Punjab Powercom: बिजली संकट के बीच पंजाब सरकार ने लिया बड़ा फैसला

बसंत गर्ग को पावरकॉम की कमान से हटाया

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चंडीगढ़ (सच कहूँ/अश्वनी चावला)। Punjab Powercom News: पंजाब में बिजली संकट के लगातार गंभीर होने और राजनीतिक दलों द्वारा आम आदमी पार्टी की सरकार पर लगातार सवाल उठाए जाने के बीच पंजाब सरकार ने पावरकॉम के शीर्ष अधिकारी को बदलकर बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। पंजाब राज्य बिजली निगम के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक डॉ. बसंत गर्ग को इस पद से हटा दिया गया है। उनकी जगह 2001 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी गुरकीरत कृपाल सिंह को बिजली एवं नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत विभाग के प्रमुख सचिव के साथ पंजाब राज्य बिजली निगम और पंजाब राज्य बिजली ट्रांसमिशन निगम के प्रमुख की जिम्मेदारी सौंपी गई है। सरकारी आदेशों के अनुसार बसंत गर्ग को उद्योग एवं वाणिज्य, निवेश प्रोत्साहन और सूचना प्रौद्योगिकी से संबंधित विभागों की जिम्मेदारी दी गई है।

अगले साल 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले पंजाब में बढ़ते बिजली कट सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन रहे हैं। किसान बिजली आपूर्ति को लेकर चिंतित हैं, उद्योगपति उत्पादन प्रभावित होने की बात कह रहे हैं और आम लोग गर्मी के दिनों में लंबे कटों से परेशान हैं। पंजाब सरकार को लग रहा था कि इसका आगामी विधानसभा चुनावों पर भी असर पड़ सकता है, जिसके चलते बसंत गर्ग को हटाकर वरिष्ठ अधिकारी गुरकीरत कृपाल सिंह की तैनाती की गई है। इस समय सितंबर माह के दौरान पंजाब में बिजली की मांग 16,500 मेगावाट से ऊपर जा चुकी है और मांग 16,619 मेगावाट तक पहुंचने की बात सामने आई है।

लुधियाना, जालंधर, अमृतसर और मोहाली सहित कई औद्योगिक इलाकों में 14 घंटे तक के कटों ने कारोबारियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। घरेलू और ग्रामीण उपभोक्ता भी लंबे और अघोषित बिजली कटों की शिकायतें कर रहे हैं। इस समय सबसे बड़ा सवाल यह है कि पंजाब में बिजली की मांग बढ़ने के मुकाबले उत्पादन और आपूर्ति की तैयारी कितनी थी। उपलब्ध बिजली उत्पादन क्षमता में भी कमी आई है। पिछले समय में जहाँ यह क्षमता लगभग 6,580 मेगावाट बताई जाती थी, वहीं अब यह करीब 5,680 मेगावाट रह गई है। दो निजी ताप बिजली घरों की इकाइयां बंद होने के कारण लगभग 1,360 मेगावाट बिजली उत्पादन भी कम होने की खबरें सामने आई हैं।

Tarunpreet Singh Sond

बिजली संकट को लेकर पंजाब सरकार केन्द्र सरकार पर भी निशाना साध रही है। बिजली मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंद ने दावा किया था कि पंजाब को केन्द्रीय बिजली भंडार में से उसके हिस्से से 1,051 मेगावाट कम बिजली मिल रही है। इसके विपरीत केन्द्रीय कोयला मंत्रालय की ओर से पंजाब के सरकारी ताप बिजली घरों में कोयले के भंडार को जरूरत के अनुसार बताया गया है और कम उत्पादन को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।

नहरों की मरम्मत में देरी होने से भी बिजली उत्पादन को नुकसान होने की रिपोर्टें

इस दौरान पंजाब राज्य बिजली निगम की ओर से निजी बिजली उत्पादकों को कोयले के भंडार से जुड़ी कमियों के संबंध में नोटिस जारी किए गए हैं। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बिजली संकट से निपटने के लिए बैठक भी तय की गई है। नहरों की मरम्मत में देरी के कारण भी बिजली उत्पादन को नुकसान होने की रिपोर्ट सामने आई है, जिससे लगभग 210 करोड़ रुपये के उत्पादन नुकसान का अनुमान लगाया गया है।

बसंत गर्ग को पावरकॉम की कमान से हटाने और गुरकीरत कृपाल सिंह को बिजली विभाग सहित दोनों बिजली निगमों की जिम्मेदारी सौंपने से सरकार ने साफ संकेत दिया है कि बिजली प्रबंधन में तत्काल सुधार की जरूरत महसूस की जा रही है। हालांकि सरकार की ओर से बसंत गर्ग के तबादले को सीधे तौर पर बिजली संकट के लिए जवाबदेही से नहीं जोड़ा गया है, लेकिन बिजली कटों के चरम समय में लिया गया यह फैसला राजनीतिक और प्रशासनिक तौर पर कई सवाल खड़े कर रहा है।

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