500-Rupee Note: PNB की करेंसी चेस्ट में मिले ₹500 के करोड़ों नकली नोट, आंकड़ा ₹17 करोड़ तक पहुंचा; जानिए कैसे पहचानें असली नोट

PNB की करेंसी चेस्ट में मिले ₹500 के करोड़ों नकली नोट, आंकड़ा ₹17 करोड़ तक पहुंचा; जानिए कैसे पहचानें असली नोट

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नई दिल्ली। PNB Fake Currency Case: पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की करेंसी चेस्ट में ₹500 के नकली नोट मिलने का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। सहारनपुर में सामने आए इस मामले में पहले नकली नोटों की रकम करीब 7.40 करोड़ रुपये बताई जा रही थी, लेकिन अब यह आंकड़ा बढ़कर करीब 17 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। जांच आगे बढ़ने के साथ यह रकम और बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।

सबसे बड़ी चिंता इस बात को लेकर है कि आखिर इतनी बड़ी मात्रा में नकली नोट बैंक की करेंसी चेस्ट तक कैसे पहुंचे। आम तौर पर लोग बैंक से मिलने वाली नकदी को बिना ज्यादा जांचे सही मान लेते हैं, क्योंकि उन्हें भरोसा होता है कि बैंक में नोटों की जांच पहले ही हो चुकी होगी। ऐसे में अगर नकली नोट बैंकिंग सिस्टम से बाहर निकलकर बाजार में पहुंचते, तो बड़ी संख्या में लोग इसका शिकार बन सकते थे।

क्या है सहारनपुर का PNB करेंसी चेस्ट मामला?

यह मामला सहारनपुर के घंटाघर स्थित सोफिया मार्केट की PNB शाखा से जुड़ा है। यहां बैंक की करेंसी चेस्ट में ₹500 के बड़ी संख्या में नकली नोट मिलने के बाद हड़कंप मच गया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए SIT का गठन किया गया है और नकली नोट बैंक तक पहुंचाने वाले लोगों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है।

बताया गया कि करीब 11.50 करोड़ रुपये की करेंसी जयपुर भेजी गई थी, जिसमें लगभग 4 लाख रुपये की कमी सामने आई। इसी गड़बड़ी की जांच के दौरान बैंक की करेंसी चेस्ट का ऑडिट कराया गया। जांच में बड़ी मात्रा में नकली नोट सामने आने के बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ।

अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि नकली नोट बैंकिंग सिस्टम में किस स्तर पर और किस माध्यम से पहुंचे।

आखिर बैंकों तक नकली नोट पहुंचते कैसे हैं?

बैंकों में जमा होने वाली नकदी की जांच के लिए कई स्तरों पर व्यवस्था होती है। नोटों को मशीनों के जरिए स्कैन किया जाता है और संदिग्ध नोटों की पहचान की जाती है। इसके अलावा जरूरत पड़ने पर नोटों की मैनुअल जांच भी की जाती है।

इसके बावजूद कभी-कभी बेहद उच्च गुणवत्ता वाले नकली नोट शुरुआती जांच में बच निकल सकते हैं। ग्राहकों द्वारा जमा की गई नकदी, बड़े कैश लेनदेन और संगठित नकली नोट नेटवर्क इसके संभावित स्रोत हो सकते हैं।

यही वजह है कि सहारनपुर के मामले ने बैंकिंग सिस्टम के साथ-साथ आम लोगों की चिंता भी बढ़ा दी है।

₹500 के नोट को असली क्या बनाता है? इन फीचर्स पर दें ध्यान

भारतीय रिजर्व बैंक के नए ₹500 के नोट में कई सुरक्षा फीचर्स दिए गए हैं। नकली नोट बनाने वालों के लिए इन सभी सुरक्षा फीचर्स की हूबहू नकल करना मुश्किल होता है।

