वां स्थापना दिवस, किसानों के लिए कृषि मौसम पोर्टल लॉन्च
नशा मुक्त भारत अभियान एवं विश्वविद्यालय स्थापना दिवस का भव्य आयोजन
Jobner Agricultural University Foundation Day: जयपुर/जोबनेर (सच कहूँ न्यूज़)। श्री कर्ण नरेंद्र कृषि विश्वविद्यालय, जोबनेर में नशामुक्त भारत अभियान के साथ विश्वविद्यालय का 14वां स्थापना दिवस समारोहपूर्वक मनाया गया। विश्वविद्यालय सभागार में आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता राजस्थान के राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति हरिभाऊ बागड़े ने की। कार्यक्रम में नशामुक्त समाज के निर्माण, कृषि शिक्षा में समन्वय, जल संरक्षण और किसानों के लिए तकनीक के उपयोग जैसे विषयों पर चर्चा हुई।
समारोह की शुरुआत कृषि महाविद्यालय के संस्थापक रावल नरेंद्र सिंह की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर की गई। राज्यपाल के विश्वविद्यालय पहुंचने पर उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इसके बाद उन्होंने नवनिर्मित विश्वविद्यालय सभागार का लोकार्पण किया तथा परिसर में पौधारोपण भी किया। विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रोफेसर डॉ. पुष्पेंद्र सिंह चौहान ने अतिथियों का स्वागत करते हुए संस्थान की गतिविधियों और उपलब्धियों की जानकारी दी।
नशे के खिलाफ सामूहिक जागरूकता जरूरी
राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने नशे के बढ़ते प्रभाव को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि नशे की समस्या केवल व्यक्ति तक सीमित नहीं रहती, बल्कि इसका असर पूरे परिवार और समाज पर पड़ता है। उन्होंने युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए व्यापक जनजागरूकता और सामूहिक प्रयासों की जरूरत बताई।
उन्होंने कहा कि नशे के सेवन से स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है और कई बार नशे की स्थिति में सड़क दुर्घटनाएं भी होती हैं। ऐसे में युवाओं की ऊर्जा को सकारात्मक गतिविधियों की ओर मोड़ना और उन्हें नशामुक्त जीवन के लिए प्रेरित करना समाज की साझा जिम्मेदारी है। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने नशामुक्ति पर आधारित नाटक प्रस्तुत किया। प्रस्तुति के माध्यम से युवाओं को नशे से दूर रहने तथा परिवार और समाज को नशामुक्त बनाने का संदेश दिया गया।
राज्यपाल ने राजस्थान के पांचों कृषि विश्वविद्यालयों के बीच कृषि शिक्षा में बेहतर समन्वय स्थापित करने पर जोर दिया। उन्होंने समान पाठ्यक्रम और परीक्षा प्रणाली की दिशा में काम करने की आवश्यकता बताई, जिससे प्रदेश में कृषि शिक्षा के स्तर पर एकरूपता और बेहतर तालमेल विकसित किया जा सके। उन्होंने कहा कि कृषि विश्वविद्यालयों की भूमिका केवल डिग्री प्रदान करने तक सीमित नहीं है। विद्यार्थियों को व्यावहारिक ज्ञान, शोध, नवाचार और समाज के प्रति जिम्मेदारी के लिए तैयार करना भी शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
किसानों के लिए वर्षाजल संरक्षण को बताया जरूरी
राज्यपाल ने किसानों से वर्षाजल के संरक्षण और पानी के विवेकपूर्ण इस्तेमाल की अपील की। उन्होंने कहा कि खेतों में बारिश के पानी को रोकने के उपाय किए जाने से फसलों के लिए जल उपलब्धता बेहतर हो सकती है। कृषि क्षेत्र में जल की बढ़ती जरूरत को देखते हुए वर्षाजल संरक्षण को प्राथमिकता देने की आवश्यकता है।
