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Housing Inflation: घर खरीदना हुआ और महंगा! 5 साल में 59% बढ़े मकानों के दाम, जमीन से लेकर कंस्ट्रक्शन तक बढ़ा खर्च
घर खरीदना हुआ और महंगा! 5 साल में 59% बढ़े मकानों के दाम, जमीन से लेकर कंस्ट्रक्शन तक बढ़ा खर्च
Housing Inflation: अगर आप अपना घर खरीदने या बनवाने की योजना बना रहे हैं तो अब बजट पहले से ज्यादा रखना पड़ सकता है। पिछले कुछ वर्षों में घरों की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है। इसका सीधा असर आम खरीदारों की जेब पर पड़ रहा है। घर खरीदने के लिए जहां अब ज्यादा डाउन पेमेंट की जरूरत पड़ रही है, वहीं बड़े होम लोन के कारण EMI का बोझ भी बढ़ सकता है।
अनारॉक रिसर्च की रिपोर्ट के मुताबिक, 2021 से 2025 के बीच देश के सात बड़े शहरों में घरों की औसत कीमत करीब 59 फीसदी बढ़ी है। इसी अवधि में घर बनाने की लागत में करीब 34 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। यानी मकानों की कीमत जिस रफ्तार से बढ़ी, उसके मुकाबले निर्माण लागत की बढ़ोतरी काफी कम रही।
हर साल करीब 12% बढ़ी घरों की कीमत
रिपोर्ट के अनुसार, 2021 से 2025 के बीच घरों की कीमत में औसतन करीब 12 फीसदी सालाना की वृद्धि हुई। वहीं, घर बनाने की लागत में सालाना बढ़ोतरी लगभग 6.9 फीसदी रही। इसका मतलब साफ है कि घर खरीदने की कीमत और उसे बनाने में आने वाले खर्च के बीच अंतर लगातार बढ़ रहा है। कीमतों में हुई कुल बढ़ोतरी में करीब 66 फीसदी हिस्सा निर्माण लागत का रहा, जबकि बाकी करीब 34 फीसदी में जमीन की कीमत, डेवलपर का मार्जिन और मांग-सप्लाई जैसे कई दूसरे कारण शामिल रहे।
1,000 वर्ग फुट का घर 34 लाख रुपये से ज्यादा महंगा
बढ़ती कीमतों का असर एक सामान्य घर के उदाहरण से भी समझा जा सकता है। साल 2021 में करीब 1,000 वर्ग फुट का घर औसतन 58.3 लाख रुपये में पड़ता था। 2025 में इसी आकार के घर की औसत कीमत बढ़कर करीब 92.6 लाख रुपये हो गई। यानी केवल पांच साल में इसकी कीमत में करीब 34.3 लाख रुपये की बढ़ोतरी हो गई। इसका सीधा असर उन लोगों पर पड़ता है जो होम लोन लेकर घर खरीदना चाहते हैं। ज्यादा कीमत का मतलब है कि खरीदार को ज्यादा डाउन पेमेंट करनी पड़ सकती है और ज्यादा रकम का होम लोन लेना पड़ सकता है। ऐसे में हर महीने की EMI भी बढ़ने की संभावना रहती है।
जमीन के दाम ने बढ़ाई घर की कीमत
घर महंगा होने की एक बड़ी वजह जमीन की बढ़ती कीमत भी है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2021 से 2026 की पहली छमाही तक देश के सात प्रमुख शहरों में जमीन की कीमत करीब 50% से 120% तक बढ़ी। NCR में जमीन के दाम करीब 70% से 130% तक बढ़ने की बात सामने आई है। वहीं, बेंगलुरु में यह बढ़ोतरी करीब 60% से 120% तक रही।
खास बात यह है कि जिन इलाकों में नई सड़कें, मेट्रो, एक्सप्रेसवे या दूसरी बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर सुविधाएं पहुंच रही हैं, वहां जमीन की कीमतों में तेजी ज्यादा देखने को मिली है।
आगे भी बढ़ सकता है घर बनाने का खर्च
घर खरीदने वालों के लिए परेशानी यहीं खत्म नहीं होती। अनारॉक के अनुमान के मुताबिक, मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के कारण निर्माण लागत में आगे 8% से 10% तक अतिरिक्त बढ़ोतरी हो सकती है। निर्माण से जुड़ी कई जरूरी चीजों की कीमत पहले ही बढ़ चुकी है। स्टील की कीमत में करीब 20%, जबकि ईंधन और साइट लॉजिस्टिक्स से जुड़े खर्च में करीब 15% से 20% की बढ़ोतरी बताई गई है। वहीं, फिनिशिंग मैटेरियल्स की कीमत करीब 8% से 12% और एसी, वायरिंग, पाइपलाइन समेत MEP से जुड़े खर्च में करीब 9% से 13% की वृद्धि हुई है।
पुराने प्रोजेक्ट्स में डेवलपर्स पर बढ़ेगा दबाव
निर्माण लागत बढ़ने का असर सिर्फ नए घरों पर नहीं पड़ेगा। जिन प्रोजेक्ट्स को पहले ही लॉन्च किया जा चुका है और जिनमें घर बिक भी चुके हैं, उनमें डेवलपर्स के लिए बढ़ी हुई लागत का पूरा बोझ खरीदारों पर डालना आसान नहीं होगा। ऐसे मामलों में डेवलपर्स के प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है। उन्हें निर्माण लागत बढ़ने के बावजूद पहले से तय कीमतों पर प्रोजेक्ट पूरा करना पड़ सकता है।
नए प्रोजेक्ट्स में बढ़ सकती हैं कीमतें
नए प्रोजेक्ट लॉन्च करने वाले डेवलपर्स के पास बढ़ी हुई लागत को कीमतों में शामिल करने की कुछ गुंजाइश जरूर है। लेकिन यहां भी एक बड़ी चुनौती है।
अगर किफायती या मिडिल-क्लास खरीदारों के लिए बनाए जा रहे घरों की कीमत बहुत ज्यादा बढ़ती है तो उनकी मांग पर असर पड़ सकता है। पहले से ही महंगे होम लोन और बढ़ती EMI के बीच कीमतों में और बढ़ोतरी आम खरीदारों के बजट को प्रभावित कर सकती है। वहीं, प्रीमियम और लग्जरी घरों के मामले में बढ़ी हुई निर्माण लागत को संभालना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है, क्योंकि इस सेगमेंट में खरीदारों की भुगतान क्षमता ज्यादा होती है।
आम खरीदार के लिए बढ़ी चुनौती
कुल मिलाकर, पिछले पांच वर्षों में घरों की कीमतों में हुई तेज बढ़ोतरी ने आम खरीदार के लिए घर खरीदना पहले से ज्यादा मुश्किल बना दिया है। जमीन महंगी होने के साथ-साथ स्टील, ईंधन, लॉजिस्टिक्स और फिनिशिंग मैटेरियल की लागत भी बढ़ रही है।
अगर निर्माण लागत और प्रॉपर्टी की कीमतों में इसी तरह तेजी जारी रहती है तो आने वाले समय में घर खरीदने वालों को ज्यादा डाउन पेमेंट, बड़ा होम लोन और ज्यादा EMI का सामना करना पड़ सकता है। खासकर मिडिल क्लास और किफायती घर तलाशने वाले खरीदारों के लिए आने वाले समय में सही बजट और लोकेशन का चुनाव सबसे अहम हो जाएगा।