इसलिए सिर्फ नोट का रंग या आकार देखकर फैसला नहीं करना चाहिए। नोट की पहचान के लिए कई सुरक्षा फीचर्स को एक साथ जांचना ज्यादा सुरक्षित तरीका है।

1. महात्मा गांधी का वॉटरमार्क

नोट को रोशनी के सामने रखने पर महात्मा गांधी की तस्वीर दिखाई देती है। इसके साथ ₹500 का इलेक्ट्रोटाइप वॉटरमार्क भी नजर आता है।

2. सिक्योरिटी थ्रेड

₹500 के नोट में सिक्योरिटी थ्रेड मौजूद होता है। नोट को अलग-अलग कोण से देखने पर इसके रंग में बदलाव दिखाई देता है। थ्रेड पर संबंधित सुरक्षा लेखन भी देखा जा सकता है।

3. रंग बदलने वाला ₹500 अंक

नोट पर मौजूद बड़े ₹500 के अंक को ध्यान से देखें। नोट को झुकाने पर इस अंक का रंग बदलता हुआ दिखाई देता है। यह एक महत्वपूर्ण सुरक्षा फीचर है।

4. सी-थ्रू रजिस्टर

नोट के आगे और पीछे बने कुछ डिजाइन रोशनी में देखने पर एक-दूसरे से मेल खाते हैं और ₹500 का अंक पूरा करते हैं। इसे सी-थ्रू रजिस्टर कहा जाता है।

5. माइक्रो लेटरिंग

महात्मा गांधी की तस्वीर के पास बेहद छोटे अक्षरों में सुरक्षा संबंधी लेखन मौजूद होता है। इसे सामान्य आंखों से पढ़ना मुश्किल हो सकता है, लेकिन मैग्नीफाइंग ग्लास की मदद से देखा जा सकता है।

6. उभरी हुई छपाई

नोट पर महात्मा गांधी की तस्वीर, RBI की मुहर, अशोक स्तंभ और कुछ अन्य हिस्सों में उभरी हुई छपाई होती है। उंगलियों से छूने पर इन हिस्सों को महसूस किया जा सकता है।

7. पहचान के लिए विशेष निशान

₹500 के नोट पर ऐसा उभरा हुआ पहचान चिह्न भी दिया गया है, जिससे दृष्टिबाधित लोग नोट की पहचान करने में मदद ले सकते हैं।

सिर्फ देखकर न करें असली-नकली का फैसला

नकली नोट की पहचान करते समय केवल किसी एक सुरक्षा फीचर पर निर्भर रहना सही नहीं है। नोट की प्रिंटिंग क्वालिटी, कागज, रंग, वॉटरमार्क, सिक्योरिटी थ्रेड, माइक्रो लेटरिंग और उभरी हुई छपाई जैसे कई पहलुओं को एक साथ देखना चाहिए।

अगर नोट की छपाई धुंधली है, कागज की गुणवत्ता असामान्य लग रही है, रंगों का संयोजन ठीक नहीं है या सुरक्षा फीचर्स स्पष्ट नहीं दिख रहे हैं, तो नोट संदिग्ध हो सकता है।

बैंक से मिले कैश को भी एक बार जरूर जांचें

सहारनपुर के PNB मामले के बाद सबसे अहम सबक यही है कि बैंक से मिले नोटों को भी बिना जांचे पूरी तरह सही मान लेना उचित नहीं है। बैंकिंग सिस्टम में नोटों की जांच के बावजूद किसी संदिग्ध नोट पर संदेह होने पर उसकी दोबारा जांच करानी चाहिए।

याद रखें—नोट असली है या नकली, इसका फैसला सिर्फ उसके दिखने से नहीं बल्कि उसके सुरक्षा फीचर्स की जांच के बाद ही करें। संदिग्ध नोट मिलने पर उसे आगे किसी दूसरे व्यक्ति को देने के बजाय बैंक में इसकी जानकारी देना बेहतर है।

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