Tijara Chairperson Election 2026: ''हरियाणा पुलिस ने कांग्रेस का समर्थन करने वाले 18 पार्षदों को हिरासत में लिया''

तिजारा सभापति चुनाव से पहले सियासी हलचल, कांग्रेस ने लगाया बड़ा आरोप

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Tijara Chairperson Election 2026: तिजारा (सच कहूँ न्यूज़)। राजस्थान के खैरथल-तिजारा जिले की तिजारा नगर परिषद में सभापति पद के चुनाव से ठीक पहले हरियाणा में पार्षदों को रोके जाने के आरोप से राजनीतिक माहौल गरमा गया है। कांग्रेस ने दावा किया है कि हिमाचल प्रदेश से राजस्थान लौट रहे उसके समर्थन वाले करीब 18 पार्षदों को रविवार देर रात चंडीमंदिर-सूरजपुर टोल प्लाजा के पास पुलिस ने रोक लिया। इस घटनाक्रम के बाद कांग्रेस नेताओं और समर्थकों ने पिंजौर पुलिस थाने के बाहर धरना शुरू कर दिया।

तिजारा के कांग्रेस नेता इमरान खान के अनुसार, पार्षदों को ले जा रही बस के साथ कई अन्य वाहन भी थे। आरोप है कि इन्हें सूरजपुर टोल प्लाजा के पास रोका गया और बाद में पिंजौर थाने ले जाया गया। कांग्रेस नेताओं ने पुलिस कार्रवाई के तरीके को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि कुछ पुलिस वाहनों की नंबर प्लेट स्पष्ट दिखाई नहीं दे रही थी। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। घटना के बाद कांग्रेस कार्यकर्ता और पार्षदों के परिजन पिंजौर थाने पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने रोके गए पार्षदों की स्थिति और उन्हें रोकने के आधार की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की।

तिजारा चुनाव में 18 वोटों का है बहुमत

तिजारा नगर परिषद में कुल 35 वार्ड हैं और सभापति के चुनाव में बहुमत के लिए 18 वोट जरूरी हैं। उपलब्ध चुनावी आंकड़ों के अनुसार 31 सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवार विजयी रहे, जबकि भाजपा को तीन और कांग्रेस को एक सीट मिली। कांग्रेस नेताओं का दावा है कि 17 निर्दलीय पार्षदों का समर्थन उसके साथ है।

यदि यह समर्थन मतदान के समय भी कायम रहता है, तो कांग्रेस समर्थित खेमे के पास 18 वोट का आंकड़ा पूरा हो जाता है। इसी वजह से मतदान से पहले पार्षदों की मौजूदगी को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हुई हैं। तिजारा के पूर्व विधायक संदीप यादव ने भी पुलिस हस्तक्षेप का आरोप लगाते हुए वीडियो जारी किया। कांग्रेस नेताओं के अनुसार, बाद में उन्हें छोड़ दिया गया। कांग्रेस ने इस पूरे घटनाक्रम को चुनाव से पहले की राजनीतिक गतिविधियों से जोड़ते हुए सवाल उठाए हैं।

वहीं, राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भी मामले को लेकर सरकार पर आरोप लगाए और पार्षदों को रोके जाने की बात कही। तिजारा के डीएसपी शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कांग्रेस नेताओं की ओर से पार्षदों को रोके जाने की शिकायत सामने आई है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि हरियाणा पुलिस की कौन-सी इकाई ने कथित तौर पर इस समूह को रोका था। डीएसपी के अनुसार, शिकायत और उपलब्ध तथ्यों की जांच के बाद ही आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यानी फिलहाल कांग्रेस की ओर से लगाए गए आरोपों की पुलिस स्तर पर पुष्टि नहीं हुई है।

मतदान से पहले बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी

तिजारा नगर परिषद के सभापति पद के लिए सोमवार को मतदान होना है। ऐसे में पार्षदों को कथित तौर पर रोके जाने की खबर ने चुनावी घटनाक्रम को और संवेदनशील बना दिया है। कांग्रेस नेताओं की चिंता है कि यदि पार्षद समय पर तिजारा नहीं पहुंच पाए तो वे मतदान में शामिल नहीं हो सकेंगे। दूसरी ओर, पुलिस की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि पार्षदों को किस परिस्थिति में रोका गया और इस कार्रवाई का कानूनी आधार क्या था। फिलहाल पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि संबंधित पार्षद मतदान से पहले तिजारा पहुंच पाते हैं या नहीं और हरियाणा में उनके रोके जाने के आरोप की जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं।

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