गंगा का पानी हुआ काला, जलीय जन्तुओं की मौत, साधु-संतों मे रोष
मोरना (सच कहूँ न्यूज़)। Morna News: पौराणिक तीर्थनगरी शुकतीर्थ में गुरुवार को गंगा में काला पानी देख साधु संतों में रोष व्याप्त हो गया। गुरुवार की सुबह सवेरे स्नान करने पहुँचे साधु संत गंगा में तैरती मछलियों को देख दंग रह गए गंगा स्नान घाट पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ इकट्ठा हो गई तथा पुलिस को सूचना दी गयी। साधु संतों तीर्थवासियो व श्रद्धालुओं ने गंगा में दूषित पानी छोड़ने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है तथा आंदोलन करने की चेतावनी भी दी है।
शुकतीर्थ में स्थित मां पूर्णागिरि आश्रम के महंत महामंडलेश्वर स्वामी गोपाल दास महाराज गंगा स्नान घाट पर पहुंचे जहां उन्होंने गंगा में आए दूषित पानी को लेकर भारी रोष प्रकट करते हुए कहा कि अनेक बार गंगा में केमिकल युक्त पानी छोड़ा जाता है जिससे हजारों लाखों जलीय जंतु मर जाते हैं। गंगा का पानी जहरीला हो जाने से साधु संत दूर दराज से आने वाले श्रद्धालु बिना स्नान कर ही लौट जा रहे हैं तथा गंगाजल का आचमन भी कोई नहीं कर रहा है शुकतीर्थ के विकास के नाम पर सरकार अरबो रुपए खर्च करने के दावे करती है किंतु जब गंगा का स्वरूप ही नहीं रहेगा तो तीर्थ का स्वरूप किस प्रकार का होगा इसका अनुमान लगाया जा सकता है।
उत्तराखंड क्षेत्र की फैक्ट्रियों द्वारा कैमिकल युक्त पानी को गंगा में छोड़ा जाता है।अनेक बार शिकायत की गयी है किंतु भ्रष्टाचार के कारण शिकायत पर कार्यवाही कुछ भी नहीं हुई है।
पर्यावरण प्रेमी तथा समाजसेवी रमेश चंद्र वर्मा ने बताया कि पिछले 8-10 सालों से वह गंगा संरक्षण पर कार्य कर रहे हैं। किंतु शासन प्रशासन गंगा संरक्षण जैव विविधता संरक्षण को लेकर गंभीर नहीं है अनेक बार काला पानी प्रदूषित पानी छोड़ा जाता है जिससे जैव विविधता को भारी नुकसान होता है
गंगा सेवा समिति के महामंत्री डॉ. महकार सिंह ने बताया की उनके प्रयासों से अनेक बार 10 लाख के लगभग मछलियों के बच्चे गंगा में छोड़े जा चुके हैं। किंतु कुछ समय बाद गंगा में दूषित पानी आ जाने पर सभी जलीय जंतु मर जाते हैं जिसके लिए वह लगातार संघर्ष करते रहे हैं किंतु बड़े दुख और खेद की बात है कि प्रशासन इस और कोई ध्यान नहीं देता है। जंतुओं के मर जाने से यहां पर्यावरण को नुकसान हुआ है वही धार्मिक भावनाएं भी आहत हुई हैं बात करें साधु संतों की तो साधु संतों ने इस घटना पर रोष प्रकट किया है।
