आयुर्वेद केवल चिकित्सा पद्धति नहीं, बल्कि स्वस्थ एवं संतुलित जीवन जीने का समग्र विज्ञान: कुलपति

उत्कृष्ट सेवाओं के लिए तीन कार्मिक सम्मानित

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National Institute of Ayurveda News: जयपुर, (सच कहूँ न्यूज़)। भगवान धन्वंतरि त्रयोदशी (धनतेरस) के पावन अवसर पर आयुष मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत संचालित राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान (मानद विश्वविद्यालय), जयपुर में भगवान धन्वंतरि की विधि-विधान एवं वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा-अर्चना की गई। इस अवसर पर संस्थान के कुलपति प्रो. संजीव शर्मा एवं डॉ. सुमन शर्मा ने भगवान धन्वंतरि का पूजन कर समस्त मानव समाज के उत्तम स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि एवं आरोग्य की कामना की।

पूजन के अवसर पर संस्थान में अखंड ज्योत भी प्रज्ज्वलित की गई। इस धार्मिक अनुष्ठान के माध्यम से संस्थान में सकारात्मकता, ऊर्जा, सुख-शांति एवं आरोग्य के भाव को बनाए रखने की कामना की गई। साथ ही, आगामी 9 नवंबर को आयोजित होने वाले संस्थान के विश्वविद्यालय स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में भी विशेष पूजा-अर्चना की गई।

इस अवसर पर कुलपति प्रो. संजीव शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि भगवान धन्वंतरि आयुर्वेद के प्रवर्तक एवं चिकित्सा विज्ञान के आराध्य देव हैं। आयुर्वेद केवल रोगों के उपचार की पद्धति नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवनशैली, रोगों की रोकथाम तथा शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक स्वास्थ्य का समग्र विज्ञान है। वर्तमान समय में आयुर्वेद की प्रासंगिकता और अधिक बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद की प्राचीन ज्ञान परंपरा को आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान के साथ जोड़कर जन-जन तक पहुंचाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

उन्होंने संस्थान के चिकित्सकों, शिक्षकों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों से आयुर्वेद के प्रचार-प्रसार तथा गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाओं के माध्यम से समाज के स्वास्थ्य संरक्षण में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया। कार्यक्रम के दौरान संस्थान के सीताराम शर्मा, सुरेश डेलू एवं लेखराज को उनके उत्कृष्ट कार्यों, समर्पण एवं संस्थान के प्रति दी गई उल्लेखनीय सेवाओं के लिए सम्मानित किया गया।

कुलपति ने उनके योगदान की सराहना करते हुए अन्य कार्मिकों को भी अपने दायित्वों का निष्ठा एवं समर्पण के साथ निर्वहन करने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में संस्थान के चिकित्सकों, शिक्षकों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। सभी ने भगवान धन्वंतरि की पूजा-अर्चना कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।

 

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