'लक्षित मामलों' के खिलाफ वकीलों का न्यायिक बहिष्कार
हाईकोर्ट से कार्ययोजना वापस लेने की मांग
हनुमानगढ़। राजस्थान उच्च न्यायालय, जोधपुर की ओर से लंबित 'लक्षित मामलों' के निस्तारण की छठे चरण की कार्ययोजना लागू किए जाने के विरोध में सोमवार को बार संघ हनुमानगढ़ के अधिवक्ताओं ने न्यायिक कार्यों का पूर्ण बहिष्कार किया। बार संघ के आह्वान पर सभी अधिवक्ताओं ने सोमवार को किसी भी न्यायालय में न्यायिक कार्य में हिस्सा नहीं लिया। Hanumangarh News
बार संघ अध्यक्ष रोहित सिंह खिच्ची के अनुसार राजस्थान उच्च न्यायालय, जोधपुर ने पत्रांक के माध्यम से अधीनस्थ न्यायालयों में लंबित लक्षित मामलों के निस्तारण की छठे चरण की कार्ययोजना निर्धारित की है। इसी कार्ययोजना के विरोध में अधिवक्ताओं ने न्यायिक कार्यांे से विरत रहने का निर्णय लिया। खिच्ची के अनुसार लक्षित मामलों के निस्तारण की कार्ययोजना प्रारंभ में 20 वर्ष या उससे अधिक पुराने लंबित प्रकरणों के निस्तारण के उद्देश्य से शुरू की गई थी।
वर्तमान में इस योजना के दायरे में 5 वर्ष से कम पुराने प्रकरणों को भी शामिल किया जा रहा है, जिस पर उन्हें गंभीर आपत्ति है। अधीनस्थ न्यायालयों में मामलों की न्यायिक गुणवत्ता पर ध्यान देने के बजाय अधिक से अधिक मामलों के संख्यात्मक निस्तारण की प्रतिस्पर्धा शुरू हो गई है। इससे न्याय प्रणाली के आधारभूत मानदंड प्रभावित हो रहे हैं और न्याय की गुणवत्ता से समझौता होने की आशंका है। उन्होंने कहा कि न्यायालयों में मामलों के निस्तारण का आधार केवल फाइलों की संख्या नहीं होना चाहिए। Hanumangarh News
प्रत्येक मामले में तथ्यों, साक्ष्यों, कानूनी पहलुओं और पक्षकारों को पर्याप्त समय देकर निष्पक्ष निर्णय किया जाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि निर्धारित संख्या में मामलों के निस्तारण पर जोर देने से न्यायिक प्रक्रिया की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। अधिवक्ताओं के अनुसार इस व्यवस्था से उनकी निजी जीवनशैली और कार्यप्रणाली भी बुरी तरह प्रभावित हो रही है।
बार संघ पदाधिकारियों ने बताया कि लक्षित मामलों के निस्तारण की कार्ययोजना को लेकर राजस्थान के विभिन्न अधीनस्थ न्यायालयों में अधिवक्ताओं की ओर से विरोध किया जा रहा है। इसी विरोध का समर्थन करते हुए बार संघ हनुमानगढ़ के समस्त अधिवक्ताओं ने सोमवार को पूर्ण रूप से न्यायिक कार्यांे से दूरी बनाए रखी। अधिवक्ताओं ने मांग की है कि लंबित मामलों के निस्तारण में केवल संख्या बढ़ाने के बजाय न्याय की गुणवत्ता, निष्पक्षता और न्यायिक प्रक्रिया के मूल सिद्धांतों को प्राथमिकता दी जाए। Hanumangarh News