Insaniyat Campaign: उड़ीसा के प्रशांत को संगरिया के सेवादारों ने 5 हजार किमी. दूरी तय कर सकुशल घर पहुंचाया

करीब तीन साल से घर से लापता और मानसिक रूप से परेशान प्रशांत संगरिया की सड़कों पर बेसहारा भटकता मिला

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Insaniyat Campaign: संगरिया, (सुरेन्द्र जग्गा)। कभी-कभी जिंदगी में अपनों से बिछड़ने का दर्द इतना गहरा होता है कि उम्मीद भी जवाब देने लगती है। तीन साल से जिस बेटे के लौटने की आस में एक मां की आंखें राह तकते-तकते थक चुकी थीं, उस मां के सामने जब उसका बेटा अचानक सकुशल खड़ा हुआ तो खुशी के आंसुओं ने तीन साल का दर्द बहा दिया। करीब तीन साल से घर से लापता और मानसिक रूप से परेशान प्रशांत संगरिया की सड़कों पर बेसहारा भटकता मिला।

सेवादारों ने बताया कि 7 सितंबर को भगतपुरा रोड पर नहर के पास सेवादार राजपाल इन्सां और मास्टर शंकर लाल इन्सां को करीब 30 वर्षीय युवक मानसिक रूप से परेशान हालत में बेसहारा घूमता मिला। दोनों उसे संगरिया स्थित एमएसजी डेरा सच्चा सौदा व मानवता भलाई केंद्र लेकर आए और इसकी सूचना शाह सतनाम जी ग्रीन एस वेलफेयर कमेटी के जिम्मेवार लालचंद इन्सां को दी। युवक बेहद दयनीय हालत में था। उसके कपड़े मैले-कुचैले और बदबूदार थे। सेवादारों ने पहले उसे चाय-पानी पिलाया, पुलिस को सूचना दी और उसे नहलाकर साफ कपड़े पहनाए। कुछ संभलने के बाद युवक ने अपना नाम प्रशांत बताया, लेकिन उसकी भाषा समझना भी आसान नहीं था। यही वजह थी कि उसके परिवार तक पहुंचने में काफी मुश्किलें आईं।

भुवनेश्वर पुलिस ने की सेवादारों की सराहना

भुवनेश्वर थाना के एसआई आशीष नायक सहित पुलिस स्टाफ ने भी सेवादारों के प्रयास की सराहना करते हुए उनका आभार जताया। सेवा में इनका रहा सहयोग। इस पुनीत कार्य में शाह सतनाम जी ग्रीन एस वेलफेयर कमेटी के जिम्मेवार लालचंद इन्सां, पवन इन्सां जंडवाला, रवि इन्सां रतनपुरा, अमराराम इन्सां, सुखदेव इन्सां, महेश गोयल इन्सां, सुरेन्द्र जग्गा इन्सां, सच्ची प्रेमी समिति सेवादार, रॉकी गर्ग इन्सां, गुरचरण इन्सां, सुरजीत खोसा इन्सां, ब्लॉक प्रेमी सेवक लवली गर्ग इन्सां और रामफल इन्सां सहित साध-संगत का सहयोग रहा। 

संगरिया से उड़ीसा की दूरी करीब 2500 किलोमीटर थी। प्रशांत के परिजनों ने इतनी लंबी दूरी तय कर संगरिया आने में असमर्थता जताई। इसके बाद सेवादारों ने ऐसा फैसला लिया जिसने इंसानियत की नई मिसाल कायम कर दी। लालचंद इन्सां, पवन इन्सां और रवि इन्सां ने प्रशांत को उसके घर तक सुरक्षित पहुंचाने का निर्णय लिया। तीनों सेवादार प्रशांत को लेकर उड़ीसा रवाना हुए और आने-जाने में करीब 5000 किलोमीटर का सफर तय किया। उड़ीसा के भुवनेश्वर थाना में एसआई आशीष नायक की मौजूदगी में प्रशांत को उसकी मां सलोचना के सुपुर्द किया गया। तीन साल बाद बेटे को सामने देखकर मां की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। प्रशांत के परिजनों ने आभार जताते हुए कहा कि धन्य हैं ऐसे गुरु जी व उनके सेवादारों की सेवा भावना जिनकी वजह से इन्सानियत आज भी जिंदा है।

सोशल मीडिया बना परिवार से मिलाने का जरिया

प्रशांत के परिजनों की तलाश के लिए साध-संगत जुट गई और सोशल मीडिया के माध्यम से लगातार प्रयास किए गए। इस दौरान रामफल इन्सां की अथक मेहनत रंग लाई और प्रशांत की बहन रुबीना से संपर्क हुआ। रुबीना ने अपनी मां सलोचना से बात करवाई और धीरे-धीरे प्रशांत के परिवार का पता चल गया। परिजनों ने बताया कि प्रशांत मानसिक परेशानी की हालत में करीब तीन साल पहले बिना बताए घर से निकल गया था। परिवार ने उसे कई जगह तलाश किया, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला।

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