26 साल पुराने धोखाधड़ी मामले में कुशल डायमंड्स और उसके दो डायरेक्टरों को 5 साल की सजा

सीबीआई कोर्ट का फैसला, कंपनी पर 30 लाख जुर्माना भी

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Kushal Diamonds Fraud Case: अहमदाबाद (सच कहूँ/एजेंसी)। गुजरात के अहमदाबाद स्थित सीबीआई कोर्ट ने करीब 26 साल पुराने धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के मामले में अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने निजी कंपनी मेसर्स कुशल डायमंड्स लिमिटेड और उसके दो निदेशकों को दोषी करार दिया है। कोर्ट ने कंपनी पर 30 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। इसके अलावा कंपनी के चीफ मैनेजिंग डायरेक्टर बकुल जवेरी और डायरेक्टर मजह एस. कपाड़िया को पांच-पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई है। दोनों पर 30-30 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।

सीबीआई के अनुसार, यह मामला नेशनल स्मॉल इंडस्ट्रीज कॉर्पोरेशन यानी एनएसआईसी की अहमदाबाद इकाई से जुड़ा हुआ है। जांच में सामने आया था कि बिल डिस्काउंटिंग सुविधा और कच्चा माल सहायता योजना के तहत कुशल डायमंड्स लिमिटेड को कुल 2,34,85,081 रुपये की वित्तीय सहायता दी गई थी।

जांच के मुताबिक, इस राशि में से 1,34,88,717 रुपये पुराने बकाये, चेक से प्राप्त भुगतान, विदेशी खरीदारों से मिले भुगतान और अर्नेस्ट मनी डिपॉजिट के रूप में समायोजित किए गए। इसके बाद 31 मार्च 1996 तक कंपनी पर 99,96,364 रुपये की अंतिम देनदारी बची थी। सीबीआई ने इसे एनएसआईसी को हुआ गलत आर्थिक नुकसान बताया था।

वर्ष 2000 में दर्ज हुआ था मामला

सीबीआई ने इस प्रकरण में 15 मार्च 2000 को प्राथमिकी दर्ज की थी। आरोप था कि एनएसआईसी, अहमदाबाद के तत्कालीन अधिकारियों ने कुशल डायमंड्स लिमिटेड के निदेशकों के साथ मिलकर आपराधिक साजिश रची और वित्तीय अनियमितताओं को अंजाम दिया। जांच पूरी होने के बाद सीबीआई ने 8 जनवरी 2002 को आठ आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था। आरोपियों में कुशल डायमंड्स लिमिटेड, उसके निदेशक बकुल जवेरी, मजह एस. कपाड़िया और सुभाष छनाना के अलावा एनएसआईसी के चार अधिकारी शामिल थे।

मुकदमे की सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने कंपनी और उसके दो निदेशकों को दोषी ठहराया। वहीं, एनएसआईसी के चार अधिकारियों—वीरेन्द्र कुमार सावनी, रोहित ढींगरा, राम अवतार अग्रवाल और राजेश अरोड़ा—को अदालत ने आरोपों से बरी कर दिया। मामले के एक अन्य आरोपी सुभाष छनाना का मुकदमे के दौरान निधन हो गया था। इसलिए अदालत ने उनके खिलाफ चल रही कार्यवाही समाप्त कर दी।

इस मामले में सीबीआई की ओर से वर्ष 2000 में कार्रवाई शुरू की गई थी। लगभग 26 साल बाद आए फैसले में अदालत ने निजी कंपनी और उसके दो निदेशकों को दोषी माना, जबकि एनएसआईसी के अधिकारियों को आरोपों से राहत दी। अदालत के निर्णय से स्पष्ट है कि मामले में प्रत्येक आरोपी की भूमिका का अलग-अलग परीक्षण किया गया।

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