कुलगुरु प्रोफेसर डॉ. पुष्पेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल शैक्षणिक उपाधि देना नहीं, बल्कि उनमें ज्ञान, जिम्मेदारी और सकारात्मक सोच विकसित करना भी है। उन्होंने युवाओं से अपनी क्षमता और ऊर्जा का उपयोग रचनात्मक कार्यों में करने तथा नशामुक्त समाज के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों का ज्ञान, मेहनत, विचार और व्यवहार देश के भविष्य को प्रभावित करते हैं। कृषि विश्वविद्यालयों का दायित्व ऐसे युवाओं को तैयार करना है, जो कृषि क्षेत्र की समस्याओं का समाधान खोजने के साथ समाज के प्रति भी जिम्मेदार भूमिका निभा सकें।
पूर्व हाईकोर्ट न्यायाधीश ने नशे के दुष्परिणामों पर किया जागरूक
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में राजस्थान हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश करणी सिंह राठौर मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि नशे की शुरुआत छोटी आदत के रूप में हो सकती है, लेकिन इसका प्रभाव व्यक्ति के साथ उसके परिवार पर भी पड़ सकता है। उन्होंने नशे को कई सामाजिक समस्याओं और अपराधों से जुड़ी चुनौती बताते हुए सामूहिक प्रयासों से इसके खिलाफ अभियान चलाने पर जोर दिया।
उन्होंने संविधान और कानून में नशे से संबंधित प्रावधानों की जानकारी देते हुए युवाओं तथा समाज के सभी वर्गों को जागरूक रहने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी विश्वविद्यालय की पहचान उसके अनुशासन, शिक्षा, विचार और सामाजिक जिम्मेदारी से बनती है। समारोह के दौरान राज्यपाल ने विश्वविद्यालय की ओर से तैयार किए गए ‘कृषि मौसम पोर्टल’ का शुभारंभ किया। CIMCA के अंतर्गत विकसित इस पोर्टल को डॉ. उम्मेद सिंह और डॉ. एस. के. शर्मा ने तैयार किया है।
पोर्टल के माध्यम से भारतीय मौसम विभाग से प्राप्त वास्तविक समय के मौसम संबंधी आंकड़ों का उपयोग करते हुए 12 जिलों के किसानों को सात दिन का मौसम पूर्वानुमान, मौसम चेतावनी, फसल संबंधी सलाह और छिड़काव संबंधी सुझाव एक ही प्लेटफॉर्म पर निःशुल्क उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।
विश्वविद्यालय की पुस्तकों का विमोचन
राज्यपाल एवं कुलाधिपति हरिभाऊ बागड़े ने समारोह में विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित पुस्तकों का विमोचन भी किया। इनमें ‘कृषकों के नवाचार का संकलन’ तथा ‘फसल सुधार के 78 वर्ष: एस.के.एन.ए.यू. की किस्मों का समग्र डेटाबेस’ प्रमुख रूप से शामिल रहे। पहली पुस्तक को डॉ. बी. एस. बधाला, डॉ. आई. एम. खान, डॉ. संतोष सामोता, डॉ. बी. एल. आसीवाल, सोनू जैन, डॉ. अरुण प्रताप और डॉ. एम. के. शर्मा ने संकलित किया है। वहीं दूसरी पुस्तक का संकलन डॉ. उम्मेद सिंह, डॉ. रोशन चौधरी और डॉ. कैलाश चंद्र ने किया है।
कार्यक्रम का जोबनेर से सीधा प्रसारण किया गया। राजस्थान के अन्य कृषि विश्वविद्यालय भी ऑनलाइन माध्यम से समारोह से जुड़े। कार्यक्रम में कृषि विश्वविद्यालय जोधपुर के कुलगुरु डॉ. वी. एस. जैतावत, कृषि विश्वविद्यालय उदयपुर के कुलगुरु डॉ. प्रताप सिंह, पूर्व कुलगुरु डॉ. बी. आर. छीपा, पूर्व कुलगुरु डॉ. जेड. एस. सोलंकी, डॉ. संग्राम सिंह, पद्मश्री लक्ष्मण लपोड़िया और प्रगतिशील किसान रामलाल सहित कई गणमान्यजन उपस्थित रहे। समारोह में करीब 800 किसानों और विद्यार्थियों ने सहभागिता की। मंच संचालन डॉ. ओ. पी. गढ़वाल, डॉ. किरण गौड़ और डॉ. हिना सहीवाला ने किया। अंत में निदेशक छात्र कल्याण डॉ. एन. के. गुप्ता ने आभार व्यक्त किया। राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
