मदरसे, मस्जिदें और मकतब नई पीढ़ी की दीन व अखलाकी तरबियत का मजबूत जरिया: मौलाना शराफत
मदरसे, मस्जिदें और मकतब नई पीढ़ी की दीन व अखलाकी तरबियत का मजबूत जरिया: मौलाना शराफत
कैराना (सच कहूँ न्यूज़)। Kairana News: प्रसिद्ध धर्मगुरु एवं छपरौली (बागपत) स्थित धार्मिक संस्थान के नाजिम-ए-आला मौलाना मुहम्मद शराफत खान ने कहा कि मदरसे, मस्जिदें और मकतब नई पीढ़ी की दीन व अखलाकी तरबियत में अहम भूमिका निभा रहे हैं। बच्चों को कुरआन, दीनी मसाइल और इस्लामी आदाब से रूबरू कराना वक्त की अहम जरूरत है। इल्म के साथ अच्छी तरबियत ही नेक, बाकिरदार और बाअखलाक समाज की बुनियाद तैयार करती है।
अभिभावकों को चाहिए कि वह दुनियावी शिक्षा के साथ बच्चों की दीनी तालीम और तरबियत पर भी विशेष ध्यान दें। वह कस्बे के दरबार खुर्द गुलशन नगर स्थित फातिमा मस्जिद के मकतब फैजुल कुरआन में आयोजित छमाही परीक्षा के समापन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मकतब फैजुल कुरआन में आयोजित छमाही परीक्षा में 140 छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया। परीक्षा में छात्र-छात्राओं ने विभिन्न कक्षाओं में अपनी शैक्षिक क्षमता का प्रदर्शन किया। इसमें प्रथम स्थान मुहम्मद अरमान पुत्र रियाजुद्दीन, द्वितीय जाकिरा पुत्री कारी मुहम्मद इरफान, तृतीय जोया पुत्री अनीस, चतुर्थ अबूजर शौकीन और पंचम मुहम्मद अबूजर शौकीन ने प्राप्त किया।
परीक्षा के लिए मौलाना मुहम्मद शराफत खान, नाजिम मदरसा छपरौली, हाफिज महमूद हसन टांडा, मौलाना मुहम्मद इलियास टांडा, हाफिज मुहम्मद आसिफ, कारी मेहरबान शामली और हाफिज मुबीन(एनए स्कूल) ने परीक्षक के रूप में हिस्सा लिया। कार्यक्रम में साहित्यकार एवं शायर डॉ. अजमतुल्ला खान मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने मकतब में दीनी तालीम के प्रचार-प्रसार और छात्राओं की शिक्षा के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।
हाजी मुहम्मद ताहिर ने बताया कि यहां छात्राएं मस्जिद में शिक्षा प्राप्त नहीं करती हैं, बल्कि अलग व्यवस्था के तहत महिला शिक्षिका के मार्गदर्शन में दीनी तालीम हासिल करती हैं। उन्होंने कहा कि छात्राओं को दीनी और अखलाकी शिक्षा से रूबरू कराना समाज की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। कार्यक्रम में मुहम्मद आकिल, मुहम्मद साजिद, मुहम्मद रईस, मुहम्मद तैयब, हाजी शौकीन, मुहम्मद अब्दुल्ला, गुलफाम, आमिर भाई (रांची), सलमान अब्बासी (बिजली वाले) और मुहम्मद शाहरुख समेत अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।