राजस्थान में फर्जी FMGE सर्टिफिकेट से एमबीबीएस करने वाले 4 डॉक्टर गिरफ्तार

जयपुर में फर्जी सर्टिफिकेट से एमबीबीएस करने वाले 4 डॉक्टर गिरफ्तार 

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जयपुर, एजेंसी। Jaipur News: विदेश से एमबीबीएस (बैचलर ऑफ मेडिसिन एंड बैचलर ऑफ सर्जरी) कर भारत में प्रैक्टिस के लिए फर्जी सर्टिफिकेट बनवाने के बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है।   

राजस्थान में स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने फर्जी एफएमजीई सर्टिफिकेट के जरिए एमबीबीएस करने वाले 4 डॉक्टरों को गिरफ्तार किया है। यह पूरा मामला राजस्थान मेडिकल काउंसिल में पंजीयन कराने के लिए फर्जीवाड़ा करने का है। एसओजी की जांच में फर्जी एफएमजीई सर्टिफिकेट का खुलासा हुआ है।

जानकारी के अनुसार, आरोपी डॉक्टर रूस और किर्गिस्तान से एमबीबीएस करके भारत लौटे थे। भारत में प्रैक्टिस करने के लिए विदेश से एणबीबीएस करने वाले डॉक्टरों को फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन (एफएमजीई) पास करना जरूरी होता है लेकिन इन आरोपियों ने परीक्षा पास नहीं की और 27 से 30 लाख रुपए देकर फर्जी सर्टिफिकेट बनवा लिए।

इन फर्जी दस्तावेजों के आधार पर आरोपियों ने राजस्थान मेडिकल काउंसिल में पंजीयन कराया और राजस्थान के मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप करने लगे। एसओजी इस फर्जी मेडिकल डिग्री और सर्टिफिकेट नेटवर्क की लगातार जांच कर रही है। इस मामले में अब तक 100 से अधिक लोगों को चिन्हित किया गया है। इससे पहले राजस्थान मेडिकल काउंसिल के रजिस्ट्रार समेत 33 आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं।

एसओजी की कार्रवाई के बाद चिकित्सा जगत में हड़कंप मच गया है। जांच एजेंसी अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश कर रही है और पूरे रैकेट की जड़ तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।

वहीं, इससे पहले 8 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस के नॉर्थ डिस्ट्रिक्ट के स्पेशल स्टाफ ने दिव्यांगों (पीडब्ल्यूडी) के लिए फर्जी सर्टिफिकेट बनाने और उन्हें उपलब्ध कराने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय नेटवर्क का पर्दाफाश किया था। इन सर्टिफिकेट का इस्तेमाल कथित तौर पर कॉलेजों और अंडरग्रेजुएट कोर्स में एडमिशन लेने के लिए किया जाता था।

दिल्ली पुलिस के अनुसार, इस रैकेट के सिलसिले में नौ लोगों को पकड़ा गया है और 27 नकली विकलांगता प्रमाण पत्र बरामद किए गए थे। आरोप है कि यह नेटवर्क उत्तर प्रदेश में अलग-अलग मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) कार्यालयों के कर्मचारियों की मिलीभगत से यूनिक डिसेबिलिटी आईडी (यूडीआईडी) रिकॉर्ड में हेरफेर करता था और नकली मेडिकल रिपोर्ट तथा विकलांगता प्रमाण पत्र तैयार करता था।

 

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